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साहित्य तक टॉप 10- उपन्यासः सियासत, इतिहास, पुराण और प्रेम के बीच अपराध और व्यंग्य ने भरी उछाल

साल का आखिरी दिन है और बुक कैफे की टॉप 10 पुस्तकों की इस कड़ी में आज लोकप्रिय उपन्यासों की चर्चा हुई है.

साल 2021 में इन उपन्यासों ने हिला दिया साल 2021 में इन उपन्यासों ने हिला दिया

साल का आखिरी दिन है और बुक कैफे की टॉप 10 पुस्तकों की इस कड़ी में आज उपन्यास की चर्चा हुई है. खास बात यह कि उपन्यासों की इस सूची में लोकप्रिय साहित्य ने गंभीर साहित्य को जमकर टक्कर दी है. यहां नई वाली हिंदी भी पीछे नहीं है, तो इनमें सामाजिक सरोकारों और अपने समय को दर्ज करती कृतियां भी हैं. खास बात यह कि सियासत, समाज, इतिहास, पुराण और प्रेम की पृष्ठभूमि पर लिखी गई कृतियों के बीच अपराध और व्यंग्य ने भी खासी उछाल भरी है.

साहित्य आजतक के साहित्य को समर्पित डिजिटल चैनल 'साहित्य तक' पर 'बुक कैफे' के तहत पुस्तक चर्चा की एक कड़ी इसी साल जनवरी में शुरू हुई थी. तब हमने कहा था- एक ही जगह बाजार में आई नई किताबों की जानकारी मिल जाए, तो किताबें पढ़ने के शौकीनों के लिए इससे लाजवाब बात क्या हो सकती है? अगर आपको भी है किताबें पढ़ने का शौक, और उनके बारे में है जानने की चाहत, तो आपके लिए सबसे अच्छी जगह है साहित्य तक का 'बुक कैफे', जहां आपको हर बार नई पुस्तकों की जानकारी मिलेगी.

इस शुरुआत के पीछे इंडिया टुडे समूह की सोच थी कि कोरोना महामारी के चलते अवरुद्ध हो गई पुस्तक संस्कृति के विकास को बढ़ावा दिया जाए. हमारा लक्ष्य इन शब्दों में साफ दिख रहा था- "आखर जो छपकर हो जाते हैं अमर... जो पहुंचते हैं आपके पास किताबों की शक्ल में...जिन्हें पढ़ आप हमेशा कुछ न कुछ पाते हैं, गुजरते हैं नए कथा लोक में. पढ़ते हैं, कविता, नज़्म, ग़ज़ल, निबंध, राजनीति, इतिहास या फिर उपन्यास...जिनसे पाते हैं जानकारी दुनिया-जहान की और करते हैं छपे आखरों के साथ ही एक यात्रा अपने अंदर की. साहित्य तक के द्वारा 'बुक कैफे' में हम आपकी इसी रुचि में सहायता करने की एक कोशिश कर रहे हैं."

आरंभ में इस कार्यक्रम के तहत किताबों पर साप्ताहिक राय रखी गई पर बाद में पुस्तक प्रेमियों के अनुरोध पर इसे 'एक दिन एक किताब' के नाम से दैनिक कर दिया गया. अब जब साल 2021 बीत रहा, तब उन्हीं किताबों में से टॉप 10 पुस्तकें चुनी गई हैं. साहित्य तक किसी भी रूप में इन्हें कोई रैंकिंग करार नहीं दे रहा. संभव है कुछ बेहतरीन पुस्तकें हम तक पहुंची ही न हों, या कुछ पुस्तकों की चर्चा रह गई हो. फिर भी पूरी पारदर्शिता से साहित्य तक ने अनुवाद, कथेतर, कथा, उपन्यास और कविता के क्षेत्र से साल 2021 की टॉप 10 पुस्तकों का चयन किया है. हिंदी कथा के क्षेत्र में जिन टॉप 10 उपन्यासों ने अपनी जगह बनाई है, वे हैं-

रामभक्त रंगबाज, राकेश कायस्थ, समकालीन इतिहास की पेंचदार गलियों में खोती मासूम आस्था और शातिर सियासत की धार पर परवान चढ़ती सांप्रदायिकता के बीच कभी न टूटने वाले नेह-बंधन को उजागर करता उपन्यास. प्रकाशक- हिन्द युग्म प्रकाशन

