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जब राहुल द्रविड़ ने रामचंद्र गुहा से कहा कि वो इतिहास पर ध्यान दें, क्रिकेट वो खुद संभाल लेंगे

एक अजीब इत्तेफाक के चलते, द्रविड़ से मेरी सभी मुलाकात हवाई अड्डों पर ही हुई हैं. एक बार, जब वो कर्नाटक और इंडिया, दोनों के कप्तान थे, मैंने एक एयरलाइन स्ट्यूवर्डेस के सामने (बेहद सौम्यता के साथ) उलाहना दिया कि फ्रेंड्स युनियन क्रिकेट क्लब के एक बेहतरीन ऑल-राउंडर पर सेलेक्टर्स ध्यान ही नहीं दे रहे थे.

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स्टोरी हाइलाइट्स
  • रामचंद्र गुहा की किताब में हैं क्रिकेट की कई कहानियां.
  • राहुल द्रविड़ ने रामचंद्र गुहा से कहा कि वो इतिहास पर ध्यान दें, क्रिकेट वो खुद संभाल लेंगे. 

रामचंद्र गुहा की किताब में हैं क्रिकेट की कई कहानियां. किताब के इस हिस्से में वो कहानी जब राहुल द्रविड़ ने रामचंद्र गुहा से कहा कि वो इतिहास पर ध्यान दें, क्रिकेट वो खुद संभाल लेंगे. 

अगर मेरी याद्दाश्त ठीक है तो मैंने द्रविड़ से पहली बार इंडिया और पाकिस्तान के बीच 2005 में हुए टेस्ट मैच से एक शाम पहले हाथ मिलाया था. उस वक्त तक रिटायर हो चुके जवागल श्रीनाथ ने एक छोटी-सी स्पीच दी थी और जिसे वो ‘जीता जागता लेजेंड’ कहते थे, उससे उन्होंने अगले दिन अपने शहर के दर्शकों के सामने शतक मारने को कहा. द्रविड़ ऐसा नहीं कर सके. उनका चिन्नास्वामी पर रिकॉर्ड एकदम वैसा ही है जैसा सचिन का लॉर्ड्स पर है. लेकिन चूंकि उन्होंने दुनिया भर में इतने शतक मारे हैं कि वो हमेशा इस शहर के प्यारे रहे.

एक अजीब इत्तेफाक के चलते, द्रविड़ से मेरी सभी मुलाकात हवाई अड्डों पर ही हुई हैं. एक बार, जब वो कर्नाटक और इंडिया, दोनों के कप्तान थे, मैंने एक एयरलाइन स्ट्यूवर्डेस के सामने (बेहद सौम्यता के साथ) उलाहना दिया कि फ्रेंड्स युनियन क्रिकेट क्लब के एक बेहतरीन ऑल-राउंडर पर सेलेक्टर्स ध्यान ही नहीं दे रहे थे. एक और मौके पर हम जिस दिन चेक-इन काउंटर पर मिले, एक ऐसे लेखक को पद्म भूषण मिला था जिसे हम दोनों जानते थे. द्रविड़ को इस बात का आश्चर्य हुआ कि उस लेखक को उससे पहले पद्म श्री क्यों नहीं मिला था (ये एक ऐसी चीज़ है जो शायद कोई और भारतीय क्रिकेटर नहीं पकड़ पाता).

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उस दिन हम एक ही फ्लाइट में थे लेकिन मैं बिजनेस क्लास में था और द्रविड़ इकॉनमी क्लास में. ऐसा इसलिए हुआ था क्योंकि जहां मैं कुछ कम्पनी एग्जेक्यूटिव्स को सम्बोधित करने जा रहा था वहीं द्रविड़ कर्नाटक की रणजी टीम के साथ यात्रा कर रहे थे. मुझे बड़ा ही अजीब लगा और जैसे ही जहाज का पेटी बांधे रखने वाला निशान बुझा, मैं उठकर पीछे गया. मैंने देखा कि फास्ट बॉलर आर विनय कुमार अपनी सीट में बैठे हुए उछल रहा था क्योंकि उसके कानों में रॉक म्यूजिक बज रहा था. वहीं उसके ठीक बगल में मेरे राज्य या मेरे देश के लिए खेलने वाला सबसे अक्लमन्द खिलाड़ी बैठा हुआ नंदन नीलेकनी की हाल ही में छपी किताब इमेजिनिंग इंडिया के पन्नों में डूबा हुआ था.

