आईपीएल में दिल्ली कैपिटल्स के सलामी बल्लेबाज केएल राहुल ने स्वीकार किया कि अपने करियर के शुरुआती वर्षों में उन्हें कभी भी एक मजबूत टी20 खिलाड़ी के रूप में नहीं देखा गया. उन्होंने कहा कि उन्हें खुशी है कि उन्होंने अपने व्हाइट-बॉल गेम को लेकर बनी धारणा को बदल दिया, खासकर स्ट्राइक रेट और अप्रोच को लेकर हुई आलोचनाओं के बाद.
राहुल इस समय चल रहे आईपीएल सीजन में शानदार फॉर्म में हैं. राहुल ने 2022 के बाद से भारत के लिए कोई टी20 इंटरनेशनल मैच नहीं खेला है, लेकिन वह वनडे और टेस्ट टीम के अहम सदस्य बने हुए हैं. जियोस्टार के शो ‘Superstars’ में बात करते हुए राहुल ने अपने व्हाइट-बॉल क्रिकेट के सफर पर विचार किया और बताया कि केवल रेड-बॉल बल्लेबाज़ की छवि से बाहर निकलना कितना मुश्किल था.
उन्होंने कहा, दस साल पहले, मैं टी20 टीम का हिस्सा बनने के लिए कुछ भी कर देता. मुझे कभी टी20 खिलाड़ी के रूप में रेट नहीं किया गया और न ही एक अच्छे व्हाइट-बॉल खिलाड़ी के रूप में देखा गया. मुझे सिर्फ टेस्ट खिलाड़ी कहा जाता था.
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राहुल का छलका दर्द
केएल राहुल ने आगे कहा कि इस छवि से बाहर निकलना, अपने व्हाइट-बॉल गेम को विकसित करना और यहां तक पहुंचना मेरे लिए गर्व की बात है. इस दौरान मैंने गलतियां भी कीं और कई चीजें बेहतर कर सकता था. हुल ने कहा कि अपने करियर के उतार-चढ़ाव के बावजूद उन्होंने हमेशा अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की है. 4 वर्षीय राहुल ने यह भी कहा कि उन्होंने कठिन समय में संतुलन बनाए रखना सीख लिया है.
राहुल ने कहा कि पिता बनने से उनके क्रिकेट खेलने के तरीके में भी बदलाव आया है और उन्होंने ज्यादा सोचना बंद कर दिया है. उन्होंने कहा कि मैं अब खेल के बारे में ज्यादा नहीं सोचता, जिससे यह फिर से रोमांचक हो गया है. जब मैं 4-5 घंटे मैदान पर होता हूं, तो पूरी तरह फोकस रहता हूं और बस खेल का आनंद लेता हूं और अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करता हूं.