अमजद खान की आज 25वीं डेथ एनिवर्सरी है. 'शोले' में गब्बर के किरदार को निभाकर अमजद खान असल जिंदगी में ही गब्बर के नाम से मशहूर हो गए थे.
गौरतलब है कि अमजद खान की फैमिली का फिल्मों से पुराना नाता है. कम ही लोग जानते हैं कि अमजद खान के पिता जयंत (जकारिया खान) भी फिल्मों में विलेन का रोल कर चुके हैं.
हालांकि अमजद खान के बड़े बेटे शादाब खान अपने पिता जैसा करिश्मा नहीं दिखा पाए और उनकी ज्यादातर फिल्में फ्लॉप रही. शादाब खान ने फिल्म राजा की आएगी बारात से बॉलीवुड में डेब्यू किया था.
इस फिल्म में उनके साथ रानी मुखर्जी थी. ये फिल्म भले ही फ्लॉप रही हो
लेकिन शादाब की एक्टिंग की तारीफ हुई. पिता के स्टारडम के चलते शादाब को कई
और फिल्में मिलीं लेकिन वह भी फ्लॉप रही. इसके बाद वो फिल्मों से गुमनाम
हो गए.
शादाब खान ने फिल्म डायरेक्शन में भी किस्मत आजमाई लेकिन वहां भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी. इसके बाद उन्होंने राइटिंग में हाथ आजमाया. शादाब ने अपने पिता अमजद खान की बायोग्राफी लिखने का फैसला किया.
शादाब खान की ये किताब काफी पॉपुलर हुई. अमजाद खान के दोस्त अमिताभ बच्चन ने भी इस किताब और शादाब की राइटिंग की खूब तारीफ की. आज शादाब खान एक लेखक के तौर पर खूब नाम कमा रहे हैं.
वहीं, अमजद खान के दूसरे बेटे सीमाब खान को भी एक्टिंग विरासत में मिली थी. उन्होंने 'हिम्मतवाला' और 'हाउसफुल 2' में साजिद खान को असिस्ट किया, लेकिन उनका मन नहीं लगा.
वहीं, अमजद खान के दूसरे बेटे सीमाब खान को भी एक्टिंग विरासत में मिली
थी. उन्होंने 'हिम्मतवाला' और 'हाउसफुल 2' में साजिद खान को असिस्ट किया,
लेकिन उनका मन नहीं लगा.
वहीं, अमजद खान ने 'शोले' (1975), 'कसम खून की' (1977), 'परवरिश' (1977), 'इंकार' (1978), 'कसमे वादे' (1978), 'कालिया' (1980), 'नसीब' (1981), 'याराना' (1981), 'सत्ते पे सत्ता' (1981) सहित कई फिल्मों में काम किया है.
अमजद खान के पिता ने 'मेरा गांव मेरा देश' (1971), 'रेशमा और शेरा' (1971), 'हिमालय की गोद में'(1965), 'सपनों का सौदागर'(1968), 'अनमोल मोती' (1969) सहित कई फिल्मों में काम किया.