नगीना (Nagina) उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले का एक प्रमुख नगर और नगर पालिका परिषद है. यह शहर लंबे समय से प्रशासन, इतिहास और स्थानीय व्यापार के लिए जाना जाता रहा है. आज नगीना बिजनौर जिले का एक महत्वपूर्ण शहरी क्षेत्र है, जहाx बड़ी संख्या में लोग निवास करते हैं और आसपास के ग्रामीण इलाकों का भी इससे गहरा जुड़ाव है.
नगीना नाम को लेकर अलग-अलग मान्यताएं मिलती हैं. इतिहासकार पॉल व्हैली के अनुसार, इसका नाम संस्कृत के शब्द "नाग-इन" (Nāga-ina) से निकला माना जाता है, जिसका अर्थ "सर्पों का स्वामी" होता है. समय के साथ इसका रूप बदलकर नगीना बन गया. वहीं एक अन्य मान्यता के अनुसार, नगीना का अर्थ "जवाहर" या "रत्न" भी होता है. कहा जाता है कि मुगल शासन के दौरान सैयद परिवार को यह क्षेत्र जागीर के रूप में मिला था, जिसके बाद यह नाम प्रचलन में आया.
ब्रिटिश काल में नगीना प्रशासनिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण केंद्र था. यह बिजनौर जिले की नगीना तहसील का मुख्यालय रहा. इसके अलावा 1817 से 1824 के बीच यह नवगठित उत्तरी मुरादाबाद जिले का मुख्यालय भी रहा था. उस समय नगीना तहसील के अंतर्गत 464 गांव और दो नगर- नगीना और अफजलगढ़ शामिल थे.
18वीं शताब्दी में इस क्षेत्र में रोहिला शक्ति के उदय के दौरान एक किले का निर्माण हुआ था. बाद में इसी किले का उपयोग तहसील कार्यालय के रूप में किया गया. वर्ष 1805 में अमीर खान के नेतृत्व में आए पश्तूनों ने नगीना पर हमला किया और शहर को नुकसान पहुंचाया.
इसके बाद 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भी नगीना महत्वपूर्ण घटनाओं का केंद्र बना. यहां नजीबाबाद के नवाब और ब्रिटिश सेना के बीच युद्ध हुआ. 21 अप्रैल 1858 को इस लड़ाई में नवाब की हार हुई, जिसके बाद बिजनौर क्षेत्र पर ब्रिटिश शासन पूरी तरह स्थापित हो गया.
ब्रिटिश प्रशासन ने बाद में स्थानीय प्रशासन को व्यवस्थित करने के लिए 1886 में नगीना को नगर पालिका (म्युनिसिपैलिटी) का दर्जा दिया. इसके बाद शहर में स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था औपचारिक रूप से संचालित होने लगी.
यूपी के बाराबंकी में नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने अपने काफिले पर पथराव का आरोप लगाया है। उनके मुताबिक, घटना में करीब एक दर्जन कार्यकर्ता घायल हुए और कई वाहन क्षतिग्रस्त हुए। उन्होंने पुलिसकर्मियों पर बदसलूकी का भी आरोप लगाया।