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खतरे में 2011 का क्रिकेट विश्‍व कप

भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश ने 2011 विश्व कप की संयुक्त मेज़बानी हासिल की थी. लेकिन उस वक्त क्या पता था कि भारत पाकिस्तान रिश्ते ऐसी शक्ल अख्तियार कर लेंगे.

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खतरे में है 2011 क्रिकेट विश्‍व कप की मेज़बानी. मुमकिन है कि अगला विश्व कप भारतीय उपमहाद्वीप में न हो. मंगलवार को विश्‍व कप 2011 ऑर्गेनाइज़िंग कमिटि के सदस्य देश, दिल्ली में मिले. कुछ अहम फ़ैसले भी लिए गए लेकिन एक डर था, जो बंद कमरे में सबको सता रहा था. भारत-पाक के बिगड़ते रिश्ते के बीच 2011 का संयुक्त आयोजन खटाई में पड़ सकता है.

भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश ने 2011 विश्व कप की संयुक्त मेज़बानी हासिल की थी. लेकिन उस वक्त क्या पता था कि भारत पाकिस्तान रिश्ते ऐसी शक्ल अख्तियार कर लेंगे. भारत-पाक की बाएलैटरल सीरीज़ के रद्द होते ही ये सुगबुगाहट शुरू हो गई थी. लेकिन अब बढ़ सकती है मुश्किल. न तो भारत पाकिस्तान जाकर क्रिकेट खेलने को तैयार है, न ही पाक आने को तैयार है भारत.

ऊपर से भारत सरकार का ये अनकहा फ़रमान कि पाकिस्तान से किसी भी तरह के रिश्ते मंज़ूर नहीं. अगर हम मान भी लें कि वर्ल्ड कप जैसे टूर्नामेंट में सीधी भिड़ंत पर फ़ैसला उसी वक्त होगा, फिर भी संयुक्त मेज़बानी में कई ऐसे मौके आएंगे जहां इन दोनों देशों को मिल बैठ कर आयोजन की बारीकियों पर साथ काम करना होगा. इसमें आर्थिक साझेदारी एक अहम हिस्सा है.

ऊपर से इन दोनों देशों के बीच यात्रा के लिए खिलाड़ियों को वीज़ा मिलना भी होगा उतना ही मुश्किल. मुंबई हमले के बाद से भारत और पाक के क्रिकेट बोर्ड ने कई मसलों पर अपने कदम पीछे खींचे हैं. साफ़ है कि जो सरकार की नीति होगी, वही बोर्ड की भी. विश्व कप है महज़ दो साल दूर और किसी भी लिहाज़ से मौजूदा संकट छंटता नज़र नहीं आ रहा. भले ही आईसीसी का दल आयोजन के लिए इन देशों का दौरा कर रहा हो. भले ही भारत और पाकिस्तान के क्रिकेट बोर्ड खुलकर कुछ भी नहीं बोल रहे हों, सच्चाई तो यही है कि भारतीय खेलप्रेमियों का 15 साल लंबा इंतज़ार शायद कुछ और खिंच सकता है.

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