मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित खजुराहो मंदिर भारत की सांस्कृतिक और स्थापत्य विरासत का अद्भुत उदाहरण हैं. ये मंदिर अपनी बारीक नक्काशी, शिल्प सौंदर्य और अनूठी मूर्तिकला के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं. खजुराहो को वर्ष 1986 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया गया (Khajuraho Temples, Madhya Pradesh).
इन मंदिरों का निर्माण चंदेल वंश के शासकों द्वारा लगभग 9वीं से 11वीं शताब्दी के बीच करवाया गया था. माना जाता है कि पहले यहां करीब 85 मंदिर थे, जिनमें से आज लगभग 20 मंदिर ही सुरक्षित अवस्था में मौजूद हैं. ये मंदिर मुख्य रूप से शिव, विष्णु, ब्रह्मा, देवी और जैन तीर्थंकरों को समर्पित हैं.
खजुराहो मंदिरों की सबसे बड़ी विशेषता उनकी दीवारों पर उकेरी गई मूर्तियां हैं, जो जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाती हैं. इनमें प्रेम, नृत्य, संगीत, युद्ध, साधना और सामाजिक जीवन के दृश्य शामिल हैं. खासतौर पर कामुक मूर्तियों के कारण खजुराहो को अलग पहचान मिली है, लेकिन ये मूर्तियां कुल शिल्प का बहुत छोटा हिस्सा हैं और जीवन के संतुलन तथा आध्यात्मिकता का प्रतीक मानी जाती हैं.
कंदारिया महादेव मंदिर खजुराहो का सबसे भव्य और प्रसिद्ध मंदिर है, जो भगवान शिव को समर्पित है. इसके अलावा लक्ष्मण मंदिर, विष्णु मंदिर और जैन मंदिर समूह भी दर्शनीय हैं. इन मंदिरों की स्थापत्य शैली नागर शैली का उत्कृष्ट उदाहरण मानी जाती है.
हर साल यहां खजुराहो नृत्य महोत्सव का आयोजन होता है, जिसमें देश-विदेश के कलाकार शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुत करते हैं. यह आयोजन भारतीय कला और संस्कृति को जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है.
खजुराहो मंदिर न केवल धार्मिक स्थल हैं, बल्कि भारत की प्राचीन कला, दर्शन और सांस्कृतिक सोच का भी प्रतीक हैं. यह स्थान इतिहास प्रेमियों, कला विशेषज्ञों और पर्यटकों के लिए अत्यंत आकर्षण का केंद्र है.
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