* स्वाँग, ज्ञान चतुर्वेदी.  नाटक, नौटंकी, रामलीला से इतर बुंदेलखंड की लोकप्रिय लोकनाट्य विधा के बहाने देश की सामाजिक, सियासी और कानू्नी व्यवस्था और तंत्र के विराट स्वांग में तब्दील हो जाने की विराट कहानी बेहद सधी शैली में. प्रकाशक- राजकमल प्रकाशन

* ख़ानज़ादा, भगवानदास मोरवाल. तुग़लक़, सादात, लोदी, और मुग़ल सल्तनतों से लोहा लेनेवाले मेवातियों की शौर्यगाथा. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर लिखा दस्तावेजी उपन्यास, जो हिन्दू अस्मिता और मुस्लिम आक्रान्ताओं के बीच फंसे समाज में धर्म-परिवर्तन की प्रकृति और उद्देश्य का भी कुछ संकेत देता है. प्रकाशक- राजकमल प्रकाशन.

पिशाच, संजीव पालीवाल. तेजी से भागती अपराध कथा, जो साहित्य-जगत के पिशाच के बहाने मीडिया जगत में पनपते प्रेम संबंधों को भी उजागर करती है. लव, क्राइम और सस्पेंस का ऐसा कथानक, जो साल के सर्वाधिक चर्चित उपन्यासों में शुमार होने के साथ अपराध कथा जगत को नई ऊंचाइयां दे सकता है. प्रकाशक- एका वेस्टलैंड.
 
*   कंथा, श्याम बिहारी श्यामल, मूर्धन्य साहित्यकार जयशंकर प्रसाद के 'तुमुल कोलाहल' भरे जीवन की कहानी, जिसमें भारतेंदु हरिश्चंद्र, मदन मोहन मालवीय, हजारी प्रसाद द्विवेदी, प्रेमचन्द, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, सहाय, महादेवी वर्मा और रामचन्द्र शुक्ल जैसी साहित्यिक विभूतियों के चरित्र के साथ अपने समय को भी दर्शाता है. प्रकाशक- राजकमल प्रकाशन.  

* यार जादूगर, नीलोत्पल मृणाल. मृत्यु के महोत्सव और जीवन के लोक संगीत को उजागर करती कथा-कृति, जो मृत्यु की अनिवार्यता को मानकर जीवन की सार्थकता को मलंग जैसा स्वीकार करने का संदेश देती है और यह सीख भी कि प्रकृति के नियमों में छेड़छाड़ उचित नहीं. प्रकाशक- हिन्द युग्म प्रकाशन.

* कल्किः दसवें अवतार का उदय', आशुतोष गर्ग एवं अत्रि गर्ग. कोरोना वायरस की तबाही के बीच भारतीय जीवन-दर्शन, पौराणिक पृष्ठभूमि पर आधारित ऐसा साइंस फिक्शन, जो महामारियों को भगवान विष्णु के दसवें अवतार कल्कि से जोड़ता है, और यह संदेश देता है कि नियती के सामने मनुष्य की अपनी सीमाएं हैं. प्रकाशक- प्रभात प्रकाशन.

सोफ़िया, मनीषा कुलश्रेष्ठ. एक विरल प्रेम कथा, जो समाज की अनीति भरी मान्यताओं को कठघरे में खड़ा करती है और यह प्रश्न खड़ा करती है कि प्रेमी उस दुनिया को कबूल करने पर विवश क्यों हो जाता है, जैसी दूसरे लोग उसे देते हैं. आखिर मजहब के फर्क की सजा प्रेमी को कब तक. प्रकाशक- सामयिक प्रकाशन.

* CODE काकोरी, मनोज राजन त्रिपाठी. काकोरी की धरती पर घटा थ्रिल, सस्पेंस, कॉमेडी, ड्रामा से भरपूर क्राइम उपन्यास, जो यूपी की हवाओं में पनपते प्यार, पंचायत, राजनीति, जातिवाद, भ्रष्टाचार, साम्प्रदायिकता, हिंदुत्व की गाथा गढ़ व्यवस्था और माहौल पर कटाक्ष करता है. प्रकाशक- एका वेस्टलैंड.  
 
* ढाई चाल, नवीन चौधरी, धर्म, जाति, मीडिया और राजनीति के नेक्सस पर बुना गया राजनीतिक थ्रिलर, जो साजिश और सस्पेंस का एक रोमांचक संसार रचता है कि नेताओं के चरित्र अपने अपने आप उधड़ने लगते हैं. नाम के ही अनुरूप कथा-दर-कथा का तिलस्म. प्रकाशक- राधाकृष्ण का सहयोगी उपक्रम 'फंडा'.

 

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