तारीख 13 जुलाई 2002 जगह इंग्लैंड का ऐतिहासिक लॉर्ड्स मैदान. भारत बनाम इंग्लैंड नेटवेस्ट सीरीज का फाइनल. खचाखच भरे स्टेडियम में जब जहीर खान और मोहम्मद कैफ ने विनिंग रन पूरा किया तो मानो मैदान में बिजली सी दौड़ गई. एंड्रयू फ्लिंटॉफ तो हताश होकर पिच पर ही बैठ गए, लेकिन भारत मैच जीत चुका था. बालकनी में मौजूद तत्कालीन कप्तान सौरव गांगुली टी-शर्ट लहरा रहे थे. ये वो मैच था, जब भारत ने दिखाया कि वो न सिर्फ विदेशों में खेल सकता है बल्कि जीत भी सकता है. अगर कहें कि वर्ल्ड क्रिकेट में भारत की दादागिरी इस मैच से शुरू हुई तो गलत नहीं होगा.
कोहली सेना के पास 17 साल बाद एक बार फिर लॉर्ड्स की बालकानी में 'दादागीरी' दिखाने का मौका था, लेकिन आईसीसी वर्ल्ड कप-2019 के सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड ने भारत को पटखनी देकर उसके वर्ल्ड कप जीतने के मंसूबे पर पानी फेर दिया. इस वर्ल्ड कप में टीम इंडिया ने धमाकेदार शुरुआत की थी, लेकिन सेमीफाइनल में ऐसी चूक हुई जिससे सारी उम्मीदें धरी की धरी रह गईं. भारत की इस हार से फैन्स के साथ क्रिकेट के दिग्गज भी निराश हैं. अगर भारतीय टीम वर्ल्ड कप के फाइनल में होती तो 14 जुलाई का ऐसा नजारा दोबारा देखने को मिल सकता था.
The 2002 rewind: On this day, a moment in history. #TeamIndia clinched the NatWest Series at Lord's 😎👌🏻 pic.twitter.com/ISfePGAyK5
— BCCI (@BCCI) July 13, 2019
शुरू हुआ आक्रामक क्रिकेट का दौर...
13 जुलाई 2002 को सौरव गांगली की अगुवाई में भारतीय टीम नेटवेस्ट ट्रॉफी का फाइनल खेल रही थी. टीम इंडिया इस मैच में 326 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी थी. डेरेन गफ, एंड्रयू फ्लिंटॉफ, एलेक्स टूडर जैसे तेज गेंदबाजों के सामने ये लक्ष्य असंभव सा लग रहा था. हालांकि भारतीय सलामी बल्लेबाजों ने पहले विकेट 106 रनों की पार्टनशिप की थी, जिससे लगने लगा कि भारत इस लक्ष्य तक पहुंच सकता है, लेकिन मैच में फिर एक मोड़ आया जब भारत ने 146 रन पर 5 विकेट खो दिए थे. यहां से जीत की राह मुश्किल हो चुकी थी. तभी मोहम्मद कैफ और युवराज सिंह ने ऐसी साझेदारी की, जो क्रिकेट में इतिहास बन गया.
दोनों बल्लेबाजों ने 5वें विकेट के लिए शतकीय साझेदारी कर मैच का रूख बदल दिया. 267 रन के स्कोर पर युवराज सिंह (69) को कॉलिंगवुड ने चलता कर भारतीय खेमे में सन्नाटा पैदा कर दिया था. लेकिन कैफ तो किसी और इरादे के साथ लॉर्ड्स के मैदान पर उतरे थे. युवराज के आउट होने के बाद उन्होंने हरभजन सिंह के साथ मोर्चा संभाला. दोनों के बीच अर्धशतकीय साझेदारी हुई, लेकिन 48वें ओवर में फ्लिंटॉफ ने हरभजन और कुंबले को आउट कर मैच फिर इंग्लैंड की ओर मोड़ दिया. हालाांकि कैफ और जहीर खान मैदान से तभी लौटे जब भारत ने लक्ष्य हासिल कर लिया.
गांगुली ने क्यों लहराई थी शर्ट?
3 फरवरी 2002 को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में भारत-इंग्लैंड के बीच एक मुकाबला हुआ था. इस मैच में इंग्लैंड ने भारत को हरा दिया था. पहले बल्लेबाजी करते हुए इंग्लैंड ने सभी विकेट खोकर 255 रन बनाए थे. जवाब में भारतीय टीम 250 पर ऑलआउट हो गई थी. इस मैच में एंड्रयू फ्लिंटॉफ ने जीत के बाद टी-शर्ट उतारकर जश्न मनाया था. फ्लिंटॉप के जीत के जश्न का जवाब सौरव गांगुली ने 13 जुलाई 2002 में नेटवेस्ट ट्रॉफी के फाइनल में दिया था. गांगुली ने लॉर्ड्स की बालकानी से शर्ट लहराकर वानखेड़े का बदला लिया था.