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युवक की दोस्त बनी 89 साल की महिला, एक घर में रहते हैं दोनों

89 साल की पैट जॉनसन पेंशनर हैं. वह लंदन में रहती हैं और 27 साल के लियाम डुने की लिव-इन-लैंडलॉर्ड हैं. लियाम, पैट के साथ 'शेयर माई होम' स्‍कीम के तहत रह रहे हैं. लंदन में यह अनूठी स्‍कीम है. इसके तरह बुजुर्ग लोगों के यहां कोई भी नौजवान रह सकता है. इसके बदले नौजवानों को उनके काम करने होते हैं.

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लियाम डुने और पैट जॉनसन (Credit: Liam Dunne )
लियाम डुने और पैट जॉनसन (Credit: Liam Dunne )

89 साल की महिला दोस्त के साथ 27 साल के युवक ने रहना शुरू कर दिया. युवक ने यह फैसला बेतहाशा महंगाई और किराये के बोझ के कारण किया. पेशे से आर्टिस्‍ट लियाम डुने के लिए लंदन में रहना और किराया देना उनके बस से बाहर हो चुका था, ऐसे में उन्‍होंने एक विधवा महिला के साथ रहना शुरू कर दिया. 
 
'मिरर' की रिपोर्ट के मुताबिक, लंदन में एक सर्विस प्रोवाइडर 'शेयर माई होम' स्कीम चलाती है.  इसके तहत युवा प्रोफेशनल अकेले रहने वाले बुजुर्ग लोगों के साथ रह सकते हैं. इसी कारण से लियाम ने 89 साल की पैट जॉनसन के साथ रहना शुरू कर दिया. 

पैट जॉनसन पेंशनर हैं. वह लंदन में रहती हैं और लियाम की लिव-इन-लैंडलॉर्ड हैं. दोनों साथ में रहते हैं. लियाम पैट जॉनसन के कुत्‍ते और टैंक की देखभाल करते हैं. इसके अलावा पैट को यदि कोई घर से संबंधित दिक्‍कत होती है तो भी पैट उनकी मदद करते हैं. लियाम ने बताया कि पैट अब उनकी दोस्त बन चुकी हैं.

पैट पहले शिकागो (अमेरिका) में रह रही थीं. बाद में वह वह ब्रिक्‍सटन (दक्षिणी लंदन का एक जिला) में आकर बस गईं. पति की मौत के बाद उन्‍हें 'शेयर माय होम' सर्विस की जानकारी हुई. 

बहन ने दी लियाम को इस स्‍कीम की जानकारी 
लियाम ब्रिटेन के ग्रिम्‍स्‍बाय (Grimsby) के रहने वाले हैं. पहले वह इस स्‍कीम को लेकर थोड़ा संशय में थे. Share my home सर्विस के बारे में सबसे पहले जानकारी उनकी बहन ने दी थी. वह खुद इस स्‍कीम का अनुभव कर चुकी थीं. लियाम की बहन का अनुभव अच्‍छा रहा.

लियाम ने कहा कि पैट की उम्र उनके लिए दिक्‍कत नहीं थी. हालांकि, लियाम के व्‍यवहार की पैट ने भी तारीफ की. उन्‍होंने कहा कि वह घर के कामों में काफी मदद करते हैं.  

क्‍या है 'शेयर माई होम'?

sharemyhome.co.uk एक सर्विस प्रोवाइडर है जो बुजुर्गों को युवाओं के साथ जोड़ने का काम करती है. वृद्ध लोगों के लिए उनके मिजाज और आपसी फायदे के आधार पर पार्टनर उपलब्‍ध करवाती है. घर बुजुर्गों का होता है, लेकिन घर में रहने वाले शख्‍स को हर सप्‍ताह 10 से 15 घंटे बुजुर्गों की मदद करनी होती है. इसके बदले बुजुर्ग साथ रहने वाले शख्‍स को कमरा रहने के लिए दे देते हैं.


 

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