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'भगवान कुछ सिखाना चाहते थे...', सलाम क्रिकेट में ऋषभ पंत ने किया हादसे का मोमेंट याद

ऋषभ पंत अपने करियर में चोटों से जूझते रहे हैं. दिसंबर 2022 में एक कार दुर्घटना में वो बेहद गंभीर रूप से घायल हो गए थे. तब ऐसा लग रहा था कि ऋषभ पंत के लिए मैदान पर लौटना काफी मुश्किल होगा, लेकिन उन्होंने शानदार वापसी की.

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ऋषभ पंत 'सलाम क्रिकेट' में अपनी राय रखते हुए. (Photo: ITG)
ऋषभ पंत 'सलाम क्रिकेट' में अपनी राय रखते हुए. (Photo: ITG)

आईसीसी पुरुष टी20 वर्ल्ड कप से पहले आजतक के खास कार्यक्रम 'सलाम क्रिकेट' दिग्गज खिलाड़ियों ने भारतीय टीम की तैयारियों पर मंथन किया. इस कार्यक्रम में टीम इंडिया के विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत ने भी हिस्सा लिया. पंत फिलहाल इंजरी के चलते क्रिकेटिंग एक्शन से दूर हैं. पंत  को न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज से पहले पेट की मांसपेशियों में गंभीर चोट लग गई थी.

ऋषभ पंत ने इस दौरान उस गंभीर कार हादसे को याद किया, जिसके चलते वो काफी दिनों तक एक्शन से दूर रहे. 30 दिसंबर 2022 को पंत सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए थे. पंत ने उस हादसे को लेकर कहा कि वो समय उनके लिए काफी बुरा था और भगवान उन्हें कुछ सिखाना चाहते थे. पंत ने ये भी कहा कि उन्होंने डिस्लोकेट हुए पैर को खुद ठीक करके लगाया था. पंत ने पिछले इंग्लैंड दौरे के दौरान पैर में लगी चोट से जुड़ी दर्दनाक कहानी को भी बयां किया. पंत ने बताया कि कैसे वो फ्रैक्चर के बावजूद मैदान पर बैटिंग करने उतर गए थे.

यह भी पढ़ें: 'नतीजा कुछ और होता...', सलाम क्रिकेट में वर्ल्ड कप 2023 में फाइनल की हार पर ऋषभ पंत का बेबाक बयान

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ऋषभ पंत कहते हैं, 'वो तो बहुत अच्छा समय नहीं था. भगवान मुझे कुछ सिखाना चाहते थे. एक युवा खिलाड़ी के तौर पर आप खुद को और बेहतर करने की कोशिश करते हैं. उसके बाद जीवन को देखने का नजरिया बदल गया. उसने काफी कुछ सिखाया है. मैं सोचा कि मेरे ही साथ ऐसा क्यों होता है, हर बार कुछ हो जाता है. मैंने पॉजिटिव लिया, निगेटिव लेकर कुछ होगा नहीं. एक घटना तो ऐसा हुआ था कि मेरा पैर बिल्कुल अंदर था और मैंने उसे ठीक कर लगयाा था. मैं वापस उसे सही किया. डॉक्टर ने कहा कि यदि मैं ऐसा नहीं करता तो उस पैर को हटाना पड़ता.'

इंडिया के लिए मैच जीतना जरूरी: पंत
ऋषभ पंत इंग्लैंड दौरे पर लगी चोट को लेकर कहते हैं, 'फर्स्ट इनिंग्स उस समय काफी महत्वपूर्ण थी क्योंकि सीरीज पूरी तरह खुली हुई थी. कोई कसर बाकी नहीं रखना है, ये हमारा सोचने का प्रोसेस था. चोट लगी तो दर्द के अलावा माइंड में कुछ भी नहीं आया. हॉस्पिटल गया, लोगों से बातचीत की. दूसरी इनिंग्स में हमने कमबैक किया, लेकिन फर्स्ट इनिंग्स के दौरान हम गेम में पीछे थे. आपको पता है कि फुल फ्रैक्चर है. मेरा लास्ट फिंगर पूरी तरह स्नैप हो गया था. डॉक्टर ने कहा कि सबसे खराब स्थिति ये हो सकती है कि सर्जरी करनी पड़े. ऐसे में 3-4 हफ्ते अतिरिक्त लग सकते थे. मेरे दिमाग में वो समीकरण बाद के लिए था. पहले तो ये था कि इंडिया के लिए मैच जीतना या बचाना जरूरी है. आप कितनी भी ज्यादा प्लानिंग कर लें, लेकिन ये नहीं पता रहता है कि अगले घंटे में क्या होने वाला है.'

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ऋषभ पंत ने बताया, 'एक ये होता है कि आप मैच में आगे हो, तो कुछ सोच-विचार कर सकते हैं, लेकिन यदि भारतीय टीम नीचे है और आप अपनी क्षमता के अनुसार जो कर सकते हैं, तो उसको करना पड़ता है कभी-कभार. वो सारी फीलिंग मेरे अंदर थी. इंडियन डाक्टर थे और उन्होंने काफी मदद की. ग्राउंड पर आते थे और पेन किलर के इंजेक्शन देते थे. प्लास्टर पहले दिन किया था, लेकिन फिर उसे हटवाया. प्लास्टर होने पर आप जूते नहीं पहन सकते.'

ऋषभ पंत ने कहा, 'जब भी मैदान पर रहते हैं, हम जीतना चाहते हैं, विपक्षी टीम भी जीतने के उद्देश्य से उतरती है. बेस्ट उस समय वही हो सकता था. कहना आसान है, करना मुश्किल होता है. टेस्ट तो देने पड़ते हैं, मेरे लाइफ में भी ऐसा टेस्ट देना लिखा था. जो भी टेस्ट होता है उससे गुजरना होता है, बस भरोसा रखना पड़ता है. कोई अच्छा बोले या बुरा बोले, वो हमारे नियंत्रण में नहीं होता है. मैंने अपनी मां से कहा कि आप निश्चिंत रहें,  मैं बताउंगा कि खेलना है या नहीं. मेरी मेहनत ही सब कुछ तय करेगी.'

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