ब्रिटिश-पाकिस्तानी बाइकर्स गुलियफशान तारिक ने लंदन से लाहौर तक 56 दिनों में अकेले मोटरसाइकिल यात्रा पूरी की, जो महिलाओं के सशक्तिकरण और स्वतंत्रता का संदेश देती है. इस यात्रा के दौरान वह यूरोप और एशिया के कई देशों से गुजरीं और वहां के नजारों को ऑनलाइन शेयर किया.
कठिन मौसम, अलग-अलग रास्तों और स्थानीय लोगों से मुलाकात के बीच, उनकी यह साहसिक यात्रा महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई है. खासकर पाकिस्तान की महिलाओं के लिए यह एक मजबूत संदेश है कि वे अपने अधिकारों और अवसरों के लिए खड़ी हो सकती हैं.
गलियफशान की यात्रा के वीडियो में हाईवे, पहाड़ी रास्ते, फेरी क्रॉसिंग, व्यस्त शहर की सड़कों और शांत ग्रामीण इलाकों के दृश्य दिखाए गए हैं. कुछ क्लिप्स में उन्होंने कठिन मौसम और सुनसान रास्तों का सामना करते हुए अपनी मोटरसाइकिल चलाते हुए दिखाया है, जबकि अन्य में स्थानीय लोगों और अन्य बाइकर्स के साथ उनकी बातचीत भी नजर आती है.
तारिक, जो मैनचेस्टर में अपने पति और बेटी के साथ रहती हैं, उन्होंने पहले कहा था कि यह सफर महिलाओं के सशक्तिकरण और स्वतंत्रता का संदेश देने के लिए है. खासकर पाकिस्तान की महिलाओं के लिए. उन्होंने कहा था कि यह सवारी पाकिस्तान और इसकी मजबूत महिलाओं को समर्पित है. उन्होंने उन महिलाओं को प्रेरित करने की उम्मीद जताई जो अधिकारों और अवसरों से वंचित हैं.
वीडियो में तारिक ने बताया कि कराची में 80 से अधिक महिला बाइकर्स ने उनका स्वागत किया, जिससे वे बहुत खुश और हैरान थीं. उनकी मूल यात्रा फ्रांस, स्विट्जरलैंड, इटली, ग्रीस और तुर्की से होकर पाकिस्तान तक जाने की थी, लेकिन क्षेत्रीय तनाव और मार्ग की अनिश्चितताओं के कारण रूट चेंज करना पड़ा और विकल्प बदलने पड़े.
तारिक पहले भी साहसिक यात्रा कर चुकी हैं. 24 साल की उम्र में उन्होंने खैबर पख्तूनख्वा और गिलगित-बाल्टिस्तान के जिलों में सोलो मोटरसाइकिल यात्रा कर रिकॉर्ड बनाया था. ऑनलाइन, लोग इस यात्रा के वीडियो क्लिप देख से खासे प्रभावित हुए. कई ने इसे निर्भीक और इंस्प्रीशनल बताया, जबकि कुछ ने इसे ट्रेवलॉग के नजारों जैसा माना. कई महिलाओं ने तारिक की सराहना की कि उन्होंने सोलो यात्रा और बाइकिंग कल्चर के आसपास के रूढ़िवादों को चैलेंज किया. खासकर दक्षिण एशियाई समुदायों में जहां ऐसी यात्राएं पुरुषों के लिए ही सुरक्षित मानी जाती है.