भारत और वेस्टइंडीज के बीच हुए अहम सुपर 8 मुकाबले से पहले भारतीय टीम के कोच गौतम गंभीर ने टीम हडल में रिंकू सिंह को हौसला दिया था. रिंकू ने अपने पिता खानचंद सिंह के निधन के सिर्फ एक दिन बाद ही टीम में वापसी की. उनके पिता लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे थे.
पहले रिंकू टी20 वर्ल्ड कप टीम से अचानक घर लौट गए थे, जब भारत का पहला सुपर 8 मुकाबला दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेला गया और उनके पिता की तबीयत बिगड़ी. इसके बाद वह समय रहते चेन्नई लौट आए और जिम्बाब्वे के खिलाफ मैच के लिए पूरी तैयारी के साथ स्क्वॉड में शामिल हुए. उन्होंने इस दौरान अद्भुत धैर्य और समर्पण दिखाया.
पिता के निधन के बाद भी रिंकू ने जल्दी ही भारतीय कैंप में वापसी की, ताकि भारत के लिए वेस्टइंडीज के खिलाफ लगभग नॉकआउट जैसा मुकाबला खेल सकें.
भारत के लिए फिनिशर माने जाने वाले रिंकू सिंह दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हार के बाद टीम में बदलाव के चलते प्लेइंग XI में जगह नहीं बना पाए. हालांकि, गौतम गंभीर ने वेस्टइंडीज के खिलाफ मुकाबले से पहले उनकी टीम के प्रति लगन और समर्पण की जमकर तारीफ की.
टीम हडल में गंभीर ने कहा, 'रिंकू, यह बहुत बड़ी बात है कि आप टीम में वापस आए. याद रखो, आप अकेले नहीं हो. पूरी टीम आपके साथ है. इसलिए मजबूत रहो.'
𝗦𝗼𝗹𝗶𝗱𝗮𝗿𝗶𝘁𝘆 𝗮𝗻𝗱 𝗣𝗼𝘀𝗶𝘁𝗶𝘃𝗶𝘁𝘆
— BCCI (@BCCI) March 3, 2026
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टी20 वर्ल्ड कप के वर्चुअल क्वार्टर फाइनल से पहले कोलकाता के ईडन गार्डन्स में टीम हडल में गौतम गंभीर ने कहा था कि यह मैच बहुत महत्वपूर्ण है. दबाव स्वाभाविक है, लेकिन डरने की बजाय उसे अपनाना चाहिए. उन्होंने खिलाड़ियों से कहा कि दबाव को सकारात्मक तरीके से संभालो और खेल का आनंद लो.
गंभीर ने कहा, 'दोस्तो, दबाव है. लेकिन हम उससे भागते नहीं. हम उसका सामना करते हैं. अगर कभी दबाव लगे, तो सही और सकारात्मक कदम उठाओ. खेल का आनंद लो. बहादुर बनो, साहसी बनो और एक-दूसरे के लिए खेलो.' गंभीर के इस संदेश के बाद टीम मैदान पर तैयार दिखी.
दरअसल, मैदान पर भारतीय टीम ने जब दबाव में थी, तब शानदार प्रदर्शन किया. संजू सैमसन ने नाबाद 97 रनों की दमदार पारी खेलते हुए भारत को पांच विकेट से जीत दिलाई. इस जीत के साथ भारत ने सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली.
रिंकू की टीम में वापसी और गंभीर का हौसला दिखाना यह साबित करता है कि क्रिकेट सिर्फ रन और विकेट का खेल नहीं है. यह चरित्र, धैर्य और टीम भावना का खेल भी है. रिंकू ने व्यक्तिगत दुख के बावजूद टीम के लिए मेहनत और समर्पण दिखाया. उन्होंने साबित किया कि कठिन समय में भी हिम्मत और लगन जरूरी है.