अगर आप रोजाना की भागदौड़, ट्रैफिक और शोर-शराबे से दूर कुछ दिन नेचर के बीच वक्त बिताना चाहते हैं तो उत्तराखंड का चोपता आपके लिए एक बेहतरीन जगह हो सकती है. गढ़वाल हिमालय की गोद में बसा यह खूबसूरत हिल स्टेशन अपनी हरियाली, बर्फ से ढकी चोटियों, शांत वातावरण और शानदार ट्रेकिंग रूट्स के लिए जाना जाता है. यही वजह है कि इसे 'भारत का मिनी स्विट्जरलैंड' भी कहा जाता है. यहां नेचर लवर्स, एडवेंचर के शौकीन और आध्यात्मिक शांति की तलाश करने वाले सभी लोगों के लिए कुछ न कुछ खास है. आइए जानते हैं चोपता की उन जगहों के बारे में, जहां चोपता घूमने के दौरान आपको जरूर जाना चाहिए.
तुंगनाथ मंदिर
चोपता की सबसे प्रसिद्ध जगहों में से एक तुंगनाथ मंदिर है. भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर दुनिया के सबसे ऊंचे शिव मंदिरों में गिना जाता है. समुद्र तल से लगभग 3,680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस मंदिर तक पहुंचने के लिए लगभग 3.5 किलोमीटर का ट्रेक करना पड़ता है. रास्ते में दिखने वाले पहाड़, जंगल और प्राकृतिक नजारे इस यात्रा को और भी खास बना देते हैं.
चंद्रशिला ट्रेक
तुंगनाथ मंदिर से आगे चंद्रशिला चोटी स्थित है. यहां से हिमालय की बर्फीली चोटियों का बेहद शानदार नजारा देखने को मिलता है. सूर्योदय के समय यहां का दृश्य किसी जादुई दुनिया जैसा लगता है. ट्रेकिंग पसंद करने वालों के लिए यह जगह किसी स्वर्ग से कम नहीं है.
देवरिया ताल
चोपता से कुछ दूरी पर स्थित देवरिया ताल एक खूबसूरत झील है जो चारों ओर से घने जंगलों से घिरी हुई है. इस झील के साफ पानी में चौखंबा पर्वत की परछाई दिखाई देती है जो इसे और भी आकर्षक बनाती है. फोटोग्राफी और कैंपिंग के शौकीनों के लिए यह एक बेहतरीन जगह है.
कंचुला कोरक कस्तूरी मृग अभयारण्य
अगर आपको वन्यजीवों और प्रकृति से लगाव है, तो कंचुला कोरक कस्तूरी मृग अभयारण्य जरूर जाएं. यह अभयारण्य दुर्लभ कस्तूरी मृग के संरक्षण के लिए जाना जाता है. यहां की हरियाली, रंग-बिरंगे फूल और शांत वातावरण आपको प्रकृति के और करीब ले जाते हैं.
सारी गांव
चोपता पहुंचने से पहले पड़ने वाला सारी गांव अपनी सादगी और प्राकृतिक सुंदरता के लिए मशहूर है. यह देवरिया ताल ट्रेक का शुरुआती पड़ाव भी है. यहां आप स्थानीय लोगों के जीवन, गढ़वाली संस्कृति और पारंपरिक खानपान को करीब से जान सकते हैं.
चोपता घूमने जाने का सबसे अच्छा समय
चोपता घूमने के लिए मार्च से जून और सितंबर से नवंबर का समय सबसे अच्छा माना जाता है. इस दौरान मौसम सुहावना रहता है और पहाड़ों के खूबसूरत नजारे साफ दिखाई देते हैं. वहीं, अगर आप बर्फबारी का आनंद लेना चाहते हैं तो दिसंबर से फरवरी के बीच यहां घूमने जा सकते हैं.