AI की दुनिया में इस वक्त जो चल रहा है, वह किसी प्रोडक्ट लॉन्च की कहानी नहीं है. यह उस बदलते समीकरण की कहानी है जहां टेक कंपनियां तय कर रही हैं कि वे सत्ता के साथ खड़ी होंगी या भरोसे के साथ.
अमेरिका का Defense Department पिछले कई सालों से AI को अपने सिस्टम में शामिल करने की कोशिश कर रहा है. वजह सीधी है. आधुनिक युद्ध डेटा पर चलता है.
सैटेलाइट इमेज, साइबर अलर्ट, इंटेलिजेंस रिपोर्ट, पैटर्न एनालिसिस, सब कुछ आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस से तेज और ज्यादा सटीक किया जा सकता है.
इसी स्पेस में Anthropic और OpenAI जैसे नाम आए. अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ वॉर ने एंथ्रॉपिक के साथ करार किया. लेकिन अब वो टूट चुका है और उसकी जगह OpenAI के साथ सरकार की पार्टनरशिप हुई है.
लेकिन ऐसा क्यों हुआ? क्यों सरकार के साथ पार्टनरशिप टूटने के बावजूद Anthropic का Claude नंबर-1 बन चुका है और ChatGPT को लोग तेजी से अपने फोन से डिलीट कर रहे हैं? आइए जानते हैं आखिर ये पूरा मामला क्या है.
OpenAI vs Anthropic: क्यों है लड़ाई?
हाल ही में भारत में AI Impact Summit हुआ. स्टेज पर एंथ्रॉपिक सीईओ डारियो एमोडेई और OpenAI सीईओ सैम ऑल्टमैन में मतभेद दिखे. दोनों ने एक दूसरे का हाथ नहीं थामा. हालांकि ये मतभेद पुराना था.
शुरुआत में डारियो सैम ऑल्टमैन के OpenAI के कोर टीम का हिस्सा थे, लेकिन वैचारिक मतभेद की वजह से उन्होंने OpenAI को छोड़कर एंथ्रॉपिक नाम की कंपनी बना ली.
मतभेद कंट्रोल को लेकर था. एक तरफ़ सैम ऑल्टमैन चाहते थे और चाहते हैं कि आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस काफी क़ाबिल है और ये फैसले ले सकता है और इसे ज्यादा कंट्रोल की ज़रूरत नहीं है. दूसरी तरफ़ एंथ्रॉपिक के फाउंडर डारियो का मानना है कि AI को एथिक्स फॉलो करना ही होगा, क्योंकि अगर ऐसा नहीं हुआ तो नुक़सान हो सकता है.
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पेंटागन के साथ एंथ्रॉपिक की पार्टनरशिप
Anthropic की पहचान शुरू से AI safety वाली कंपनी की रही है. Claude को एक ऐसा मॉडल बताया गया जो ज्यादा कंट्रोल्ड है, जोखिम वाले जवाब देने से बचता है और एथिक्स पर जोर देता है. जब Defense सिस्टम में AI के इस्तेमाल की बात चली तो Claude का नाम भी चर्चा में आया.
Pentagon के कुछ सिस्टम में Claude के इस्तेमाल को लेकर मतभेद सामने आए. बात सिर्फ टेक की नहीं थी. बात इस बात की थी कि AI का रोल कहां तक होगा. क्या वह सिर्फ डेटा पढ़ेगा या रणनीतिक निर्णय में भी मदद करेगा.
Claude को बाद में Pentagon के कुछ नेटवर्क से ब्लैकलिस्ट कर दिया गया. आधिकारिक भाषा संयमित थी, लेकिन इंडस्ट्री में संकेत साफ गया, Anthropic और Defense की सोच एक लाइन पर नहीं थी.
AI किसके साथ जाएगा?
Anthropic का सार्वजनिक रुख यह रहा है कि AI को नियंत्रित ढांचे में इस्तेमाल किया जाना चाहिए. कंपनी ने हमेशा सुरक्षा और जिम्मेदारी की बात की है. Defense सिस्टम में AI का इस्तेमाल हमेशा साफ सीमाओं में नहीं होता. यही टकराव की जड़ बना.
