मशहूर फोटो जर्नलिस्ट रघु राय का 83 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. उनके परिवार ने सोशल मीडिया के जरिए इसकी जानकारी दी. बताया गया कि उनका अंतिम संस्कार दिल्ली के लोधी श्मशान घाट में किया जाएगा. उनके पीछे पत्नी गुरमीत, बेटा नितिन और बेटियां लगन, अवनी और पूर्वाई हैं. उनके निधन से मीडिया और कला जगत में शोक की लहर है.
(Photo: ITG)
(Photo:Raghu Rai/ITG)
रघु राय का जन्म 1942 में झंग (अब पाकिस्तान) में हुआ था. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1960 के दशक में की. शुरुआत में वह सिविल इंजीनियरिंग से जुड़े थे, लेकिन बाद में फोटोग्राफी की ओर मुड़े. उनके भाई एस. पॉल ने उन्हें इस क्षेत्र में प्रेरित किया. एक साधारण शुरुआत ने आगे चलकर उन्हें दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित फोटोग्राफरों में शामिल कर दिया.
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1966 में रघु राय ने ‘द स्टेट्समैन’ अखबार में चीफ फोटोग्राफर के रूप में काम शुरू किया. यहीं से उन्हें पहचान मिलने लगी. उनकी तस्वीरों में आम लोगों की जिंदगी और समाज की सच्चाई झलकती थी. इसके बाद उन्होंने ‘संडे’ मैगजीन और फिर ‘इंडिया टुडे’ में काम किया, जहां उन्होंने फोटो जर्नलिज्म को नई दिशा दी.
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रघु राय का ‘इंडिया टुडे’ के साथ जुड़ाव बेहद खास रहा. 1980 के दशक में उन्होंने यहां कई यादगार फोटो स्टोरीज कीं. उनकी तस्वीरों ने भारतीय पत्रकारिता की विजुअल पहचान को मजबूत किया. उनके काम को उस दौर की सबसे प्रभावशाली फोटो जर्नलिज्म में गिना जाता है.
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1977 में रघु राय को मशहूर फ्रेंच फोटोग्राफर हेनरी कार्टियर-ब्रेसों (Henri Cartier-Bresson) ने Magnum Photos से जुड़ने के लिए नामित किया. यह सम्मान पाने वाले वे पहले भारतीय बने. इससे उन्हें वैश्विक पहचान मिली. उनकी तस्वीरें TIME, LIFE, न्यूयॉर्क टाइम्स और नेशनल जियोग्राफिक जैसी अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हुईं.
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रघु राय ने भारत के कई बड़े ऐतिहासिक घटनाओं को कैमरे में कैद किया. 1984 की भोपाल गैस त्रासदी की उनकी तस्वीरें आज भी उस दर्द को बयां करती हैं. इसके अलावा उन्होंने 1971 के बांग्लादेश युद्ध, इमरजेंसी और सामाजिक बदलावों को भी अपने कैमरे में दर्ज किया. उनकी तस्वीरें सिर्फ फोटो नहीं, बल्कि इतिहास का दस्तावेज हैं.
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उन्होंने इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, मदर टेरेसा, बाला साहेब ठाकरे और सत्यजीत रे जैसे बड़े व्यक्तित्वों की तस्वीरें खींचीं. उनकी खासियत थी कि वह इन हस्तियों के मानवीय पहलुओं को सामने लाते थे. उनकी फोटो में सिर्फ चेहरा नहीं, बल्कि उस व्यक्ति की कहानी भी नजर आती थी.
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रघु राय को 1972 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया. 1992 में उन्हें ‘फोटोग्राफर ऑफ द ईयर’ का खिताब मिला. इसके अलावा उन्हें लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड सहित कई अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिले. उनके काम को दुनिया भर में सराहा गया और उन्हें फोटोग्राफी के क्षेत्र में एक आइकन माना गया.
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आइये नजर डालते हैं उनकी कुछ ऐसी यादगार तस्वीरों पर, जो वक्त को थाम लेने की ताकत रखती हैं.
सुपरस्टार अमिताभ बच्चन फिल्म निर्देशक प्रकाश मेहरा और मनमोहन देसाई के साथ, एक ही फ्रेम में सिनेमा का सुनहरा दौर कैद.
