नासा का आर्टेमिस प्रोग्राम चंद्रमा पर वापसी की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. आर्टेमिस 2 मिशन, जो SLS (Space Launch System) रॉकेट और Orion स्पेसक्राफ्ट से बनेगा, अब लॉन्च के बहुत करीब आ गया है. NASA ने 17 जनवरी 2026 को सुबह 7 बजे EST (अमेरिकी पूर्वी समय) से रॉकेट को Vehicle Assembly Building (VAB) से Launch Pad 39B की ओर ले जाने की योजना बनाई है. यह लगभग 6.4 किलोमीटर की धीमी यात्रा होगी, जो 12 घंटे तक चल सकती है.
क्या है आर्टेमिस II मिशन?
आर्टेमिस II NASA का पहला मानवयुक्त मिशन है, जिसमें चार अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के चारों ओर उड़ान भरेंगे. यह Apollo 17 (1972) के बाद पहली बार होगा जब इंसान चंद्रमा के पास जाएंगे. मिशन में कोई चंद्रमा लैंडिंग नहीं होगी, बल्कि यह 10 दिनों का टेस्ट फ्लाइट होगा, जिसमें Orion स्पेसक्राफ्ट की क्षमताओं का परीक्षण किया जाएगा.
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क्रू में शामिल हैं
Reid Wiseman (कमांडर, NASA)
Victor Glover (पायलट, NASA)
Christina Koch (मिशन स्पेशलिस्ट, NASA)
Jeremy Hansen (मिशन स्पेशलिस्ट, Canadian Space Agency)
यह मिशन आर्टेमिस प्रोग्राम का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य 2020 के दशक के अंत तक चंद्रमा पर इंसानों को उतारना और बाद में मंगल पर जाना है.
SLS रॉकेट और Orion स्पेसक्राफ्ट क्या हैं?
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रोलआउट क्या है और कैसे होगा?
रोलआउट मतलब रॉकेट को असेंबली बिल्डिंग से लॉन्च पैड तक ले जाना. NASA का Crawler-Transporter 2 (एक बहुत बड़ा वाहन) इस 11 मिलियन पाउंड के स्टैक को 1.6 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ले जाएगा. मौसम या तकनीकी कारणों से 6 से 12 घंटे लग सकते हैं.
ये इवेंट NASA के YouTube चैनल पर लाइव स्ट्रीम होंगे.
आगे क्या होगा?
रोलआउट के बाद रॉकेट पैड पर पहुंचेगा. फिर अंतिम तैयारी होगी, जिसमें Wet Dress Rehearsal (ईंधन भरकर टेस्ट) शामिल है, जो जनवरी के अंत में होगा. अगर जरूरत पड़ी तो रॉकेट को वापस VAB में लाया जा सकता है.
लॉन्च विंडो फरवरी 2026 से शुरू होगी – सबसे पहले 6 फरवरी से. लेकिन फाइनल लॉन्च डेट टीम की तैयारियों, क्रू सेफ्टी और ऑर्बिटल कंडीशंस पर निर्भर करेगी. अगर सब ठीक रहा तो फरवरी में लॉन्च हो सकता है, वरना अप्रैल तक जा सकता है. यह मील का पत्थर है, क्योंकि आर्टेमिस II से NASA चंद्रमा पर स्थाई उपस्थिति और मंगल मिशन की नींव रख रहा है.