पदक के दावेदारों में शामिल रहे तीरंदाजों के ओलंपिक में लचर प्रदर्शन पर कोच लिंबा राम और रवि शंकर ने कहा कि इस खराब प्रदर्शन के लिए उनके पास कोई बहाना नहीं है.
टीम के भारत रवाना होने से पहले लिंबा राम ने खेल गांव में कहा, ‘इसके लिए कोई बहाना नहीं है.’
उन्होंने कहा, ‘हमने कड़ी ट्रेनिंग की. भारतीय तीरंदाजी संघ, भारतीय खेल प्राधिकरण और सरकार ने हमें सभी सुविधाएं मुहैया कराई. हम भी नतीजे से निराश हैं.’ दोनों कोच लिंबा और रवि इस बात से सहमत है कि टीम को लेकर बनी हाइप से उम्मीदें बढ़ गई थी लेकिन यह स्वाभाविक है. भारतीय टीम क्वार्टर फाइनल से आगे बढ़ने में नाकाम रही थी.
लिंबा ने कहा, ‘तीरंदाज ओलंपिक से पहले अच्छा प्रदर्शन कर रहे थे. दीपिका कुमारी को अंतरराष्ट्रीय महासंघ ने नंबर एक रैंकिंग दी हैं, हमने नहीं. हमारी लड़कियों की टीम यहां दुनिया की नंबर दो टीम के रूप में आई थी.’
लिंबा हालांकि भारतीय तीरंदाजों की फॉर्म में आई अचानक गिरावट के बारे में अधिक कुछ नहीं बता पाए.
उन्होंने कहा, ‘ईनामदारी से कहूं तो हम यहां कम से कम एक पदक जीतने की उम्मीद के साथ यहां आए थे.’ रवि ने टीम के खराब प्रदर्शन पर कहा, ‘मैंने कुछ विशलेषण किए हैं लेकिन इन्हें बहाने नहीं समझा जाए. ओलंपिक बिलकुल अलग चीज है.’
रवि ने कहा, ‘हमारे तीरंदाजों ने कई विश्व चैंपियनशिप में हिस्सा लिया और इनमें से कुछ को जीता भी. लेकिन ओलंपिक का तेज जानदार है और इसका बड़ा प्रभाव है. हमारे सिर्फ दो तीरंदाजों तरूणदीप और बोम्बायला देवी को ओलंपिक खेलों में खेलने का अनुभव था.’
उन्होंने कहा, ‘अन्य चैंपियनशिप में काफी अच्छा प्रदर्शन करने वाले विभिन्न देशों के कुछ शीर्ष तीरंदाज भी यहां विफल रहे.’ कोच ने हालांकि स्वीकार किया कि दीपिका से काफी उम्मीदें थी और वह इसके दबाव में बिखर गई.
उन्होंने कहा, ‘सभी कह रहे थे कि इस लड़की का पदक पक्का है और इसने इस युवा खिलाड़ी पर काफी दबाव बना दिया और वह इससे निपट नहीं पाई.’ रवि ने स्वीकार किया कि भारतीय तीरंदाज प्रतियोगिता के आयोजन स्थल लॉर्ड्स क्रिकेट मैदान पर चल रही तेज हवाओं से नहीं निपट पाए.
उन्होंने कहा, ‘हमने कड़ी मेहतन की, इन्हीं हालात में अभ्यास किया लेकिन इसका फायदा नहीं उठा पाए और साथ ही अहम मौकों पर भाग्य ने भी हमारे तीरंदाजों का साथ नहीं दिया.’
उन्होंने कहा, ‘तेज हवाओं ने सभी टीमों को प्रभावित किया. आप सभी टीमों का स्कोर देखेंगे तो पता चलेगा कि इसमें निरंतरता की कमी है. दुर्भाग्य से मारे तीरंदज यहां आने के एक दिन बाद बीमार हो गए. इससे कुछ में कुछ दिन लगे और इसका उनकी शारीरिक ट्रेनिंग पर भी असर पड़ा.’