वेट टेस्टिंग या वेट ड्रेस रिहर्सल (WDR) रॉकेट लॉन्च से पहले की एक बहुत महत्वपूर्ण प्रोसेस है. इसमें रॉकेट के फ्यूल टैंकों को पूरी तरह लिक्विड हाइड्रोजन और लिक्विड ऑक्सीजन (क्रायोजेनिक प्रोपेलेंट) से भरकर पूरे काउंटडाउन प्रोसेस का अभ्यास किया जाता है.
इसका मकसद यह देखना होता है कि टैंक, पाइपलाइन, वॉल्व, सील और ग्राउंड सिस्टम लॉन्च के समय ठीक से काम करेंगे या नहीं. यह टेस्ट रॉकेट को असली लॉन्च जैसी स्थिति में डालकर उसकी तैयारियों की जांच करता है. आमतौर पर हर बड़े मिशन से पहले यह टेस्ट किया जाता है.
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आर्टेमिस 2 में वेट टेस्टिंग क्यों नहीं की गई?
नासा ने आर्टेमिस 2 मिशन के लिए वेट ड्रेस रिहर्सल को पूरी तरह स्किप कर दिया है. मुख्य वजह यह है कि आर्टेमिस 1 (अनमैन्ड) मिशन के दौरान फ्यूलिंग सिस्टम और लॉन्च प्रक्रिया की काफी विस्तृत जांच हो चुकी थी. उसके बाद रॉकेट और ग्राउंड इक्विपमेंट में सिर्फ छोटे-मोटे बदलाव किए गए थे.

नासा के अधिकारियों का मानना है कि सिस्टम अब अच्छी तरह समझ में आ चुके हैं, इसलिए अलग से पूरे वेट टेस्ट की जरूरत नहीं रह गई. इसके अलावा, वेट टेस्टिंग में रॉकेट को बार-बार क्रायोजेनिक तापमान (बहुत ठंडा) और फिर सामान्य तापमान में लाने से टैंक, सील और पाइपलाइन पर अतिरिक्त तनाव पड़ता है.
इससे हार्डवेयर को नुकसान हो सकता है. लॉन्च में देरी बढ़ सकती है. इसलिए नासा ने फैसला किया कि आर्टेमिस 2 में पहली पूरी फ्यूलिंग सीधे लॉन्च के दिन ही की जाएगी.
क्या फ्यूल टैंक कंप्रोमाइज हुए थे?
नहीं, फ्यूल टैंक कंप्रोमाइज (क्षतिग्रस्त या कमजोर) नहीं हुए थे.
वास्तव में, फरवरी 2026 में आर्टेमिस 2 के वेट ड्रेस रिहर्सल के दौरान लिक्विड हाइड्रोजन लीक की समस्या आई थी. यह समस्या टेल सर्विस मास्ट अम्बिलिकल (रॉकेट और ग्राउंड के बीच कनेक्शन) में थी. लीक की दर बढ़ने पर टेस्ट रोक दिया गया था.

नासा ने बाद में सील बदलकर और कुछ सुधार करके समस्या को हल कर लिया. बाद के कॉन्फिडेंस टेस्ट और दूसरे वेट ड्रेस रिहर्सल में लीक दर काफी कम हो गई थी. सीमा के अंदर आ गई. इसलिए टैंक खुद में कोई बड़ी समस्या नहीं थी - समस्या मुख्य रूप से ग्राउंड सपोर्ट इक्विपमेंट और अम्बिलिकल कनेक्शन में थी. नासा ने आधिकारिक रूप से कहा कि टैंक और रॉकेट का मुख्य स्ट्रक्चर सुरक्षित है और लॉन्च के लिए तैयार है.
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नासा ने क्यों लिया यह जोखिम?
नासा का मानना है कि आर्टेमिस 1 से मिले अनुभव के आधार पर अब सिस्टम काफी बेहतरीन हो चुके हैं. बार-बार वेट टेस्टिंग से रॉकेट पर अनावश्यक तनाव डालने की बजाय सीधे लॉन्च पर फ्यूलिंग करना ज्यादा प्रैक्टिकल है. कुछ विशेषज्ञों ने इस फैसले पर सवाल उठाए थे, लेकिन नासा का कहना है कि सभी जरूरी डेटा और सुरक्षा जांच पूरी कर ली गई है.
आर्टेमिस 2 मिशन में वेट टेस्टिंग को स्किप करने का फैसला आर्टेमिस 1 के सफल टेस्ट और सिस्टम की परिपक्वता के आधार पर लिया गया. फ्यूल टैंक कंप्रोमाइज नहीं हुए थे - समस्या मुख्य रूप से लीक में थी, जिसे बाद में ठीक कर लिया गया. यह फैसला समय बचाने और रॉकेट पर तनाव कम करने के लिए था. अब मिशन सफलतापूर्वक लॉन्च हो चुका है, जो दिखाता है कि नासा की तैयारी ठीक थी.