22 जून 2025 को कनाडा की टीम इंडिया और श्रीलंका में होने वाले टी-20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए क्वालिफाई कर गई. वर्ल्ड कप से 5 हफ्ते पहले, कनाडा के ओंटेरियो राज्यक्षेत्र के ब्रैम्पटन सिटी हॉल में जमावड़ा लगा. देश की क्रिकेट टीम आई हुई थी. शहर के मेयर और क्रिकेट के तमाम फैन्स मौजूद थे. मेयर पैट्रिक ब्राउन ने टीम को टी-20 वर्ल्ड कप के लिए शुभकामनाएं दीं.
टीम की ओर से आभार व्यक्त करने के लिए निकोलस कर्टन आए. माना जा रहा था कि टी-20 वर्ल्ड कप में निकोलस ही टीम की अगुवाई करेंगे. सभी की शुभकामनाओं के साथ टीम श्रीलंका के लिए निकल पड़ी, जहां उन्हें टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ट्रेनिंग करनी थी. कुछ ही दिनों में खबर आई कि कनाडा टीम की कप्तानी 23 साल के होने वाले दिलप्रीत बाजवा करेंगे. ये फैसला अप्रत्याशित था. मगर कनाडा कोई बड़ी टीम नहीं थी और इस फैसले पर बहुत डिस्कशन नहीं हुआ.
17 फरवरी को कनाडा ने टूर्नामेंट में अपना तीसरा मैच खेला और न्यूजीलैंड ने उन्हें 29 गेंद शेष रहते, 8 विकेट से रौंद दिया. इस मैच के बाद एक टीम मीटिंग ऐसी हुई, जिसमें टीम के कप्तान दिलप्रीत बाजवा गायब रहे. असल में, आईसीसी की ऐंटी करप्शन यूनिट उनसे बातचीत कर रही थी. इस बातचीत के दौरान, दिलप्रीत बाजवा का फोन भी चेक किया गया.
ये सभी बातें सीबीएस के इन्वेस्टिगेटिव डॉक्युमेंट्री विंग द फिफ्थ इस्टेट ने एक डॉक्युमेंट्री के जरिए सामने रखी हैं. 43 मिनट लम्बी इस डॉक्युमेंट्री में कनाडा क्रिकेट बोर्ड में चल रहे भ्रष्टाचार और इसके बड़े नामों द्वारा अपनी रसूख का इस्तेमाल करते हुए फिक्सिंग करने का ब्यौरा दिया गया है. यहां बता दें कि फिक्सिंग महज मैच के नतीजे तक ही सीमित नहीं होती बल्कि स्पॉट फिक्सिंग और सेशन के दौरान पूर्व-निर्धारित नतीजे लाने तक चलती है.
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द फिफ्थ इस्टेट की इस डॉक्युमेंट्री में एक ऐसा नाम भी आया है, जिसने इस पूरे मामले कोई और भी सनसनीखेज बना दिया है. ये नाम है भारत की जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का. लॉरेंस बिश्नोई का गैंग कनाडा में खासा एक्टिव है और बीते वक्त में तमाम अलग-अलग घटनाओं में इसका नाम आता रहा है. कनाडा में कपिल शर्मा के कैफे पर भी इसी गैंग ने गोलियां चलाई थीं, जिसका वीडियो खूब वायरल हुआ था. द फिफ्थ इस्टेट के पत्रकार स्टीवेन डिसूजा, कनाडा के तत्कालीन प्रेसिडेंट अमजद बाजवा से सीधे तौर पर पूछते भी हैं कि क्या कनाडा का क्रिकेट लॉरेंस बिश्नोई के इशारे पर चल रहा है. जवाब में अमजद बाजवा ने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी. अमजद ने ये भी कहा कि आईसीसी की ऐंटी करप्शन यूनिट ने दिलप्रीत बाजवा कोई तलब किया था, इसके बारे में भी उन्हें कोई जानकारी नहीं थी. बोर्ड के प्रेसिडेंट होने के नाते उन्हें ये न मालूम हो, ऐसा होना लगभग असंभव मालूम देता है.
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इस डॉक्युमेंट्री में ऐसे एक वाकये का जिक्र भी है, जब कनाडा के एक स्टार खिलाड़ी के पास कुछ लोग आए और आकर उसे धमकी दी कि 'कुछ' खिलाड़ियों को टीम में रहना ही होगा, वरना अंजाम बेहद बुरे होंगे. गैंग के इशारों पर यही 'कुछ' खिलाड़ी फिक्सिंग करते थे और लोगों को मोटा पैसा बनाने का मौका मिलता था. डॉक्युमेंट्री में ये बात एक अनाम शख्स ने बताई, सुरक्षा कारणों से जिसकी पहचान गुप्त रखी हुई थी. द फिफ्थ इस्टेट का कहना है कि ये अनाम शख्स वहां के क्रिकेट की दुनिया का एक बड़ा नाम था. इस अनाम शख्स ने अपने फोन पर आया हुआ एक मेसेज भी दिखाया, जिसमें उसे जान से मारने की धमकी दी गई थी और लॉरेंस बिश्नोई के गैंग का नाम लिखा हुआ था.
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इस पूरी इन्वेस्टिगेशन में एक कॉल रिकॉर्डिंग ने बेहद अहम बातें सामने रखी हैं. ये रिकॉर्डिंग है खुर्रम चौहान की, जो कनाडा के लिए क्रिकेट खेल चुके हैं और बाद में टीम के हेड कोच भी रहे. एक फोन कॉल के दौरान अपने साथी से बात करते हुए खुर्रम को ये कहते हुए सुना जा सकता है कि जब वो टीम के कोच थे, उन्हें एक लिस्ट दी जाती थी जिसमें प्लेइंग इलेवन और बैटिंग ऑर्डर लिखा होता था. खुर्रम ने उस कॉल के दौरान कहा कि उन्हें निर्देश मिलता था कि इन्हीं खिलाड़ियों को टीम में रखना था और इसी ऑर्डर में उन्हें उतारना था. इसी कॉल में उन्होंने 2025 के कनाडा वर्सेज़ नामीबिया मैच का जिक्र किया. इस मैच से पहले भी उन्हें ऐसी ही एक लिस्ट दी गई, लेकिन चौहान ने खिलाड़ी भी अपनी मर्जी से चुने और बैटिंग ऑर्डर भी. चौहान के मुताबिक, कनाडा मैच जीत गई और मैच के बाद उनके पास कनाडा क्रिकेट बोर्ड के सीईओ सलमान खान फोन आया, जो पूछ रहे थे कि उन्होंने ऐसा क्यों किया.
द फिफ्थ इस्टेट की इस डॉक्युमेंट्री में खुर्रम चौहान की जो कथित बातचीत दिखाई है, उसमें उन्होंने साफ शब्दों में क्रिकेट कनाडा के सीईओ सलमान ख़ान, बोर्ड प्रेसिडेंट अमजद बाजवा और बोर्ड मेंबर राणा इमरान का नाम लिया और कहा कि इस गड़बड़झाले में ये सभी शामिल हैं.