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साल में सिर्फ 2 दिन खुलता है यह 'रहस्यमयी' राजदरबार, बसंत पंचमी पर आप भी करें दर्शन!

वृंदावन में एक ऐसा मंदिर है, जहां साल के 363 दिन दरवाजे बंद रहते हैं. 1863 में निर्मित, अपनी अनूठी वास्तुकला और टेढ़े खंभों के लिए मशहूर इस स्थान पर ठाकुर जी के विशेष दर्शन किसी दिव्य अनुभव से कम नहीं माने जाते. आखिर यह रहस्यमयी मंदिर साल में सिर्फ़ दो दिन ही क्यों खुलता है और क्या है इसकी खासियत?

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23 जनवरी को बसंत पंचमी पर होंगे कान्हा के विशेष दर्शन (Photo: Pixabay)
23 जनवरी को बसंत पंचमी पर होंगे कान्हा के विशेष दर्शन (Photo: Pixabay)

मथुरा-वृंदावन की गलियों में यूं तो हर मंदिर की अपनी महिमा है, लेकिन निधिवन के पास स्थित 'शाहजी मंदिर' की कहानी कुछ अलग और बेहद खास है. यहां एक ऐसा रहस्यमयी कमरा है जिसके दरवाजे साल के 363 दिन बंद रहते हैं, लेकिन जब इसके कपाट खुलते हैं, तो उसकी चकाचौंध देख हर कोई दंग रह जाता है. इस कमरे को 'बसंती राजदरबार' कहा जाता है, जो अपनी खूबसूरती और ऐतिहासिक महत्व के कारण पर्यटकों के बीच आकर्षण का बड़ा केंद्र है. इस बार 23 जनवरी को बसंत पंचमी मनाई जाएगी और इसी पावन पर्व पर साल में केवल दो बार खुलने वाले इस दरबार के विशेष दर्शन होंगे.

यह कमरा केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि पुरानी वास्तुकला और शाही ठाठ-बाट का एक अद्भुत नमूना भी है. बसंत पंचमी के पावन पर्व पर जब इस दरबार के कपाट खुलते हैं, तो बेल्जियम के विशाल झूमरों और प्राचीन विदेशी रोशनी से पूरा कमरा जगमगा उठता है. भगवान कृष्ण और राधा रानी को पीले मखमली वस्त्रों और खुशबूदार बसंती फूलों से सजाकर दिव्य सिंहासन पर विराजमान किया जाता है. ठाकुर जी के इस मनमोहक स्वरूप को देखना किसी भी मुसाफिर के लिए एक सुखद और यादगार अनुभव हो सकता है. तो चलिए जानते हैं इस 'राजदरबार' की वो खूबियां, जो इसे भारत के बाकी मंदिरों से अलग बनाती हैं.

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इतिहास के शौकीनों के लिए यह मंदिर किसी अजूबे से कम नहीं है. इसे 'टेढ़े खंभे वाले मंदिर' के नाम से जाना जाता है, क्योंकि यहां के बरामदे में संगमरमर के 12 ऐसे स्तंभ हैं, जो घुमावदार शैली में बने हैं. इस अनूठी वास्तुकला का निर्माण साल 1863 में लखनऊ के नवाब फुंदन लाल शाह और कुंदन लाल शाह ने करवाया था. मंदिर की दीवारों पर भगवान कृष्ण के जीवन को दर्शाती 14 विभिन्न कलाकृतियां और पत्थर के दुर्लभ चित्र आज भी पर्यटकों को हैरान कर देते हैं.

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जहां मौसम खुद कान्हा की सेवा करता है

यह 'बसंती कक्ष' मंदिर के ऋतुराज भवन का हिस्सा है. इस कमरे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां की पूरी सजावट ठाकुर जी को बसंत ऋतु का एहसास दिलाने के लिए की जाती है. बेल्जियम ग्लास की चमक और दरबारी नक्काशी के बीच जब राराधारमण ठाकुर (शाहबिहारी) के दिव्य दर्शन मिलते हैं, तो वह दृश्य हमेशा के लिए मन में बस जाता है. विग्रहों को बसंत का अनुभव कराने के लिए यहां मौसम के हिसाब से ही ताजे फूलों का विशेष श्रृंगार किया जाता है. हालांकि यह दरबार साल में दो ही दिन खुलता है, लेकिन इसके 15 फीट ऊंचे नक्काशीदार खंभे और संगमरमर की मूर्तियां इसे हर दिन देखने लायक बनाती हैं.

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निधि वन के पास कला का संगम

वृंदावन रेलवे स्टेशन से महज 1 किलोमीटर दूर और निधि वन के करीब स्थित यह मंदिर अपनी वास्तुकला के लिए दुनिया भर में मशहूर है. अगर आप इस 23 जनवरी को ब्रज में हैं, तो 'बसंती राजदरबार' के दीदार करना बिल्कुल न भूलें. संगमरमर के पत्थरों पर उकेरी गई कहानियां और झूमरों की वो ऐतिहासिक रोशनी शायद ही आपको किसी और मंदिर में देखने को मिले.

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