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महाराष्ट्र: मराठा आरक्षण के बाद अब क्यों उठी धनगर आरक्षण की मांग

महाराष्ट्र: मराठा आरक्षण के बाद अब क्यों उठी धनगर आरक्षण की मांग
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महाराष्ट्र में मराठा समाज के बाद अब अब धनगर समुदाय भी आरक्षण की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आया है. मुंबई, पंढरपुर, सोलापुर और मराठवाड़ा समेत पश्चिम महाराष्ट्र के कई इलाकों में धनगर समुदाय ने प्रदर्शन किया.
महाराष्ट्र: मराठा आरक्षण के बाद अब क्यों उठी धनगर आरक्षण की मांग
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वाशिम ज़िले के रिसोड-मालेगांव रोड पर धनगर समाज के लोगों ने लकड़ियां और टायर जलाकर प्रदर्शन किया. करीब एक घंटे तक चले आंदोलन के कारण अकोला-हैदराबाद महामार्ग पर जाम लगा रहा. आखिरकार पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया.
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मालूम हो कि महाराष्ट्र में धनगर समाज की मांग लंबे समय से उठ रही है, लेकिन अब तक सरकार ने कोई पुख्ता कदम नहीं उठाया है. शिवसेना, कांग्रेस से लेकर एनसीपी इस मुद्दे पर देवेंद्र फडणवीस सरकार को घेरते आ रही है.
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हालांकि, इसके पहले धनगर समाज को जब आरक्षण दिए जाने की बात पर सरकार फैसला लेने वाली थी तब यह सामने आया कि धनगर समाज को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने के लिए पुख्ता डाटा नहीं है. जिसके बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंस से सर्वे कर रिपोर्ट तैयार करने कहा था.
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ज्ञात हो कि धनगर मुख्यतः घुमंतू समुदाय है. महाराष्ट्र में इनकी तादाद करीब 9 प्रतिशत है. ये समुदाय पश्चिम महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में बसे हैं. महाराष्ट्र में लोकसभा की चार सीट बारामती, मधा, सोलापुर और सातारा में इनका अच्छा ख़ासा प्रभाव है. इसके अलावा 35 विधानसभा सीट पर भी इसका दबदबा है.
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फिलहाल धनगर समुदाय को 3.5 प्रतिशत आरक्षण मिला हुआ है. लेकिन समुदाय अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में रखे जाने की मांग कर रहा है और 7 प्रतिशत आरक्षण चाहता है.
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आने वाले साल में महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव भी होने वाले हैं ऐसे में बीजेपी के हाथ से यह वोट बैंक फिसल ना जाए इस पर भी सरकार ख़ास ध्यान दे रही है. पहले ही मराठा समुदाय की नाराजगी बीजेपी झेल रही है.
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