महान हॉकी खिलाड़ी बलबीर सिंह सीनियर पाकिस्तान के खिलाफ उंगली में फ्रैक्चर के बावजूद खेले थे. फुटबॉलर तुलसीदास बलराम ने 1956 ओलंपिक फाइनल की बात याद करते हुए कहा कि भले ही बलबीर सिंह ने उस मैच में मिली जीत में गोल नहीं दागा था, लेकिन उनका जज्बा कमाल का था.
अर्जुन अवॉर्डी दिग्गज बलराम उस भारतीय फुटबॉल टीम का हिस्सा थे, जिसने 1956 ओलंपिक में ऐतिहासिक चौथा स्थान हासिल किया था. उन्होंने याद करते हुए कहा कि बलबीर सिंह ने चिर प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ फाइनल से पहले दर्द निवारक इंजेक्शन लिया था.
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तीन बार के ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता बलबीर सिंह का सोमवार को मोहाली के एक अस्पताल में निधन हो गया, वह 96 वर्ष के थे. बलराम ने अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ की आधिकारिक वेबसाइट पर लिखा, ‘1956 ओलंपिक की इतनी सारी यादें हैं, विशेषकर जिस तरीके से वह (बलबीर सिंह) इन सबसे आगे बढ़े थे, जिससे भारत ने फाइनल में पाकिस्तान को हराकर स्वर्ण पदक जीता था.’“The day our flag was hoisted in front of thousands at Wembley Stadium (1948) and the national anthem played, I felt like I was flying.” – 3-time Olympic Gold Medalist, Balbir Singh Sr.
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Balaram pays his tribute 🙏🏻 to Balbir Singh (Sr.), says he was 'above all' 🙌🏻
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— Indian Football Team (@IndianFootball) May 25, 2020
उन्होंने लिखा, ‘बलबीर पाजी का समर्पण काबिलेतारीफ था. वह अपनी उंगली में प्लास्टर के बावजूद आए थे और उन्होंने मैच से पहले दर्द निवारक इंजेक्शन लिया था.’ भारत ने फाइनल में पाकिस्तान को 1-0 से हराकर स्वर्ण पदक की हैट्रिक बनाई.
आखिर नहीं मिल सकीं बलबीर की अनमोल धरोहरें, 1985 में SAI को दी थी
84 साल के बलराम उस प्रसिद्ध भारतीय तिकड़ी के एकमात्र जिवित फुटबॉलर हैं, जिसमें चुन्नी गोस्वामी और पीके बनर्जी शामिल थे. दोनों दिग्गजों का इसी साल निधन हुआ है.