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India In Olympics: ...जब टूटा इन भारतीयों का सपना, पदक के करीब पहुंचकर लगी निराशा हाथ!

ओलंपिक खेलों में मेडल जीतना किसी भी एथलीट के लिए सबसे बड़ा सपना होता है. जबकि ओलंपिक में चौथा स्थान हासिल करना किसी खिलाड़ी के लिए सबसे बड़ी निराशा होती है. कुछ ऐसे मौके आए, जब भारतीय खिलाड़ी ओलंपिक खेलों में पदक जीतने से चूक गए.

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Milkha Singh (@AP)
Milkha Singh (@AP)

पेरिस ओलंपिक 2024 के आगाज में अब ज्यादा वक्त नहीं बचा है. पेरिस ओलंपिक 26 जुलाई से लेकर 11 अगस्त तक होने हैं. इस ओलंपिक के लिए भारतीय खिलाड़ी पूरी तरह कमर कस चुके हैं. भारत ने पिछले ओलंपिक में अपना बेस्ट प्रदर्शन करते हुए कुल सात पदक जीता था. इस बार उसकी कोशिश टोक्यो के रिकॉर्ड को तोड़ने पर होगी.

देखा जाए तो ओलंपिक पदक जीतना किसी भी एथलीट के लिए एक सपने के सच होने जैसा होता है. अक्सर कहा जाता है कि ओलंपिक में चौथा स्थान हासिल करना किसी खिलाड़ी के लिए सबसे बड़ी निराशा होती है. कुछ ऐसे मौके आए, जब खेल के सबसे बड़े वैश्विक मंच पर भारतीय खिलाड़ी ओलंपिक पदक जीतने से चूक गए. इसकी शुरुआत 1956 मेलबर्न ओलंपिक में हुई थी और यह टोक्यो में हुए पिछले ओलंपिक तक जारी रहा.

मेलबर्न ओलंपिक, 1956

भारतीय फुटबॉल टीम ने क्वार्टर फाइनल में मेजबान ऑस्ट्रेलिया को 4-2 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई. इस मैच में ही नेविल डिसूजा ने हैट्रिक बनाई. इसके साथ ही नेविल ओलंपिक में हैट्रिक गोल करने वाले पहले एशियाई बन गए थे. नेविल ने सेमीफाइनल में भी यूगोस्लाविया के खिलाफ टीम को बढ़त दिला कर अपने प्रदर्शन को दोहराने की कोशिश की, लेकिन यूगोस्लाविया ने दूसरे हाफ में जोरदार वापसी करते हुए मुकाबले को अपने पक्ष में कर लिया. फिर कांस्य पदक मुकाबले में भारतीय टीम बुल्गारिया से 0-3 से हार गई. भारत के महान खिलाड़ी पीके बनर्जी अक्सर अपनी इस पीड़ा को साझा करते थे.

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रोम ओलंपिक, 1960

महान फर्राटा धावक मिल्खा सिंह 400 मीटर फाइनल में पदक के दावेदार थे, लेकिन वह सेकंड के 10वें हिस्से से कांस्य पदक जीतने से चूक गए. इस हार के बाद  ‘फ्लाइंग सिख’  ने खेल लगभग छोड़ ही दिया था. उन्होंने इसके बाद 1962 के एशियाई खेलों में दो स्वर्ण पदक जीते, लेकिन ओलंपिक पदक चूकने की पीड़ा हमेशा बरकरार रही.

मॉस्को ओलंपिक, 1980

नीदरलैंड्स, ऑस्ट्रेलिया और ग्रेट ब्रिटेन जैसे शीर्ष हॉकी देशों ने अफगानिस्तान पर तत्कालीन सोवियत संघ के आक्रमण के चलते मॉस्को खेलों का बहिष्कार किया था. ऐसे में भारतीय महिला हॉकी टीम के पास अपने पहले प्रयास में ही पदक जीतने का बड़ा मौका था. टीम को हालांकि पदक से चूकने की निराशा का सामना करना पड़ा. टीम अपने आखिरी मैच में सोवियत संघ से 1-3 से हारकर चौथे स्थान पर रही.

लॉस एंजेलिस ओलंपिक, 1984

लॉस एंजेलिस ओलंपिक ने मिल्खा की रोम ओलंपिक की यादें फिर से ताजा कर दीं, जब पीटी उषा 400 मीटर बाधा दौड़ में सेकंड के 100वें हिस्से से कांस्य पदक से चूक गईं. जिससे यह किसी भी प्रतियोगिता में किसी भारतीय एथलीट के लिए अब तक की सबसे करीबी चूक बन गई. 'पय्योली एक्सप्रेस' के नाम से मशहूर उषा रोमानिया की क्रिस्टीना कोजोकारू के बाद चौथे स्थान पर रहीं. वह हालांकि अपनी इस साहसिक प्रयास के बाद घरेलू नाम बन गईं.

