गलगोटिया यूनिवर्सिटी (GU) भारत के उत्तर प्रदेश के दनकौर में यमुना एक्सप्रेसवे पर एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी है. 2011 में सुनील गलगोटिया ने इसे शुरू किया था. यह ग्रेटर नोएडा में परी चौक के पास गलगोटिया एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन्स का दूसरा रीजनल कैंपस है. इसे यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) से मान्यता मिली है और यह 2011 में शुरू हुआ था.
AI समिट से क्यों बाहर हुई गलगोटिया यूनिवर्सिटी?
गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने एआई इम्पैक्ट समिट में अपने ओरायन नाम के रोबोटिक डॉग को स्वनिर्मित बताया, लेकिन इस पर विवाद उठने लगा है कि असल में यह चीन का रोबोट है. कांग्रेस ने मोदी सरकार और विश्वविद्यालय पर कड़ी आलोचना की है और यह मामला तेजी से सुर्खियों में आया है. गलगोटिया यूनिवर्सिटी को स्टॉल हटाने और सफाई देने के लिए मजबूर होना पड़ा है.
AI Impact Summit में गलगोटिया यूनिवर्सिटी में एक रोबोडोग पेश किया. दावा किया गया कि उसे इनहाउस बनाया गया है. लेकिन बाद में पता चला की वो चीनी है. आइए जानते हैं क्या है पूरा विवाद.
AI Impact Summit दिल्ली में शुरू हो चुका है. समिट के दूसरे दिन गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने एक रोबोडोग शोकेस किया. आरोप लग रहे हैं कि ये चीनी रोबोट है और इसलिए इसे सरकार ने एक्सपो एरिया से बाहर कर दिया है.
गलगोटिया यूनिवर्सिटी की संचार विभाग की प्रोफेसर नेहा सिंह का एक वीडियो वायरल हो गया है, जिसमें वह एक रिपोर्टर को इन हाउस सॉकर ड्रोन के बारे में समझा रही हैं.
AI Impact Summit में एक रोबोट डॉग वायरल हो रहा है. इसे गलगोटिया यूनिवर्सिटी में शोकेस किया था, लेकिन ये असलियत में चीनी रोबोट है. आइए जानते हैं इस रोबोट डॉग की खासियत क्या है और क्या है इसकी कीमत.
गलगोटिया यूनिवर्सिटी वाला विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. AI Impact Summit में पहले तो यूनिवर्सिटी की तरफ से एक चीनी ड्रोन दिखाया गया और दावा किया गया कि उन्होंने डेवेलप किया है. अब वीडियो वायरल हो रहा जहां थर्माकॉल का ड्रोन देखा जा सकता है.
इंडिया एआई एक्सपो में गलगोटिया यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नेहा सिंह ने बताया था कि गलगोटिया यूनिवर्सिटी के 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' ने रोबोटिक डॉग ओरियन को तैयार किया है. इस वीडियो के सामने आने के बाद कई टेक एक्सपर्ट्स और यूजर्स ने दावा किया कि यह असल में चीनी कंपनी 'यूनिट्री' का 'Go2' मॉडल है, जो बाजार में उपलब्ध है.
गलगोटिया यूनिवर्सिटी का नाम भारत की उन प्राइवेट यूनिवर्सिटी में आता है, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की पढ़ाई कराई जाती है. अगर आप चार साल के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग में बीटेक की पढ़ाई करते हैं तो हर साल की पढ़ाई का खर्च करीब दो लाख रुपये होगा और चार साल की पढ़ाई का खर्च लगभग 8 लाख रुपये होगा.