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अमरूद

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अमरूद (Guava) भारत में सबसे अधिक उगाए जाने वाले फलों में से एक है. इसका वैज्ञानिक नाम Psidium guajava है और यह मर्टेसी (Myrtaceae) कुल का पौधा है. माना जाता है कि अमरूद की उत्पत्ति मध्य अमेरिका और दक्षिणी मैक्सिको के क्षेत्रों में हुई थी. बाद में यह फल दुनिया के कई देशों में पहुंचा और आज भारत इसके प्रमुख उत्पादकों में शामिल है.

अमरूद का पेड़ मध्यम आकार का होता है, जिसकी ऊंचाई सामान्यतः 3 से 10 मीटर तक होती है. इसकी छाल हल्के भूरे रंग की होती है और समय-समय पर पतली परतों में निकलती रहती है. 

भारत में अमरूद की खेती उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक सहित कई राज्यों में की जाती है. उत्तर प्रदेश का प्रयागराज (इलाहाबाद) अपने विशेष किस्म के अमरूद के लिए लंबे समय से प्रसिद्ध रहा है. इसकी खेती के लिए गर्म और उपोष्णकटिबंधीय जलवायु उपयुक्त मानी जाती है.

अमरूद की कई किस्में विकसित की गई हैं, जिनमें इलाहाबादी सफेदा, लखनऊ-49 (सरदार), लाल गूदे वाला अमरूद, श्वेता और अर्का किरण जैसी किस्में प्रमुख हैं. अलग-अलग क्षेत्रों में स्थानीय जलवायु और बाजार की मांग के अनुसार इनका उत्पादन किया जाता है.

अमरूद का उपयोग ताजे फल के रूप में सबसे अधिक किया जाता है. इसके अलावा इससे जैम, जेली, जूस, स्क्वैश, नेक्टर, कैंडी, मुरब्बा और अन्य प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद भी तैयार किए जाते हैं. खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है.

भारत में अमरूद की तुड़ाई आमतौर पर वर्ष में दो बार की जाती है, हालांकि यह समय क्षेत्र और किस्म के अनुसार अलग हो सकता है. स्थानीय फल मंडियों, सुपरमार्केट और निर्यात बाजारों में इसकी अच्छी मांग रहती है. आधुनिक कृषि तकनीकों और उन्नत किस्मों के कारण अमरूद का उत्पादन लगातार बढ़ रहा है.
 

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