राजधानी दिल्ली में चल रहे एआई समिट पर चीन की मीडिया को मिर्ची लगी है. चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स में भारत के इस इवेंट पर लंबा-चौड़ा आर्टिकल छपा है. ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि ये दुनिया भर में AI पर होने वाला चौथा बड़ा समिट है. इससे पहले फ्रांस, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन में ऐसे सम्मेलन हो चुके हैं.
वहीं चीन के दूसरे अखबार साउथ चाइना मार्निंग पोस्ट ने भारत की इस कोशिश को शक की निगाह से देखा है. अखबार ने कहा है कि भारत के लिए पढ़ा-लिखा वर्कफोर्स, अच्छा रेगुलेशन और रिस्क कैपिटल को तैयार करना जरूरी होगा. अखबार लिखता है कि ये ऐसे फैक्टर हैं जिनके लिए पॉलिसी में पहल की जरूरत होगी.
ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि भारत AI बूम की रेस में शामिल होना चाहता है. लेकिन ग्लोबल टाइम्स ने भारत की AI क्षमता पर सवाल उठाते हुए कहा है कि भारत का डेटा गवर्नेंस अभी भी अराजक किस्म का है और इसकी AI पॉलिसी में स्थिरता की कमी है.
ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि जैसे-जैसे भारत अमेरिका और चीन के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के गैप को कम करने की कोशिश कर रहा है, वह बड़े पैमाने पर डिजिटल ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए एक बहुत बड़ी नई "डेटा सिटी" बनाने की प्लानिंग कर रहा है.
विकसित देशों के दबदबे की चुनौती
बीजिंग यूनिवर्सिटी ऑफ़ पोस्ट्स एंड टेलीकम्युनिकेशंस में ह्यूमन-मशीन इंटरैक्शन और कॉग्निटिव इंजीनियरिंग लेबोरेटरी के डायरेक्टर लियू वेई ने ग्लोबल टाइम्स को बताया कि यह समिट ग्लोबल AI बूम कॉम्पिटिशन में एक्टिव रूप से हिस्सा लेने के लिए भारत की कोशिशों और तेजी को दिखाता है, जो AI में विकसित देशों के लंबे समय से चले आ रहे दबदबे को चुनौती देने की दिशा में एक कदम है.
लियू ने आगे कहा कि इस AI समिट को होस्ट करने की भारत की पहल ग्लोबल AI बूम में शामिल होने के उसके पक्के इरादे को दिखाती है. लियू ने कहा कि वह अपने डेमोग्राफिक डिविडेंड का फ़ायदा उठाना चाहता है. जिसकी आबादी 1.4 बिलियन से ज़्यादा है और इंटरनेट यूज़र्स 1 बिलियन से ज़्यादा हैं, ताकि भारत भविष्य में चीन और यूनाइटेड स्टेट्स के अलावा ग्लोबल AI सीन में एक अहम प्लेयर बन सके.
इमेज मजबूत करने के लिए AI का फ़ायदा
इस एक्सपर्ट ने भारत की क्षमताओं को स्वीकार करते हुए कहा है कि भारत का मकसद G20 समिट के बाद एक बड़ी ताकत के तौर पर अपनी हैसियत बढ़ाना और "ग्लोबल साउथ के नेता" के तौर पर अपनी इमेज चमकाने करने के लिए AI का फ़ायदा उठाना है. एक्सपर्ट ने यह भी चेतावनी दी कि भारत का डेटा गवर्नेंस अभी भी अस्त-व्यस्त और अराजक है और उसकी AI नीतियों में स्थिरता की कमी है.
ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि बड़े पैमाने पर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए भारत की बड़ी योजनाओं और इनोवेशन के लिए उसके बड़े विज़न के बावजूद देश को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में तरक्की के लिए अभी भी लंबा रास्ता तय करना है.
लियू ने कहा, "हालांकि भारत ने शानदार ब्लूप्रिंट तैयार किए हैं, लेकिन बेसिक रिसर्च, कंप्यूटिंग रिसोर्स, टैलेंट की गहराई और इकोसिस्टम मैच्योरिटी में चुनौतियों का मतलब है कि अपनी पूरी AI क्षमता को पाने के लिए लगातार कोशिश और इंटरनेशनल सहयोग की जरूरत होगी."
वहीं साउथ चाइना मार्निंग पोस्ट ने लिखा है कि दो साल पहले भारत सरकार ने स्टार्ट-अप को बढ़ावा देने और इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए 1.25 बिलियन डॉलर का “इंडियाAI मिशन” शुरू किया था. इसमें रिसर्च पर फोकस करने वाले तीन AI एजुकेशन सेंटर बनाना भी शामिल है. हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि ये कोशिशें अभी शुरुआती स्टेज में हैं.
सॉफ्टवेयर डेवलपर्स और इंजीनियरों के बड़े ग्रुप के साथ, भारत के लिए चुनौती इन रिसोर्स का इस्तेमाल करके AI को प्रैक्टिकल एप्लीकेशन में इस्तेमाल करना होगा. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ऐसी कोशिश सफल रही, तो यह ग्लोबल साउथ के लीडर के तौर पर देश के सपनों को मज़बूत कर सकती है और दूसरे उभरते देशों के लिए एक टेम्पलेट दे सकती है.