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भारत नहीं, इस मुस्लिम बहुल देश में है सबसे बड़ा बौद्ध मंदिर, आप भी घूम आएं

दुनिया का सबसे बड़ा बौद्ध मंदिर भारत में नहीं, बल्कि मुस्लिम बहुल देश इंडोनेशिया में स्थित है. मध्य जावा के मगेलांग में बना बोरोबुदुर मंदिर 9वीं सदी का ऐसा वास्तु चमत्कार है, जिसे देखकर आज भी दुनिया हैरान रह जाती है.

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इंडोनेशिया का वह द्वीप जहां हिंदू-बौद्ध सभ्यता फली-फूली(Photo: Pixabay)
इंडोनेशिया का वह द्वीप जहां हिंदू-बौद्ध सभ्यता फली-फूली(Photo: Pixabay)

अगर आप भी घूमने-फिरने के शौकीन हैं और दुनिया के अनूठे अजूबों को करीब से देखना चाहते हैं, तो यह जानकारी आपको हैरान कर देगी. अक्सर जब हम भव्य बौद्ध मंदिरों या प्राचीन स्तूपों की बात करते हैं, तो हमारा ध्यान सीधे भारत की ओर जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया का सबसे बड़ा बौद्ध मंदिर भारत में नहीं, बल्कि मुस्लिम बहुल देश इंडोनेशिया में स्थित है?

इंडोनेशिया के मध्य जावा प्रांत के मगेलांग नगर में बना यह 'बोरोबुदुर' (Borobudur) मंदिर किसी अजूबे से कम नहीं है. 9वीं सदी के इस महायान बौद्ध मंदिर की भव्यता और इसकी इंजीनियरिंग को देखकर दुनिया भर के विशेषज्ञ आज भी हैरान रह जाते हैं. एक 49 फीट ऊंची चट्टान पर बना यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि वास्तुकला की दृष्टि से भी इंसानी हुनर का एक बेहतरीन उदाहरण पेश करता है.

9 मंजिला पिरामिड और 504 बुद्ध प्रतिमाएं

बोरोबुदुर मंदिर की बनावट बहुत ही अनोखी है. इसे एक विशाल स्तूप की तरह डिजाइन किया गया है, जिसकी बनावट किसी पिरामिड जैसी लगती है. कुल 9 मंजिलों वाले इस मंदिर का आधार वर्गाकार है और इसकी हर भुजा लगभग 118 मीटर लंबी है. इसकी बनावट में गणित और कला का शानदार तालमेल दिखता है, निचली 6 मंजिलें चौकोर हैं, जबकि ऊपर की तीन मंजिलें गोलाकार रूप में बनी हैं.

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इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यहां मौजूद बुद्ध की मूर्तियां और शिलालेख हैं. पूरे मंदिर परिसर को 2,672 शिलालेखों और 504 बुद्ध प्रतिमाओं से सजाया गया है. सबसे ऊपरी मंजिल के केंद्र में एक विशाल गुंबद है, जिसके चारों ओर घंटी के आकार के 72 छोटे स्तूप बने हैं. इन स्तूपों में छोटे-छोटे जालीदार छेद हैं, जिनके अंदर बुद्ध की सुंदर मूर्तियां स्थापित की गई हैं. दूर से देखने पर ऐसा लगता है मानो पत्थर की घंटी के भीतर भगवान बुद्ध ध्यान की मुद्रा में विराजमान हों.

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शैलेंद्र राजवंश की विरासत और भारतीय छाप

इस भव्य मंदिर का निर्माण 9वीं सदी में इंडोनेशिया के शैलेंद्र राजवंश के शासकों द्वारा कराया गया था. वे महायान बौद्ध धर्म के कट्टर अनुयायी थे. हालांकि, इसके निर्माण का श्रेय किसी एक राजा को नहीं दिया जाता, लेकिन माना जाता है कि राजा समरतुंगगा के शासनकाल में इसका काम पूरा हुआ था. दिलचस्प बात यह है कि इस मंदिर की वास्तुकला में उस दौर के भारतीय राजाओं की निर्माण शैली की झलक साफ दिखाई देती है.

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मंदिर के गलियारे किसी खुली किताब की तरह हैं, जहां 1460 शिलापट्टों पर बुद्ध के जीवन और उनसे जुड़ी कहानियों का बड़ी खूबसूरती से वर्णन किया गया है. सीढ़ियों की व्यवस्थित कतारें और पत्थरों पर की गई बारीक नक्काशी यह बताती है कि उस समय के शिल्पकार कितने कुशल रहे होंगे. आज बोरोबुदुर न केवल इंडोनेशिया का सबसे बड़ा बौद्ध स्मारक है, बल्कि यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में भी शामिल है, जिसे देखने हर साल लाखों लोग जावा द्वीप पहुंचते हैं.
 

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