क्या सपनों की कोई उम्र होती है? रील और वायरल के दौर में इस सवाल का जवाब है-नहीं. डिजिटल दुनिया ने कई लोगों को एक मंच दिया है, जहां उनके टैलेंट को पहचान मिल रही है. पश्चिम बंगाल के 71 साल के एक रिटायर शिक्षक की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. उन्हें युवावस्था से ही सुर और ताल से प्यार था और उन्होंने इस जुनून को हमेशा जिंदा रखा. हालांकि इसकी असली पहचान उन्हें 71 साल की उम्र में मिली, जब लोग उनकी आवाज के दीवाने हो गए. इंस्टाग्राम पर उनके गानों को करोड़ों व्यूज मिलने लगे.
पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना के बोंगांव के रहने वाले रवींद्र नाथ बिस्वास आज सोशल मीडिया पर ‘गान दादू’ के नाम से वायरल हो रहे हैं.रवींद्र नाथ बिस्वास पेशे से लाइफ साइंस के शिक्षक थे, लेकिन संगीत हमेशा उनकी जिंदगी का हिस्सा रहा. पढ़ाई के साथ-साथ वह चोरी-छिपे गाने की प्रैक्टिस करते थे और कॉलेज के दिनों में दोस्तों के लिए गाते थे.हालांकि पारिवारिक जिम्मेदारियों की वजसे उन्हें नौकरी करनी पड़ी और संगीत को कभी फुल-टाइम करियर नहीं बना सके.
रिटायरमेंट के बाद बदली जिंदगी
60 साल की उम्र में रिटायर होने के बाद उन्हें अपने शौक के लिए ज्यादा समय मिला. वह छोटे-छोटे स्टेज शो करते रहे और घर पर रियाज जारी रखा.कोविड लॉकडाउन के दौरान उनके बेटों ने उनका फेसबुक अकाउंट बनाया, जहां उन्होंने अपने गाने शेयर करने शुरू किए. लेकिन असली बदलाव दिसंबर 2025 में आया, जब उनके बेटों ने उनका इंस्टाग्राम अकाउंट 'Gaan dadu' बनाया.
एक वीडियो और मिली पहचान
इंस्टाग्राम पर अपलोड किया गया पहला ही वीडियो वायरल हो गया और 71 साल के बिस्वास रातों-रात इंटरनेट सेंसेशन बन गए.उनका गाया ‘फिर से’ गाना काफी चर्चा में रहा, वहीं 'खत' गाने को 1.1 करोड़ से ज्यादा व्यूज मिले. खास बात यह है कि उनके वीडियो में कोई बड़ी प्रोडक्शन नहीं होती.सिर्फ उनकी आवाज और एक साधारण बैकग्राउंड और खालिस टैलेंट.
बिना ट्रेनिंग, सिर्फ जुनून
बिस्वास ने कभी औपचारिक संगीत शिक्षा नहीं ली. उन्होंने सुनकर, अभ्यास करके और दूसरों से सीखकर खुद को निखारा.2025 में एक समय ऐसा भी आया जब किडनी की हल्की समस्या के कारण उन्होंने गाना छोड़ने का सोचा, लेकिन उनके बेटों ने उन्हें फिर से प्रेरित किया.
सपनों की कोई उम्र नहीं
आज उनके पुराने छात्र भी उनकी सफलता पर गर्व महसूस करते हैं. बिस्वास का कहना है कि उन्हें कभी नहीं लगा था कि उन्हें इतना प्यार मिलेगा.उनकी कहानी यही बताती है कि सपनों को कभी नहीं छोड़ना चाहिए. चाहे उम्र 20 हो या 70, अगर जुनून जिंदा है तो शुरुआत कभी भी की जा सकती है.