Anthropic के पीछे हटते ही OpenAI ने अलग रास्ता चुना. OpenAI ने Defense Department के साथ काम करने की दिशा में कदम बढ़ाया. Sam Altman ने खुलकर कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में AI की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
OpenAI अब सिर्फ एक चैटबॉट कंपनी नहीं है. वह भारी निवेश से चलने वाली टेक कंपनी है. AI मॉडल्स को ट्रेन करने की लागत अरबों डॉलर में है. क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर महंगा है. ऐसे में सरकारी कॉन्ट्रैक्ट सिर्फ प्रतिष्ठा नहीं, स्थिर राजस्व भी देते हैं.
एक तरफ व्यावहारिक रणनीति है. सरकार के साथ रहो. राष्ट्रीय सुरक्षा में भूमिका निभाओ. संस्थागत ताकत हासिल करो.दूसरी तरफ एथिक्स की पोजिशनिंग है. जनता को भरोसा दिलाओ कि आपका AI सत्ता के हाथ में हथियार नहीं बनेगा.
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पेंटागन विवाद के बाद लोगों का भरोसा Claude पर बढ़ गया
Pentagon विवाद के बाद Claude की लोकप्रियता में अचानक उछाल देखा गया. जनवरी के अंत में Claude App Store पर बहुत नीचे था. कुछ हफ्तों में वह अमेरिका और ब्रिटेन में टॉप पर पहुंच गया.
ChatGPT से लोगों का भरोसा टूटा
यसोशल मीडिया पर बहस शुरू हो चुकी है. लोग पूछ रहे हैं कि अगर AI Defense सिस्टम में काम कर रहा है तो डेटा की लिमिट्स क्या हैं. हालांकि ऐसा कोई सबूत नहीं है कि ChatGPT यूजर डेटा सरकार को दे रहा है, लेकिन भरोसे की राजनीति में शक भी असर डालता है.
अमेरिका में तेजी से लोग अपने फ़ोन से ChatGPT हटा रहे हैं. लोगों को डर है कि कंपनी यूजर्स का डेट सरकार को ना दे. लोगों को जासूसी का भी डर है कि कहीं सरकार डेटा लेकर लोगों की जासूसी ना करने लगे. चूंकि अब एंथ्रॉपिक सरकार के साथ काम नहीं कर रहा है इसलिए लोगों का भरोसा बन गया है और तेजी से Claude डाउमलोड किया जा रहा है.
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Anthropic का मौके पर चौका
चूंकि लोगों का भरोसा ChatGPT से खत्म हो रहा है, इसलिए Anthropic ने इसी समय Claude के फ्री प्लान में मेमोरी फीचर जोड़ा. यूजर अपने डेटा को मैनेज कर सकता है. एक्सपोर्ट कर सकता है. यह टेक अपडेट से ज्यादा सिग्नल था. यानी दूसरे चैटबॉट्स का डेटा भी यहां यूजर्स एक्सपोर्ट कर सकते हैं.
लोगों के विरोध को देखते हुए OpenAI CEO सैम ऑल्टमैन ने एक लंबा चौड़ा स्टेटमेंट जारी किया. इतना ही नहीं उन्होंने X पर लोगों के सवालों के भी जवाब दिया. इस दौरान उन्होने इस बात पर ज़ोर दी की यूजर्स के डेटा के साथ खिलवाड़ नहीं होगा और वो सरकार को डेटा जासूस करने के लिए नहीं देंगे. बल्कि ये डिफेंस पार्टनरशिप है और यहां कंट्रोल्ड डेटा यूज़ होगा.
नैशनल सिक्योरिटी में AI का यूज
अब बड़ा सवाल यह है कि यह टकराव आगे क्या दिशा लेगा. अगर AI भविष्य की रणनीतिक तकनीक है, तो सरकारें उससे दूरी नहीं रखेंगी. डिफेंस, साइबर सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा में AI का इस्तेमाल बढ़ेगा.
लेकिन अगर जनता को लगे कि AI कंपनियां सत्ता के बहुत करीब हैं, तो भरोसा प्रभावित होगा. और AI का पूरा मॉडल भरोसे पर टिका है. Pentagon की डील OpenAI के पास गई. लेकिन Claude को App Store में तेजी से ग्रोथ मिली.
एक ने संस्थागत ताकत हासिल की. दूसरे ने पब्लिक सेंटिमेंट. यह जंग किसी एक हफ्ते की नहीं है. यह आने वाले दशक की दिशा तय कर सकती है. AI कंपनियां अब न्यूट्रल टेक प्रोवाइर नहीं रह गईं. वे रणनीतिक खिलाड़ी बन चुकी हैं. और इस जंग का असली सवाल यही है….AI किसके साथ खड़ा होगा?