यशपाल शर्मा (Yashpal Sharma) भारतीय फिल्म और थिएटर अभिनेता हैं, जो मुख्य रूप से हिंदी फिल्मों और टेलीविजन में काम करते हैं. उन्होंने अपने अभिनय करियर की शुरुआत थिएटर से की और बाद में फिल्मों व टीवी धारावाहिकों में अलग-अलग तरह की भूमिकाएं निभाईं.
यशपाल शर्मा का जन्म हरियाणा के हिसार में एक निम्न-मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था. बचपन से ही उन्हें अभिनय में रुचि थी. दशहरा के दौरान आयोजित होने वाली रामलीला में वे नियमित रूप से भाग लेते थे और इसके आयोजन में भी एक्टिव रहते थे. अभिनय के प्रति इसी रुचि ने उन्हें पेशेवर प्रशिक्षण लेने के लिए प्रेरित किया.
उन्होंने नई दिल्ली के मंडी हाउस स्थित नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) से वर्ष 1994 में अभिनय की पढ़ाई पूरी की. प्रशिक्षण के बाद उन्होंने थिएटर में काम किया और कई मंचीय प्रस्तुतियों में अभिनय किया. लेखक और निर्देशक रामजी बाली के थिएटर नाटक 'कोई बात चले' में भी उन्होंने प्रमुख भूमिका निभाई.
फिल्मों की बात करें तो यशपाल शर्मा ने साल 2001 में रिलीज हुई फिल्म 'लगान' से व्यापक पहचान हासिल की. इसके बाद वे 'हजारों ख्वाहिशें ऐसी', 'गंगाजल', 'अब तक छप्पन', 'अपहरण', 'लक्ष्यम', 'सिंह इज किंग', 'आरक्षण', 'राउडी राठौर', 'अयोथि' और 'कुड़ी हरियाणे वाल दी' जैसी फिल्मों में नजर आए. इन फिल्मों में उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदार निभाए.
टेलीविजन पर भी यशपाल शर्मा कई धारावाहिकों का हिस्सा रहे हैं. लोकप्रिय कॉमेडी शो 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' में उन्होंने डॉन राणा का किरदार निभाया. इसके अलावा वे 'मेरा नाम करेगी रोशन' में कुंवर सिंह की भूमिका में दिखाई दिए. उन्होंने 'नीली छतरी वाले' जैसे टीवी शो में भी काम किया और मंचीय नाटकों में लगातार सक्रिय रहे.
यशपाल शर्मा हरियाणवी सिनेमा से भी जुड़े रहे हैं. उनकी हरियाणवी फिल्म 'पगड़ी: द ऑनर' को 62वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में सम्मानित किया गया था.
लगान और गंगाजल फेम एक्टर यशपाल शर्मा ने बताया कि वे ऐसे OTT प्रोजेक्ट्स से क्यों दूर रहते हैं, जिनमें बहुत ज्यादा न्यूडिटी और साफ-साफ दिखाए जाने वाले इंटीमेट सीन होते हैं.