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फंसे खिलाड़ी, टलते मैच और जंग का साया… संकट में ‘फुटबॉल का उभरता साम्राज्य'

मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब फुटबॉल पर भी दिखने लगा है. सुरक्षा चिंताओं, यात्रा प्रतिबंधों और हवाई क्षेत्र में बाधाओं के कारण एशियाई क्लब प्रतियोगिताओं के कुछ मुकाबलों के कार्यक्रम प्रभावित हुए हैं और कई देशों की घरेलू लीग भी सतर्कता के साथ संचालित की जा रही हैं.

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स्पेन और अर्जेंटीना के बीच ‘फाइनलिसिमा’ मुकाबला 27 मार्च को कतर के दोहा स्थित लुसैल स्टेडियम में खेला जाना निर्धारित है. (Photo, Getty)
स्पेन और अर्जेंटीना के बीच ‘फाइनलिसिमा’ मुकाबला 27 मार्च को कतर के दोहा स्थित लुसैल स्टेडियम में खेला जाना निर्धारित है. (Photo, Getty)

मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब खेल जगत तक भी पहुंचने लगा है. क्षेत्रीय अस्थिरता, सुरक्षा चिंताओं और हवाई क्षेत्र में पाबंदियों के कारण फुटबॉल टूर्नामेंटों का कैलेंडर प्रभावित हो रहा है. एशियाई क्लब प्रतियोगिताओं से लेकर घरेलू लीग तक कई मुकाबले स्थगित या अनिश्चित हो गए हैं. खिलाड़ियों की यात्रा, टीमों की सुरक्षा और आयोजन की व्यवस्थाएं- इन सभी पर युद्ध की छाया दिखाई देने लगी है.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मौजूदा संकट का सबसे ज्यादा असर एशियाई क्लब प्रतियोगिताओं पर पड़ा है. एशियाई फुटबॉल परिसंघ (Asian Football Confederation-AFC) को अपने कुछ प्रमुख टूर्नामेंटों के कार्यक्रम में बदलाव करना पड़ा है.

खासतौर पर AFC Champions League Elite के वेस्ट रीजन के नॉकआउट मुकाबलों के कार्यक्रम पर असर पड़ा है. इसके अलावा AFC Champions League Two और AFC Challenge League के कुछ मैचों को भी टालने की खबरें सामने आई हैं.

इन प्रतियोगिताओं में सऊदी अरब, कतर, यूएई और ईरान जैसे देशों के क्लब हिस्सा लेते हैं, जो सीधे तौर पर क्षेत्रीय तनाव से प्रभावित हैं. रिपोर्टों के मुताबिक कुछ हाई-प्रोफाइल क्लब मुकाबले भी अनिश्चितता में आ गए हैं, जिनमें सऊदी अरब के क्लब Al-Nassr के मैचों का भी जिक्र किया गया है. इस क्लब से पुर्तगाल के स्टार खिलाड़ी क्रिस्टियानो रोनाल्डो जुड़े हैं.

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कई देशों की घरेलू लीग भी प्रभावित

युद्ध का असर केवल अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों तक सीमित नहीं रहता. रिपोर्टों के अनुसार मिडिल ईस्ट के कुछ देशों में घरेलू फुटबॉल प्रतियोगिताओं पर भी असर पड़ा है.

कतर में खेल आयोजनों के कार्यक्रम को लेकर सतर्कता बरती जा रही है और कुछ मैचों के स्थगित होने की खबरें सामने आई हैं. वहीं, ईरान में भी क्षेत्रीय हालात के कारण कई खेल प्रतियोगिताओं के कार्यक्रम प्रभावित हुए हैं, जिनमें फुटबॉल लीग भी शामिल बताई जा रही है.

कुछ देशों में सुरक्षा कारणों से मैचों को सीमित दर्शकों के साथ कराने या चरणबद्ध तरीके से फिर शुरू करने जैसे विकल्पों पर भी विचार किया गया है. यानी फुटबॉल पूरी तरह बंद नहीं हुआ है, लेकिन कई जगहों पर अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है.

