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IPL 2022: क्या होता है नेट रनरेट? प्लेऑफ में पहुंचने के लिए फिर किस्मत के सहारे टीमें

इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के मौजूदा सीजन में गुजरात टाइटन्स (GT) ही केवल प्लेऑफ में जगह बना सकी है. कुछ टीमों के लिए मामला नेट-रन रेट पर भी जाकर फंस सकता है.

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DC Team (@IPL) DC Team (@IPL)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • गुजरात टाइटन्स कर चुकी है क्वालिफाई
  • नेट-रन रेट पर भी फंस सकता है मामला

इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2022 में प्लेऑफ की रेस जारी  है. सोमवार को दिल्ली कैपिटल्स की जीत के बाद यह रेस और रोमांचक हो चुका है. गुजरात टाइटन्स (GT) जहां 13 मैचों में 20 अंकों के साथ प्लेऑफ में अपना स्थान सुनिश्चित करने वाली इकलौती टीम है. वहीं, मुंबई इंडियंस (MI) और चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) का सफर समाप्त हो चुका है. इन तीनों के अलावा बाकी टीमें नेट रन रेट और अगर-मगर के फेर में फंसी हुई हैं.

कैसे निकाला जाता नेट रन रेट?

नेट-रन रेट निकालने के लिए किसी टीम के बल्लेबाजी रन रेट को टीम के गेंदबाजी रन रेट से घटाया जाता है. मान लीजिए आईपीएल में ही किसी टीम ने 20 ओवरों में 200 रन बनाए और फिर गेंदबाजी करते हुए 20 ओवरों में 140 रन ही दिए, तो उसका नेट रन रेट 3 होगा. चूंकि टीम ने 20 ओवर में 20 रन बनाए हैं, इसलिए  बैटिंग रन रेट 10 होगा. वहीं 140 रन खर्च करने के चलते उसका बॉलिंग रन रेट 7 का होगा. मतलब 10 में से 7 माइनस करने पर नेट रन-रेट निकल जाएगा.

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अगर कोई टीम निर्धारित ओवरों से पहले ही ऑल आउट हो जाती है, तो भी नेट रन रेट का कैलकुलेशन उसके निर्धारित ओवर के आधार पर ही होगा. उदाहरण के लिए आरसीबी की टीम की टीम 18 ओवर में 5 की रन रेट से 90 रन पर सिमट गई. इसके बावजूद आरसीबी का बैटिंग रन रेट रेट 4.50 माना जाएगा (90 रन/20=4.50).

डीएलएस आने पर क्या होगा?

अगर किसी मुकाबले में बारिश या किसी दूसरे कारणों से व्यवधान आता है, तो नेट रन-रेट का निर्धारण वास्तविक स्कोर की बजाय, पार स्कोर (डीएलएस लगने के बाद निर्धारित स्कोर) के आधार पर होगा. उदाहरण के लिए अगर टीम पंजाब किंग्स 20 ओवर में 200 रन बनाती है और बारिश होने के चलते आरसीबी के लिए टारगेट 16 ओवरों में 170 रन कर दिया जाता है, तो नेट रन रेट का निर्धारण भी 16 ओवरों में बनाए गए रनों के आधार पर ही होगा.

अगर पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम पूरे ओवर खेलती है, लेकिन दूसरे बैटिंग करने वाली टीम को कम स्कोर पर ऑलआउट कर देती है तब उसे नेट-रनरेट में पूरे ओवर खेलने का फायदा मिल सकता है. पूरे टूर्नामेंट में नेट-रनरेट हर मैच के साथ बढ़ता, घटता रहता है. किसी टीम ने अगर पहले मैच में बढ़िया खेला और दूसरे मैच में बेकार खेल दिखाया, तब उसके टूर्नामेंट में उसके नेट-रनरेट पर फर्क पड़ेगा.

 

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