भारत अपनी भव्य वास्तुकला और राजशाही परंपराओं के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है. यहां के कई शहर अपने किलों और राजसी इमारतों के जरिए राजाओं-महाराजाओं की शान-शौकत की कहानी सुनाते हैं. लेकिन जब बात महलों का शहर (City of Palaces) की आती है, तो बहुत से लोग राजस्थान या मैसूर का नाम लेते हैं. हालांकि, असलियत इससे थोड़ी अलग है. भारत में कोलकाता एक ऐसा शहर है जिसे व्यापक रूप से इस उपाधि से नवाजा गया है. यह सिर्फ एक संयोग नहीं है, बल्कि इसके पीछे सदियों पुरानी विरासत और उस दौर के अमीर लोगों की वह शान-शौकत है, जिसने इस शहर की ईंट-ईंट में शाही पहचान भर दी है.
क्यों मिला कोलकाता को यह खास खिताब?
कोलकाता को महलों का असली शहर इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहां ब्रिटिश काल के दौरान आश्चर्यजनक हवेलियां, शाही आवास और बेहतरीन वास्तुकला वाले भवन तैयार किए गए. साल 1911 तक कोलकाता (तब कलकत्ता) ब्रिटिश भारत की राजधानी थी. इस लंबे समय के दौरान ब्रिटिश अधिकारियों, धनी व्यापारियों और जमींदारों ने यूरोपीय वास्तुकला से प्रभावित होकर एक से बढ़कर एक आलीशान महल बनवाए. ये इमारतें उस दौर में केवल रहने की जगह नहीं थीं, बल्कि शक्ति, संस्कृति और एक बेहद परिष्कृत जीवन शैली का प्रतीक हुआ करती थीं.
यह भी पढ़ें: मुफ्त में करें ताजमहल का दीदार, अगले 3 दिनों तक नहीं लगेगा कोई टिकट
मैसूर से कैसे अलग है कोलकाता की विरासत?
अक्सर लोग कर्नाटक के मैसूर और पश्चिम बंगाल के कोलकाता के बीच इस खिताब को लेकर उलझन में रहते हैं. मैसूर निस्संदेह अपने भव्य 'मैसूर पैलेस' के लिए जाना जाता है, जो भारत के सबसे सुंदर महलों में से एक है. मैसूर का आकर्षण वाडियार राजवंश की इसी शाही विरासत में सिमटा हुआ है. लेकिन कोलकाता के साथ स्थिति अलग है. जिन शहरों में केवल एक या दो मुख्य शाही महल होते हैं, उनके उलट कोलकाता महलनुमा इमारतों की संख्या और विविधता से भरा हुआ है. यहां आपको हर दूसरी सड़क पर एक ऐसी हवेली मिल जाएगी, जो किसी जमाने में वैभव का केंद्र थी. यही कारण है कि इसे एक शाही शहर कहने के बजाय महलों का शहर कहना अधिक सटीक लगता है.
यह भी पढ़ें: 200 साल पहले रातों-रात गायब हो गए थे 84 गांव, आज भी क्यों नहीं बसता कोई इंसान
कोलकाता के वो प्रसिद्ध ठिकाने जो आज भी हैं शान अगर आप कोलकाता की गलियों में निकलें, तो यहां की वास्तुकला आपको मंत्रमुग्ध कर देगी. यहां कुछ ऐसी संरचनाएं हैं जिन्हें देखे बिना इस शहर की यात्रा अधूरी है.
कोलकाता की ये आलीशान इमारतें आज भी हमें उस दौर की याद दिलाती हैं जब यह शहर पूर्व का सबसे शक्तिशाली केंद्र था. यहां की हवेलियां और उनके ऊंचे खंभे आज भी गर्व से अपनी शाही पहचान को बयां करते हैं.