बाह (Bah) उत्तर प्रदेश के आगरा जिले का एक ब्लॉक और उपखंड है. यह क्षेत्र राज्य राजमार्ग-62 (State Highway 62) पर स्थित है और जिले के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में आता है. प्रशासनिक दृष्टि से बाह क्षेत्र आगरा जिले का महत्वपूर्ण भाग है, जहां कई गांव और कस्बे शामिल हैं. यहां से जिले के अन्य हिस्सों के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों तक भी सड़क मार्ग से पहुंचा जा सकता है.
भौगोलिक रूप से बाह का क्षेत्र यमुना, चंबल और उतंगन (उटंगन) नदियों के बीच स्थित है. यही तीन नदियां इस इलाके की पहचान का हिस्सा हैं. इन नदियों के कारण बाह की सीमाएं मध्य प्रदेश और राजस्थान के कुछ क्षेत्रों के निकट आती हैं. खेती के लिए इस क्षेत्र की भूमि मुख्य रूप से इन नदियों के जल पर निर्भर रहती है.
इतिहास के अनुसार, बाह का उल्लेख वैदिक काल से जुड़ा हुआ माना जाता है. हालांकि, अब तक इस क्षेत्र से ऐसे पुरातात्विक साक्ष्य नहीं मिले हैं जो इसकी प्राचीनता को पूरी तरह प्रमाणित कर सकें. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, पहले यह इलाका घने जंगलों से घिरा हुआ था. बाद में भदावर रियासत के महाराजा महेंद्र कल्याण सिंह ने यहां एक बस्ती बसाई, जिसे "बाह कल्याणपुर" नाम दिया गया. समय के साथ यह नाम छोटा होकर केवल "बाह" रह गया.
कहा जाता है कि स्थानीय भाषा में "बाह" का अर्थ "बहना" होता है, जो इस क्षेत्र के चारों ओर बहने वाली नदियों से जुड़ा माना जाता है. इतिहास में यह भी उल्लेख मिलता है कि जब इस क्षेत्र का विकास हुआ, तब मुगल साम्राज्य का प्रभाव कमजोर पड़ रहा था, इसलिए यहां का स्थानीय इतिहास और परंपराएं लंबे समय तक अपने मूल स्वरूप में बनी रहीं.
वर्तमान समय में बाह एक प्रशासनिक और ग्रामीण क्षेत्र के रूप में जाना जाता है. यहां सरकारी कार्यालय, स्कूल, स्वास्थ्य सेवाएं, स्थानीय बाजार और सड़क संपर्क जैसी सामान्य सुविधाएं उपलब्ध हैं. कृषि इस क्षेत्र की प्रमुख आजीविका का हिस्सा है और आसपास के गांवों के लोग दैनिक जरूरतों के लिए बाह कस्बे पर निर्भर रहते हैं.