अगर आप इस साल विदेश घूमने की योजना बना रहे हैं और किसी ऐसी जगह की तलाश में हैं, जहां इतिहास की भव्यता, वास्तुकला का जादू और धर्म की गहरी जड़ें एक साथ देखने को मिलें, तो अपनी बकेट लिस्ट में कंबोडिया का नाम सबसे ऊपर लिख लीजिए.
अक्सर जब हम भव्य मंदिरों की कल्पना करते हैं, तो हमारा ध्यान अयोध्या के नवनिर्मित राम मंदिर, काशी विश्वनाथ या दक्षिण भारत के मीनाक्षी मंदिर की ओर जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि सात समंदर पार एक ऐसा मंदिर है जो क्षेत्रफल के मामले में दुनिया की सबसे बड़ी धार्मिक संरचना है.
हम बात कर रहे हैं अंकोरवाट (Angkor Wat) की. करीब 400 एकड़ में फैला यह मंदिर सिर्फ ईंट-पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की उस विरासत का प्रमाण है जिसने सीमाओं को लांघकर पूरी दुनिया में अपनी पहचान बनाई.सुबह की पहली किरण जब इस मंदिर के शिखरों पर पड़ती है, तो वह नजारा किसी स्वर्ग से कम नहीं होता.
12वीं सदी का चमत्कार और दीवारों पर उकरी रामकथा
इस अद्भुत मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी की शुरुआत में खमेर साम्राज्य के राजा सूर्यवर्मन द्वितीय ने करवाया था. उस समय कंबोडिया का नाम 'कंबुज' या 'कंबोज' हुआ करता था. राजा सूर्यवर्मन ने इसे भगवान विष्णु को समर्पित एक राज्य मंदिर के रूप में बनवाया था. करीब 2 किलोमीटर के दायरे में फैले इस मंदिर की दीवारों पर हिंदू धर्मग्रंथों के प्रसंगों को पत्थर पर उकेरा गया है.
जब आप इस मंदिर की दीवारों को देखेंगे, तो आपको प्राचीन भारत की वैभवशाली संस्कृति की झलक मिलेगी. यहां असुरों और देवताओं के बीच हुए समुद्र मंथन का बहुत ही सुंदर चित्रण किया गया है. इतना ही नहीं, यहां के पत्थरों पर रामकथा यानी रामायण के दृश्यों को भी बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है. यही वजह है कि यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर स्थल (World Heritage Site) घोषित किया है और हर साल दुनिया भर से लाखों लोग इसकी बनावट और कलाकारी को देखने कंबोडिया पहुंचते हैं.
यह भी पढ़ें: भारत नहीं इस देश में है सबसे साफ हिंदू गांव, 700 साल से नहीं हुआ एक भी क्राइम
कंबुज से कंबोडिया बनने की दिलचस्प कहानी
इतिहास और पुरानी कहानियों की मानें, तो कंबोडिया की नींव भी भारतीय जड़ों से जुड़ी है. कहा जाता है कि सालों पहले आर्यदेश के राजा कंबु स्वयांभुव भगवान शिव की प्रेरणा से इस इलाके में आए थे. उन्होंने यहां के नागराज की मदद से एक जंगली मरुस्थल को बेहद सुंदर और हरे-भरे प्रदेश में बदल दिया और कंबुज राजवंश की नींव रखी.
यह भी पढ़ें: गांव जहां -60°C तक गिरता है पारा, खून भी जम जाता है... आखिर कैसे जीते हैं लोग
हालांकि कंबोडिया आज एक बौद्ध राष्ट्र है, लेकिन अंकोरवाट का इतिहास इसके हिंदू होने का सबसे बड़ा सबूत है. 12वीं सदी के अंत तक आते-आते यह मंदिर बौद्ध केंद्र में बदल गया, लेकिन इसकी आत्मा में आज भी हिंदू संस्कार बसे हैं. वैज्ञानिकों का भी मानना है कि समुद्र के बढ़ते जलस्तर ने द्वारका और राम-सेतु जैसे स्थानों को भले ही छिपा दिया हो, लेकिन अंकोरवाट जैसे मंदिर आज भी खड़े होकर यह साबित करते हैं कि हमारी प्राचीन संस्कृति कितनी महान और शक्तिशाली थी. भले ही समय के साथ यहां के लोगों का धर्म बदल गया हो, लेकिन आज भी वहां की मिट्टी और लोगों के दिलों में भारतीयता की महक बाकी है.