प्रम्बानन (Prambanan), जिसे इंडोनेशियाई भाषा में "कांडी प्रम्बानन" भी कहा जाता है. यह इंडोनेशिया के दक्षिणी जावा द्वीप में स्थित एक प्राचीन हिंदू मंदिर परिसर है. यह योग्याकार्ता (Yogyakarta) के विशेष क्षेत्र में स्थित है और शहर से लगभग 17 किलोमीटर उत्तर-पूर्व दिशा में मौजूद है. मंदिर परिसर मध्य जावा और योग्याकार्ता प्रांत की सीमा के पास बनाया गया है.
प्रांबानन का निर्माण 9वीं शताब्दी में किया गया था. यह मंदिर हिंदू धर्म के त्रिमूर्ति स्वरूप को समर्पित है, जिसमें भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा की जाती है. मंदिर का मूल नाम "शिवगृह" (Shivagrha) या "शिवालय" (Shivalaya) बताया जाता है, जिसका अर्थ भगवान शिव का निवास स्थान होता है.
ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार इस मंदिर के निर्माण की शुरुआत लगभग 850 ईस्वी के आसपास राजा रकाई पिकातन (Rakai Pikatan) ने करवाई थी. बाद में राजा लोकपाल (Lokapala), बलितुंग महा साम्बु (Balitung Maha Sambu) और मातरम साम्राज्य के अन्य शासकों ने मंदिर परिसर का विस्तार कराया. वर्ष 856 ईस्वी के शिवगृह शिलालेख में इस मंदिर का उल्लेख मिलता है, जिसमें मंदिर के उद्घाटन और निर्माण से जुड़ी जानकारी दर्ज है.
प्रांबानन मंदिर परिसर में शुरुआत में लगभग 240 मंदिर संरचनाएं बनाई गई थीं. इनमें मुख्य मंदिरों के अलावा कई छोटे-छोटे सहायक मंदिर भी शामिल थे. मुख्य मंदिर के केंद्र में भगवान शिव का मंदिर स्थित है, जिसकी ऊंचाई लगभग 47 मीटर है. इसके आसपास भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा को समर्पित मंदिर बनाए गए हैं. पूरे परिसर को चारों ओर से दीवारों से घेरा गया है और मंदिरों की व्यवस्था एक निश्चित योजना के अनुसार की गई है.
मंदिर के निर्माण के दौरान आसपास बहने वाली ओपाक (Opak) नदी का मार्ग भी बदला गया था. ऐतिहासिक जानकारी के अनुसार नदी का पुराना मार्ग मंदिर के काफी करीब था. इसके बाद नदी को नई दिशा देकर मंदिर परिसर के विस्तार के लिए अतिरिक्त भूमि तैयार की गई. यह कार्य मंदिर निर्माण का ही एक हिस्सा माना जाता है.
प्रांबानन लंबे समय तक मातरम साम्राज्य का प्रमुख धार्मिक केंद्र रहा. उस समय यहां धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ और अन्य वैदिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते थे. माना जाता है कि मंदिर परिसर के आसपास बड़ी संख्या में ब्राह्मण और उनके शिष्य निवास करते थे. उस समय मातरम साम्राज्य का शाही केंद्र भी प्रांबानन के आसपास के क्षेत्र में स्थित था.
आज प्रांबानन मंदिर परिसर को यूनेस्को विश्व धरोहर (UNESCO World Heritage Site) का दर्जा प्राप्त है. यह इंडोनेशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर परिसर माना जाता है. यहां हर वर्ष दुनिया के विभिन्न देशों से बड़ी संख्या में पर्यटक और शोधकर्ता पहुंचते हैं. यह स्थल इंडोनेशिया के इतिहास, धर्म, प्राचीन स्थापत्य और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करता है और देश के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों में शामिल है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान भारत और इंडोनेशिया ने सांस्कृतिक सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया. दोनों देशों ने प्रम्बानन मंदिर के संरक्षण और मरम्मत परियोजना की शुरुआत की, जिसमें भारत भी सहयोग करेगा.