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Track star P.T. Usha of India shown in photo dated 29 September 1986 streaking her way to pass in the women's 200-meter heats with a new Asian games...

एथेंस ओलंपिक 2004

दिग्गज लिएंडर पेस और महेश भूपति की टेनिस में भारत की संभवतः सबसे महान युगल जोड़ी एथेंस खेलों में पुरुष युगल में पोडियम पर पहुंचने से चूक गई. पेस और भूपति क्रोएशिया के मारियो एनसिक और इवान ल्युबिसिक से मैराथन मैच में 6-7, 6-4, 14-16 से हारकर कांस्य पदक से चूक गए और चौथे स्थान पर रहे. इस जोड़ी को इससे पहले सेमीफाइनल में निकोलस किफर और रेनर शटलर की जर्मनी की जोड़ी से सीधे सेटों में 2-6, 3-6 से हार का सामना करना पड़ा था.

इन खेलों में कुंजरानी देवी महिलाओं की 48 किग्रा भारोत्तोलन प्रतियोगिता में चौथे स्थान पर रहीं, लेकिन वह वास्तव में पदक की दौड़ में नहीं थीं. वह क्लीन एवं जर्क वर्ग में 112.5 किग्रा वजन उठाने के अपने अंतिम प्रयास में अयोग्य घोषित कर दी गईं. कुंजरानी 190 किग्रा के कुल प्रयास के साथ कांस्य पदक विजेता थाईलैंड की एरी विराथावोर्न से 10 किग्रा पीछे रही.

लंदन ओलंपिक, 2012

निशानेबाज जॉयदीप कर्माकर ने इस सत्र में कांस्य पदक विजेता से एक स्थान पीछे रहने के निराशा का अनुभव किया. कर्माकर पुरुषों की 50 मीटर राइफल प्रोन स्पर्धा के क्वालिफिकेशन राउंड में सातवें स्थान पर रहे थे और फाइनल में वह कांस्य पदक विजेता से सिर्फ 1.9 अंक पीछे रहे.

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रियो ओलंपिक, 2016

दीपा कर्माकर ओलंपिक खेलों में प्रतिस्पर्धा करने वाली पहली भारतीय महिला जिमनास्ट बनीं. महिलाओं की वॉल्ट स्पर्धा के फाइनल में जगह बनाने के बाद, वह महज 0.150 अंकों से कांस्य पदक से चूक गईं. उन्होंने 15.066 के स्कोर के साथ  चौथा स्थान हासिल किया.

India's Dipa Karmakar competes during the artistic gymnastics test event Women's Vault final for the Rio 2016 Olympic games at the Rio Olympic Arena...

इसी ओलंपिक में अभिनव बिंद्रा का शानदार करियर एक परीकथा जैसे समापन की ओर बढ़ रहा था, लेकिन वह भी मामूली अंतर से पदक जीतने से चूक गए. बीजिंग ओलंपिक में स्वर्ण जीतने वाले बिंद्रा मामूली अंतर से कांस्य पदक नहीं जीत सके.

रोहन बोपन्ना को 2004 के बाद एक बार फिर से ओलंपिक पदक जीतने से दूर रहने की निराशा का सामना करना पड़ा, जब उनकी और सानिया मिर्जा की भारतीय मिश्रित युगल टेनिस जोड़ी को सेमीफाइनल और फिर कांस्य पदक मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा. इस जोड़ी को कांस्य पदक मैच में लुसी ह्रादेका और रादेक स्तेपानेक से हार का सामना करना पड़ा था.

टोक्यो ओलंपिक, 2020

मॉस्को खेलों के चार दशक के बाद भारतीय महिला हॉकी टीम को एक बार फिर करीब से पदक चूकने का दंश झेलना पड़ा. भारतीय टीम तीन बार की ओलंपिक चैम्पियन ऑस्टेलिया को हराकर सेमीफाइनल में पहुंची, लेकिन उसे अंतिम चार मैच में अर्जेंटीना से 0-1 से हार का सामना करना पड़ा. रानी रामपाल की कप्तानी वाली टीम को इसके बार कांस्य पदक मैच में  ग्रेट ब्रिटेन के खिलाफ 3-2 की बढ़त को बरकरार नहीं रख सकी और 3-4 से हार गई. इसी ओलंपिक में अदिति अशोक ऐतिहासिक पदक जीतने से चूक गईं. वर्ल्ड रैंकिंग में 200 वें स्थान पर काबिज इस खिलाड़ी ने दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को टक्कर दी, लेकिन बेहद मामूली अंतर से पदक नहीं जीत सकी.

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