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1984 के दंगों के पीड़ित, रघु राय के कैमरे में कैद वह दर्द जो वक्त बीतने के बाद भी आज तक महसूस होता है.
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पंडित भीमसेन जोशी, राग भैरव में डूबे हुए, सुरों की गहराई और साधना का जीवंत चित्र.
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राजीव गांधी चुनाव प्रचार के दौरान, जनसमर्थन के बीच एक निर्णायक पल कैमरे में कैद.
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राजीव गांधी और इंदिरा गांधी, कोलकाता में ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी की बैठक के दौरान, रघु राय के कैमरे में कैद भारतीय राजनीति का एक ऐतिहासिक और जीवंत पल.
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धीरूभाई अंबानी, मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी, 1986 में एक साथ, रघु राय के कैमरे में कैद उभरते भारतीय उद्योग जगत की एक खास झलक.
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सत्यजीत रे, 1983 का यह पोर्ट्रेट, रघु राय के कैमरे में कैद सिनेमा के महान शिल्पी की गहरी और चिंतनशील छवि.
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धीरेंद्र ब्रह्मचारी, 1980 की यह तस्वीर, रघु राय के कैमरे में कैद योग और आध्यात्मिक जगत के चर्चित गुरु, जो उस दौर में सत्ता के गलियारों में अपनी पहुंच के लिए भी जाने जाते थे.
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शबाना आज़मी और जावेद अख्तर, रघु राय के कैमरे में कैद एक खूबसूरत फ्रेम, जहां सिनेमा और साहित्य की दो मजबूत आवाजें साथ नजर आती हैं.
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मदर टेरेसा, 1983 की यह तस्वीर, रघु राय के कैमरे में कैद करुणा और सेवा की मिसाल, मिशनरीज ऑफ चैरिटी की संस्थापक और नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित व्यक्तित्व.
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खजुराहो नृत्य महोत्सव (1984) में प्रस्तुति देती एक कलाकार, रघु राय के कैमरे में कैद भारतीय शास्त्रीय नृत्य की सौंदर्य और ऊर्जा से भरी झलक.
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'लाइफ इन बॉम्बे' की यह झलक, रघु राय के कैमरे में कैद महानगर की भागदौड़, भीड़ और जिंदगी की अनगिनत परतों को दिखाती एक जीवंत तस्वीर.
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एशियाई खेल 1982 के लिए ट्रेन में ले जाए जा रहे हाथी, रघु राय के कैमरे में कैद एक अनोखा और दुर्लभ दृश्य, जो उस दौर की तैयारियों की झलक दिखाता है.
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सुंदरबन (1988) में सिर के पीछे मास्क लगाए मछुआरे, रघु राय के कैमरे में कैद वह अनोखी तरकीब, जिससे वे जंगली जानवरों से बचने की कोशिश करते नजर आते हैं.
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हरमंदिर साहिब परिसर में ऑपरेशन ब्लू स्टार (1984) के बाद क्षतिग्रस्त अकाल तख्त को देखते श्रद्धालु, रघु राय के कैमरे में कैद इतिहास का बेहद संवेदनशील और मार्मिक पल.
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1986 में स्कूल की प्रार्थना के दौरान प्रस्तुति देता एक दृष्टिबाधित व्यक्ति, रघु राय के कैमरे में कैद एक भावुक और प्रेरणादायक पल.
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इंदिरा गांधी, 1972 में तीन मूर्ति भवन में लोक कलाकारों के साथ समय बिताती हुई, रघु राय के कैमरे में कैद एक सजीव और सहज पल.
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ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान स्वर्ण मंदिर के पास तैनात सुरक्षा बल, रघु राय के कैमरे में कैद एक संवेदनशील और ऐतिहासिक पल.
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इंदिरा गांधी, 1977 में चुनाव हारने के बाद अपने लॉन में धरने पर बैठी हुई, रघु राय के कैमरे में कैद एक शांत लेकिन निर्णायक राजनीतिक पल.
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खजुराहो में एक सारस (क्रेन) अपने मानवीय अभिभावक के साथ, रघु राय के कैमरे में कैद इंसान और प्रकृति के रिश्ते की एक अनोखी और भावुक झलक.
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