कुल्थी, जिसे अंग्रेजी में हॉर्स ग्राम (Horse Gram) कहा जाता है, एक प्राचीन दलहन फसल है. इसका वैज्ञानिक नाम Macrotyloma uniflorum है. भारत में इसकी खेती मुख्य रूप से कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में की जाती है. यह कम पानी और कम उपजाऊ मिट्टी में भी आसानी से उग जाती है, इसलिए इसे सूखा-प्रतिरोधी फसल माना जाता है.
कुल्थी के दाने छोटे, गोल या अंडाकार आकार के होते हैं और इनका रंग हल्का भूरा, गहरा भूरा या लाल-भूरा हो सकता है. यह दलहन प्रोटीन, आहार फाइबर, आयरन, कैल्शियम, फॉस्फोरस और एंटीऑक्सीडेंट जैसे पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत मानी जाती है. ग्रामीण क्षेत्रों में इसे लंबे समय से पारंपरिक भोजन का हिस्सा बनाया जाता रहा है.
भारत के विभिन्न राज्यों में कुल्थी का उपयोग अलग-अलग प्रकार के व्यंजनों में किया जाता है. इससे दाल, सूप, रसम, चटनी, अंकुरित सलाद और अन्य पारंपरिक व्यंजन तैयार किए जाते हैं. पशुओं के चारे के रूप में भी इसका उपयोग होता है, विशेषकर घोड़ों के आहार में इसका इस्तेमाल होने के कारण इसे अंग्रेजी में हॉर्स ग्राम कहा जाता है.
कृषि की दृष्टि से कुल्थी एक महत्वपूर्ण फसल है, क्योंकि यह मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में भी सहायक होती है. इसकी जड़ों में पाए जाने वाले सूक्ष्म जीव वातावरण से नाइट्रोजन को मिट्टी में स्थिर करने में मदद करते हैं, जिससे भूमि की गुणवत्ता में सुधार होता है.