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ऋषि सुनक से लेकर श्रीराम कृष्णन तक, सब चाहते हैं कि भारत अमेरिकन AI यूज करे, क्या IT सेक्टर जैसा होगा हाल

नई दिल्ली में AI इम्पैक्ट समिट चल रहा है. 16 फरवरी से शुरू हुए इस इवेंट में तमाम दिग्गजों ने हिस्सा लिया है. इस पूरे कार्यक्रम में एक चीज जिस पर ज्यादातर अमेरिकी कंपनियों और उनके प्रतिनिधियों का जोर रहा, वो है भारत को AI का सबसे बड़ा कंज्यूमर बताना. यानी भारत अमेरिकी कंपनियों का AI यूज करने वाला बनेगा.

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AI इम्पैक्ट समिट में तमाम देशों के दिग्गजों ने हिस्सा लिया है. (Photos: ANI/Reuters)
AI इम्पैक्ट समिट में तमाम देशों के दिग्गजों ने हिस्सा लिया है. (Photos: ANI/Reuters)

भारत में AI इम्पैक्ट समिट चल रहा है, जिसमें देश और दुनिया के तमाम दिग्गज हिस्सा ले रहे हैं. बुधवार को श्रीराम कृष्णन ने कुछ ऐसा कहा, जिसके बाद सोशल मीडिया पर नई चर्चा शुरू हो गई. श्रीराम कृष्णन वॉइट हाउस में AI पॉलिसी एडवाइजर हैं. उन्होंने नई दिल्ली में चल रहे एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया. 

उन्होंने अमेरिकी कंपनियों की ओर से इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया. जहां उन्होंने कहा कि भारतीयों और भारतीय कंपनियों को अपने AI इंफ्रास्ट्रक्चर में 'अमेरिकी AI स्टैक का यूज करना चाहिए.'

उनके इस बयान में बाद दुनिया दो ग्रुप में बंट दिख रही है. एक जिनके पास AI स्टैक है और जिन्होंने मूल रूप से AI को बनाया है. वहीं दूसरे वे लोग हैं, जिनसे उम्मीद की जाती है कि वे इस स्टैक और सिर्फ इसी का यूज करें. श्रीराम की इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर चर्चा शुरू हो गई है. 

क्या भारत में थोपा जा रहा अमेरिकी AI?

कई लोगों का कहना है कि उनका प्रयास भारत को ऐसे रिलेशन में धकेलना है, जिसमें भारत हमेशा के लिए अमेरिकी कंपनियों के बनाए AI टूल्स और सर्विसेस का इस्तेमाल करता रहे. इस आइडिया की पैरवी करने वाले श्रीराम अकेले नहीं है. बल्कि कई दूसरे लोग भी इस आइडिया को प्रमोट कर रहे हैं. 

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इस हफ्ते टेक लीडर्स के साथ-साथ ऋषि सुनक जैसे राजनेताओं ने भी इस पर जोर दिया है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि भारत AI का एक आइडियल कंज्यूमर बन सकता है. सुनक ने AI इम्पैक्ट समिट में कहा, 'आज फोकस सीधे AI एडॉप्शन पर शिफ्ट हो गया है और भारत इसका नेतृत्व करने की स्थिति में है.'

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वहीं OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन ने भी इससे सहमति जताई है. उन्होंने कहा, 'यहां होना बहुत ही शानदार है. (भारत में) AI का एडॉप्शन आज दुनिया का नेतृत्व कर रहा है. ये दुनिया में AI का सबसे बड़ा मार्केट बनेगा.' इन बयानों में ये साफ दिख रहा है कि भारत AI एडॉप्शन का सबसे बड़ा मार्केट बनेगा. 

गूगल CEO सुंदर पिचाई से लेकर एंथ्रोपिक्स CEO Dario Amodei तक सभी भारत में अपनी कंपनियों को AI और उससे जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रोवाइडर के तौर पर पेश कर रहे हैं. जहां भारत से उम्मीद की जा रही है कि ये देश उनका एक कंज्यूमर बनेगा. ऐसा होता हुआ भी दिख रहा है. 

IT सेक्टर वाला ना हो जाए हाल

अगर पिछले कुछ दिनों में हुए ऐलानों पर नजर डालेंगे, तो पाएंगे कि Google, OpenAI और एंथ्रोपिक कई कंपनियों को अपने साथ जोड़ रहे हैं, जिन्हें पार्टनरशिप कहा जा रहा है. मूलतः ये कंपनियां AI स्टैक का इस्तेमाल करेंगी और एक तरह से कंज्यूमर बनेंगी. 

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भारत में AI रोलआउट की शुरुआत काफी हद तक भारतीय IT इंडस्ट्री की शुरुआत जैसी है. पिछले दशकों में भारतीय IT सेक्टर मजबूत हुआ है. हमारे पास TCS, Infosys, Wipro जैसी कई कंपनियां हैं. इनका फायदा इंडस्ट्री को मिला है, लेकिन एक दर्द भी है. भारतीय कंपनियां मूलतः सर्विस पर बेस्ड हैं. ये अमेरिकी टेक जाइंट्स के बनाए प्रोडक्ट्स और टेक स्टैक्स को यूज करके सर्विस प्रदान करती है. 

1990 के मुकाबले आज का भारत मजबूत और आत्मविश्वास से भरा हुआ है. 2026 में बात ऑटोनॉमी और संप्रभुता की हो रही है. ऐसे में भारत को इसके लिए तैयार रहना होगा. भारत के पास अपना AI मॉडल और LLM होना बहुत ही जरूरी है. क्योंकि इससे हम IT इंडस्ट्री वाले इतिहास को दोहराएंगे नहीं बल्कि उससे आगे की कहानी लिख सकेंगे.

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