अंतरराष्ट्रीय मैच और बड़े इवेंट भी प्रभावित

संकट का असर केवल क्लब फुटबॉल तक सीमित नहीं है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कतर में प्रस्तावित स्पेन और अर्जेंटीना के बीच होने वाले हाई-प्रोफाइल 'फाइनलिसिमा' मैच के आयोजन को लेकर भी अनिश्चितता जताई जा रही है. स्पेन और अर्जेंटीना के बीच ‘फाइनलिसिमा’ मुकाबला 27 मार्च को कतर के दोहा स्थित लुसैल स्टेडियम में खेला जाना है.

इसके अलावा कुछ राष्ट्रीय टीमों के मैच और क्वालिफायर भी यात्रा प्रतिबंधों और सुरक्षा कारणों से प्रभावित हो सकते हैं.

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यात्रा संकट: खिलाड़ी फंसे, उड़ानें बाधित

मिडिल ईस्ट दुनिया के सबसे व्यस्त एयर ट्रांजिट हब में से एक है. ऐसे में जब क्षेत्रीय हवाई क्षेत्र प्रभावित होता है तो इसका असर खिलाड़ियों और टीमों की यात्रा पर भी पड़ता है.

रिपोर्टों के मुताबिक हाल के दिनों में कुछ अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को खाड़ी क्षेत्र में यात्रा संबंधी मुश्किलों का सामना करना पड़ा. कई टीमों को वैकल्पिक मार्गों से यात्रा करनी पड़ी, जिससे टूर्नामेंटों का कार्यक्रम बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो गया.

यही वजह है कि खेल संगठनों ने जोखिम उठाने के बजाय कुछ मुकाबलों को टालना ज्यादा सुरक्षित समझा.

यदि क्षेत्रीय तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो इसका असर आगे होने वाली प्रतियोगिताओं पर भी पड़ सकता है. एशियाई क्लब फुटबॉल का पूरा कैलेंडर प्रभावित हो सकता है और कुछ देशों की अंतरराष्ट्रीय तैयारियों पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है.

युद्ध और खेल: इतिहास के सबक

खेल और युद्ध का टकराव इतिहास में कई बार देखने को मिला है. द्वितीय विश्व युद्ध के कारण FIFA World Cup का आयोजन 1938 के बाद लंबे समय तक नहीं हो पाया और अगला विश्व कप 1950 में आयोजित हुआ.

इसी तरह 1991 के Gulf War के दौरान पश्चिम एशिया में कई खेल प्रतियोगिताओं को स्थगित करना पड़ा था.

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रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद FIFA और UEFA ने रूस को अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से निलंबित कर दिया. कई मुकाबलों का स्थान बदलना पड़ा. ये उदाहरण बताते हैं कि जब भू-राजनीतिक संकट गहराता है, तो खेल भी उससे अछूते नहीं रहते.

एशियाई फुटबॉल की अर्थव्यवस्था पर असर

मिडिल ईस्ट पिछले कुछ वर्षों में एशियाई फुटबॉल की आर्थिक धुरी बन गया है. सऊदी अरब, कतर और यूएई जैसे देशों ने फुटबॉल में भारी निवेश किया है. बड़े अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के आगमन, प्रसारण अधिकारों के बड़े समझौतों और विशाल प्रायोजन सौदों ने इस क्षेत्र को वैश्विक फुटबॉल बाजार का अहम केंद्र बना दिया है.

ऐसे में अगर टूर्नामेंट लंबे समय तक प्रभावित होते हैं तो प्रसारण अधिकार, टिकट बिक्री, स्पॉन्सरशिप और खेल पर्यटन से होने वाली आय पर भी असर पड़ सकता है.

मिडिल ईस्ट के मौजूदा संकट ने फुटबॉल को पूरी तरह बंद नहीं किया है, लेकिन क्षेत्र में होने वाले कई टूर्नामेंट और लीग फिलहाल अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं. एशियाई क्लब प्रतियोगिताएं, घरेलू लीग और अंतरराष्ट्रीय मैच- सभी पर इसका असर दिखाई दे रहा है.

इतिहास बताता है कि युद्ध के दौर में खेल रुक सकते हैं, लेकिन हालात सामान्य होते ही मैदान फिर से गुलजार हो जाते हैं. उम्मीद यही है कि जब क्षेत्रीय तनाव कम होगा तो स्टेडियमों में फिर से फुटबॉल की आवाज गूंजेगी- क्योंकि खेल, आखिरकार, संघर्ष के बीच भी सामान्य जीवन की धड़कन को जीवित रखने का माध्यम होता है.

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