मोथाबाड़ी (Mothabari) पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के मालदा सदर उपखंड में स्थित एक गांव है. यह कालियाचक-II सामुदायिक विकास (CD) ब्लॉक का हिस्सा है और जिले के प्रमुख ग्रामीण इलाकों में शामिल है. प्रशासनिक रूप से यह क्षेत्र ग्राम पंचायत व्यवस्था के अंतर्गत आता है और स्थानीय स्तर पर विभिन्न सरकारी योजनाओं का संचालन यहीं से किया जाता है.
मोथाबाड़ी गंगा नदी के मैदानी क्षेत्र में स्थित है. यह इलाका 'दियारा' (Diara) भू-आकृतिक क्षेत्र का हिस्सा माना जाता है. दियारा ऐसे समतल मैदान को कहा जाता है, जो नदियों द्वारा लाई गई नई जलोढ़ मिट्टी (New Alluvium) के जमाव से बनता है. इस कारण यहां की भूमि समतल है और कृषि गतिविधियां बड़े पैमाने पर होती हैं.
मोथाबाड़ी के आसपास का क्षेत्र मुख्य रूप से ग्रामीण है, हालांकि कालियाचक क्षेत्र में कई जनगणना नगर (Census Towns) भी स्थित हैं. गांव के लोगों की आजीविका का प्रमुख स्रोत खेती, बागवानी, छोटे व्यवसाय और स्थानीय व्यापार हैं. यहां धान, गेहूं, मक्का, जूट तथा आम जैसी फसलों और बागानों का महत्व देखा जाता है. मालदा जिला विशेष रूप से आम और रेशम उत्पादन के लिए जाना जाता है.
यह क्षेत्र सड़क मार्ग से मालदा शहर, कालियाचक और फरक्का जैसे प्रमुख स्थानों से जुड़ा हुआ है. निकटवर्ती रेलवे स्टेशन और राष्ट्रीय राजमार्ग के माध्यम से जिले के अन्य हिस्सों तक आवागमन किया जाता है. आसपास के कस्बों में शिक्षा, स्वास्थ्य और बैंकिंग जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं.
मोथाबाड़ी के आसपास बहने वाली गंगा नदी इस क्षेत्र के भूगोल का महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसी क्षेत्र के निकट ऐतिहासिक गौड़ (Gauda) के अवशेष भी स्थित हैं, जो मध्यकाल में कई राजवंशों की राजधानी रहे थे.
मोथाबाड़ी में बंगाली सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है, जबकि हिंदी, उर्दू और स्थानीय बोलियों का भी प्रयोग किया जाता है.