इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 में गुरुवार (7 मई) को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) और लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) के बीच हुए मुकाबले में प्रिंस यादव ने अपनी गेंदबाजी से सबका ध्यान खींचा. एलएसजी के युवा तेज गेंदबाज प्रिंस ने ऐसी खतरनाक गेंद डाली, जिसने महान बल्लेबाज विराट कोहली को सन्न कर दिया. टीम इंडिया के पूर्व कप्तान कोहली उस गेंद पर पूरी तरह चकमा खा गए और क्लीन बोल्ड होना पड़ा.
वैसे इस विकेट से ज्यादा चर्चा विराट कोहली के रिएक्शन की होने लगी. आउट होने के बाद विराट बार-बार पिच को देखते नजर आए. अब इसी रिएक्शन को लेकर पूर्व भारतीय क्रिकेटर संजय मांजरेकर ने दिलचस्प विश्लेषण किया है और इसकी तुलना मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर से की है.
प्रिंस यादव ने शानदार सीम पोजीशन के साथ गेंद फेंकी, जो पिच पर पड़ने के बाद तेजी से अंदर आई और विराट कोहली का ऑफ स्टम्प उखाड़ गई. गेंद इतनी बेहतरीन थी कि विराट कुछ पल के लिए पूरी तरह हैरान नजर आए. क्लीन बोल्ड होने के बाद वह पिच को घूरते दिखे, जैसे समझने की कोशिश कर रहे हों कि आखिर गेंद इतनी अंदर कैसे आ गई.
संजय मांजरेकर ने विराट कोहली के इसी रिएक्शन को महान बल्लेबाजों की मानसिकता से जोड़ दिया. मांजरेकर ने कहा कि यही चीज सचिन तेंदुलकर में भी देखने को मिलती थी, खासकर उनके करियर के आखिरी दौर में. उनके मुताबिक जब महान बल्लेबाज आउट होते हैं, तो वे तुरंत खुद को गलत नहीं मानते.
संजय मांजरेकर ने अपने इंस्टग्राम चैनल पर कहा, 'जब विराट कोहली आउट हुए तो उन्होंने तुरंत पिच की तरफ देखा, जैसे वहां कुछ गड़बड़ हुई हो. सचिन तेंदुलकर भी ऐसा करते थे. महान बल्लेबाजों का आत्मविश्वास इतना मजबूत होता है कि वे तुरंत खुद को दोष नहीं देते. यही आत्मविश्वास उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाता है.'
संजय मांजरेकर के मुताबिक साधारण खिलाड़ी आउट होने के बाद तुरंत अपना आत्मविश्वास खो देते हैं, लेकिन विराट कोहली और सचिन तेंदुलकर जैसे खिलाड़ी ऐसा नहीं करते. उनका मानना है कि महान बल्लेबाज असफलता को अलग तरीके से लेते हैं. वे एक खराब गेंद या एक खराब पल से अपना आत्मविश्वास टूटने नहीं देते और यही उनकी सबसे बड़ी ताकत होती है.
संजय मांजरेकर के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस शुरू हो गई. कुछ फैन्स ने उनकी बात से सहमति जताई और कहा कि महान खिलाड़ियों की सोच सच में अलग होती है. वहीं कुछ का मानना था कि विराट सिर्फ उस गेंद से हैरान थे या शायद यह दिखाना चाह रहे थे कि गेंद असाधारण थी.