रामचंद्र गुहा
रामचंद्र गुहा

द्रविड़ ने एक बार मेरी भी किताब पढ़ी थी जिसके बारे में मुझे बेहद मजेदार तरीके से मालूम पड़ा था. 2007 में इंडिया इंग्लैंड में एक वन-डे सीरीज खेल रही थी. द्रविड़ हमारे कप्तान थे लेकिन वो अब विकेटकीपिंग नहीं करते थे (धोनी करते थे)। आप द्रविड़ से स्लिप में खड़े होने की अपेक्षा रखते हैं लेकिन उन्होंने ख़ुद को मिड-ऑफ पर रखा हुआ था. शायद उन्हें बॉलर से बात करने में आसानी होती होती थी और मैदान पर जो चल रहा था, उसकी एकदम साफ तस्वीर देख सकते थे. एक ऐसे मैच के बाद, जिसमें स्लिप्स में दो या तीन कैच गिरे थे, मैंने बैंगलोर में अपने घर से भारतीय कप्तान को खत लिखा :

प्रिय राहुल,
आप भारतीय क्रिकेट के इतिहास में शायद सबसे कमाल के टेस्ट बैट्समैन हैं और बिना शक़ किसी भी फॉरमैट में स्लिप्स में खड़े होने वाले सबसे बेहतरीन फील्डर हैं. आपको वहीं फील्डिंग करनी चाहिए. मुझे ये समझ में आता है कि अपनी गेंदबाजी में कुछ अस्थिरता के चलते आप गेंदबाजों के नजदीक रहते हुए उन्हें समझाना पसन्द करते हैं. लेकिन इन सभी बातों को देखते हुए भी मुझे यही लगता है कि स्लिप ही आपके लिए सबसे अच्छी जगह है. उस पोजीशन पर फील्डिंग करने के मामले में भारत में कोई भी आपके आस-पास भी नहीं आता है और इसीलिए शुरुआती ओवरों में इतने कैच छूटते हैं.
    शुभकामनाओं के साथ
    राम

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दो या तीन दिन में उनका जवाब आया. जवाब मेरे अनुरोध के बारे में नहीं था बल्कि मुझे ये बताया गया था कि उन्होंने मेरी वो किताब पढ़ी है जो हाल ही में मैंने स्वाधीन भारत के इतिहास पर लिखी थी. भारतीय कप्तान ने लिखा था, ‘आप एकदम ठीक कह रहे थे. हमारा इतिहास गांधी पर रुका हुआ मालूम देता है और असल में तबसे लेकर अभी 60 साल बाद तक इतना कुछ हो चुका है जिसकी बदौलत हम जहां हैं, वहां हैं. मैंने करीब 180 पन्ने पढ़े हैं और अभी बहुत कुछ पढ़ना है. मुझे अच्छा लगेगा अगर कभी हम इसके बारे में बात करें.’

द्रविड़ को मेरा भेजा गया मेल बगैर उनकी जानकारी के, बगैर किसी ठोस वजह के भेजा गया था. क्रिकेटीय शब्दों में बात करूं तो यूं समझिये कि किसी मध्यम गति के गेंदबाज ने बाउंसर डाली हो और बल्लेबाज ने कलाइयों के सहारे उसे बाउंड्री की राह दिखा दी हो. उन्होंने जिस तरह से मुझे धराशायी किया था, वो लाजवाब था लेकिन इसके लिए उन्होंने बेहद नाजुक शब्दों का चुनाव किया था. उन्होंने मुझे बेहद सौम्य तरीके से ये बता दिया था कि मुझे क्रिकेट की रणनीति के बारे में अपना मुंह बन्द रखना चाहिए और इतिहास की किताबें लिखने की ओर लौट जाना चाहिए. (मैंने ऐसा ही किया भी.)

पुस्तक – क्रिकेट का कॉमनवेल्थ
लेखक – रामचंद्र गुहा
अनुवादक- केतन मिश्रा
प्रकाशक – हार्पर कॉलिन्स
भाषा ‏-‎ हिंदी
मूल्य – किंडल एडिशन 339 रुपये; पेपरबैक 399 रुपये

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