Chaitra Navratri 2024 Samagri: नवदुर्गा की उपासना का पर्व यानी चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ 9 अप्रैल को होने वाला है. 17 अप्रैल को महानवमी के साथ इसका समापन होगा. इन नौ दिन में हर दिन मां अपने अलग-अलग स्वरूपों में आकर आपको वरदान देती है. चैत्र नवरात्रि में आप पूरे नौ दिन का भी उपवास रख सकते हैं और पहले व आखिरी नवरात्र का भी. नवरात्रि के पवित्र दिनों में सुबह और शाम दोनों वेला पूजा, आराधना और आरती करनी चाहिए. पूरे नौ दिन खान-पान और आचरण में सात्विकता बरतनी चाहिए. आइए चैत्र नवरात्रि के लिए आवश्यक सामग्री और मां दुर्गी के ऋृंगार से जुड़ी खास बातें बताते हैं.
चैत्र नवरात्रि 2024 पूजन सामग्री
चैत्र नवरात्रि देवी उपासना कुछ खास चीजों के बगैर अधूरी मानी जाती है. इसमें मां दुर्गा की प्रतिमा, लड़की की चौकी, चौकी पर बिछाने के लिए लाल कपड़ा, बंदनवार, शक्कर, सिंदूर,पान, सुपारी, लौंग, बताशा, हल्दी की गांठ, नैवेध, जावित्री, सोलह श्रृंगार (बिंदी, चूड़ी, तेल, कंघी, शीशा आदि), थोड़ी पीसी हुई हल्दी, आसन, कमलगट्टा, शहद, नारियल जटा वाला, सूखा नारियल, दीपक, घी, अगरबत्ती, वस्त्र, दही, पंचमेवा, गंगाजल, नवग्रह पूजन के लिए अक्षत (साबहुत), चौकी, मौली, रोली और पूजा की थाली चाहिए.
कलश स्थापना के लिए सामग्री
चैत्र नवरात्रि में कलश स्थापना के लिए मुख्य रूप से पीतल, तांबे या मिट्टी का कलश, मिट्टी का पात्र, कलावा, नारियल, छोटी लाल चुनरी, आम के पत्ते, जौ, सिंदूर, जल, दीपक, बालू या रेत, तिल का तेल या घी, मिट्टी आदि सामग्री की आवश्यकता होती है.
मां दुर्गा के श्रृंगार की सामग्री
चैत्र नवरात्र में मां दुर्गा का श्रृंगार करना आवश्यक है. इसमें लाल चुनरी, लाल चूड़ियां, पायल, नेल पेंट, लाली (लिपस्टिक),सिंदूर, बिंदी, काजल, मेहंदी, महावर, शीशा, चोटी के लिए बैंड, नथ, बिछिया, इत्र, चोटी, गले के लिए माला या मंगलसूत्र, शीशा, गजरा, मांग टीका, कान की बाली और कंघी आदि श्रृंगार की चीजें शामिल कर सकते हैं.
नवरात्रि के पहले दिन की सामग्री
नवरात्रि के पहले मां शैलपुत्री की पूजा का विधान है. मां शैलपुत्री की पूजा में गंगाजल, धूप, दीप, सिंदूर, अक्षत, सफेद फूल, सफेद मिठाई या दूध से बनी मिठाई व फल चढ़ाए जाते हैं.