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'चार की चौकड़ी कर रही है टीम अन्‍ना को बदनाम'

वरिष्ठ समाजसेवी अन्ना हजारे ने सोमवार को अपनी टीम के प्रमुख सदस्य किरण बेदी का बचाव किया और जन लोकपाल विधेयक का विरोध करने के लिए 'चार लोगों के समूह' की आलोचना की.

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वरिष्ठ समाजसेवी अन्ना हजारे ने सोमवार को अपनी टीम के प्रमुख सदस्य किरण बेदी का बचाव किया और जन लोकपाल विधेयक का विरोध करने के लिए 'चार लोगों के समूह' की आलोचना की.

किरण बेदी पर यात्रा बिलों का अधिक भुगतान लेने का आरोप है. इन दिनों मौन व्रत धारण किए हुए अन्ना हजारे ने अपने ब्लॉग पर लिखा कि अगर सरकार को यह लगता है कि बेदी ने पैसों का उपयोग अपने निजी हित के लिए किया तो इसकी जांच होनी चाहिए और अगर वह दोषी पाई जाती हैं तो उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए.

उन्होंने लिखा है कि कुछ लोगों का यह मंत्र बन गया है कि वे लोगों को आरोपी ठहराएं और उन्हें अपमानित करें. उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं है कि बेदी पर आरोप लगाए हैं, टीम अन्ना के कई सदस्यों पर आरोप लगाए हैं और 'चार लोगों का समूह' चरित्र हनन तक पर उतारू हैं. ये लोग कौन हैं? ये वही लोग हैं जो जन लोकपाल के समर्थन में नहीं हैं. अन्ना हजारे ने हालांकि 'चार लोगों का समूह' के नामों का खुलासा नहीं किया.

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इस बीच अन्ना हजारे के पूर्व सहयोगी स्वामी अग्निवेश ने सोमवार को टीम अन्ना पर नए आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि अन्ना हजारे के रामलीला मैदान अनशन के दौरान जुटाए गए पैसे का ब्योरा सार्वजनिक किया जाना चाहिए, जबकि पर्यावरण कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने अनियमितता के आरोप को खारिज किया और कहा कि सच्चाई जल्द ही सामने आ जाएगी. इससे पहले अग्निवेश ने अरविंद केजरीवाल पर आरोप लगाया था कि उन्होंने इंडिया अगेंस्ट करप्शन में जुटाए गए 70 से 80 लाख रुपये अपने निजी ट्रस्ट में डाल दिए.

पाटकर इंडिया अगेंस्ट करप्शन की मुख्य समिति की सदस्या हैं. उन्होंने कहा कि लेखा जांच जारी है और इसके परिणाम जल्द ही सार्वजनिक किए जाएंगे.

पाटकर ने कहा कि मुख्य समिति की बैठक में अग्निवेश मौजूद नहीं थे, इसलिए वह अन्ना की नाराजगी के विषय में नहीं कह सकते हैं. निश्चित रूप से उन्होंने स्थिति को गलत तरीके से समझा होगा. इस बीच कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह ने भी केजरीवाल पर हमला किया.

उन्होंने कहा, 'भारतीय जनता पार्टी केजरीवाल को सहयोग कर रही है. ऐसा लगता है कि दोनों के बीच कोई सम्बंध है. मेरी बात फिर से सही साबित हुई.' उन्होंने कहा, 'वह सूचना का अधिकार के समर्थक हैं और पारदर्शिता में विश्वास करते हैं. इसलिए उन्हें सच बतलाना चाहिए. या तो अग्निवेश झूठ बोल रहे हैं या वह.'

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