आईपीएल 2026 में चेन्नई सुपर किंग्स के लगातार खराब प्रदर्शन के बीच टीम के मुख्य कोच स्टीफन फ्लेमिंग पर सवाल उठने लगे हैं. भारत के पूर्व ओपनर सदागोप्पन रमेश ने फ्लेमिंग की कोचिंग क्षमता पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी सफलता काफी हद तक एमएस धोनी की कप्तानी पर निर्भर रही है.
चेन्नई सुपर किंग्स की गिरती स्थिति ने इस बहस को और तेज कर दिया है. 2025 में आखिरी स्थान पर रहने के बाद पांच बार की चैम्पियन टीम ने आईपीएल 2026 की शुरुआत लगातार तीन हार के साथ की है. बेंगलुरु में आरसीबी के खिलाफ मिली बड़ी हार के बाद टीम अंक तालिका में सबसे नीचे पहुंच गई है.
फ्लेमिंग पर रमेश ने साधा निशाना
रमेश ने कहा, फ़्लेमिंग को कभी भी कहीं सफलता नहीं मिली, जब धोनी टीम के कप्तान नहीं थे. यह साफ है कि उनकी सफलता पूरी तरह धोनी पर निर्भर रही है. जिस तरह खिलाड़ियों की फिटनेस का विश्लेषण किया जाता है, उसी तरह कोच को भी उसी कसौटी पर परखा जाना चाहिए.
उन्होंने आगे कहा, स्टीफन फ़्लेमिंग के पास आज के आक्रामक क्रिकेट के हिसाब से सोच नहीं दिखती. वह खेल के बदलते अंदाज से पांच कदम पीछे नजर आते हैं.
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सीएसके के हालिया पतन के आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले हैं. आईपीएल 2024 से पहले कप्तानी ऋतुराज गायकवाड़ को सौंपे जाने के बाद टीम का बदलाव सफल नहीं रहा. टीम प्लेऑफ में जगह बनाने में नाकाम रही और 2025 में आखिरी स्थान पर रही.
2009 से टीम के साथ जुड़े फ़्लेमिंग ने धोनी के दौर में सीएसके को पांच आईपीएल खिताब दिलाए. लेकिन कप्तान-कोच की यह सफल जोड़ी टूटने के बाद टीम की कमजोरियां खुलकर सामने आने लगी हैं.
फ़्लेमिंग-सीएसके के साथ क्या गलत हो रहा है?
आईपीएल 2026 में सीएसके की समस्याएं कई स्तरों पर दिखाई दी हैं. टीम की रणनीति और प्रदर्शन दोनों ही सवालों के घेरे में हैं. गेंदबाजी यूनिट, खासकर डेथ ओवरों में, बड़ी चिंता बन गई है. टीम लगातार महंगे ओवर डाल रही है और मैच खत्म करने में नाकाम हो रही है. ऐसे दौर में जब टी20 क्रिकेट पावर-हिटिंग और आक्रामक बल्लेबाजी पर आधारित हो गया है, सीएसके का रवैया काफी पिछड़ा हुआ नजर आता है.
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टीम के स्क्वॉड और ऑक्शन रणनीति पर भी सवाल उठ रहे हैं. सीएसके के पास वैसी विस्फोटक बल्लेबाजी नहीं दिखती, जो आधुनिक टी20 क्रिकेट में बेहद जरूरी हो गई है.
इसके अलावा, बदलते क्रिकेट ट्रेंड्स के साथ तालमेल नहीं बैठा पाना भी टीम की सबसे बड़ी कमजोरी बनकर सामने आया है. जहां दूसरी फ्रेंचाइजी हाई-रिस्क और हाई-रिवॉर्ड क्रिकेट खेल रही हैं, वहीं सीएसके अब भी पुराने और ज्यादा सतर्क तरीके पर अटकी हुई दिखती है.