शिरडी के साईं बाबा से जुड़ी उनकी चमत्कारी लीलाओं की अनेक कथाएं प्रचलित हैं. साईं बाबा की उपासना के लिए गुरुवार का दिन विशेष रूप से शुभ माना जाता है. यह व्रत मुख्य रूप से मनोकामना पूर्ति, मानसिक शांति, सुख-समृद्धि और जीवन के कष्टों से मुक्ति के लिए किया जाता है. यह व्रत किसी भी गुरुवार को साईं बाबा का स्मरण कर आरंभ किया जा सकता है. शिरडी के साईं बाबा के व्रत की संख्या 9 हो जाने पर अंतिम व्रत के दिन पांच गरीब व्यक्तियों को भोजन कराना चाहिए और दान करना चाहिए. इस तरह इस व्रत का समापन किया जाता.
एक शहर में कोकिला बहन और उनके पति महेशभाई रहते थे. दोनों में एक-दूसरे के प्रति प्रेम-भाव था, परन्तु महेशभाई का स्वभाव झगड़ालू था. दूसरी तरफ कोकिला बहन बहुत ही धार्मिक स्त्री थी, भगवान पर विश्वास रखती. धीरे-धीरे उनके पति का धंधा-रोजगार ठप हो गया. कुछ भी कमाई नहीं होती थी. महेशभाई अब दिन-भर घर पर ही रहते और अब उन्होंने गलत राह पकड़ ली. अब उनका स्वभाव पहले से भी अधिक चिड़चिड़ा हो गया.
एक दिन दोपहर को एक वृद्ध महाराज दरवाजे पर आकार खड़े हो गए. चेहरे पर गजब का तेज था और आकर उन्होंने दाल-चावल की मांग की. कोकिला बहन ने दाल-चावल दिए और दोनों हाथों से उस वृद्ध बाबा को नमस्कार किया. वृद्ध ने कहा साईं सुखी रखे. कोकिला बहन ने कहा- महाराज सुख मेरी किस्मत में नहीं है और अपने दुखी जीवन का वर्णन किया. महाराज ने श्री साईं के व्रत के बारें में बताया कि 9 गुरुवार फलाहार या एक समय भोजन करना, हो सके तो बेटा साईं मंदिर जाना, घर पर साईं बाबा की पूजा करना और व्रत रखना व विधि पूर्वक उद्यापन करना. भूखे को भोजन देना, साईं बाबा तेरी सभी मनोकामना पूर्ण करेंगे, साईं बाबा पर अटूट श्रद्धा रखना जरूरी है.
कोकिला बहन ने भी गुरुवार का व्रत लिया. 9 वें गुरुवार को गरीबों को भोजन कराया. उनके घर से कलह दूर हुए. घर में बहुत ही सुख-शांति हो गई. महेशभाई का स्वभाव ही बदल गया. उनका रोजगार फिर से चालू हो गया. थोड़े समय में ही सुख-समृधि बढ़ गई. दोनों पति-पत्नी सुखी जीवन बिताने लगे. एक दिन कोकिला बहन के जेठ-जेठानी सूरत से आए. बातों-बातों में उन्होंने बताया कि उनके बच्चे पढ़ाई नहीं करते, इसलिए परीक्षा में फेल हो गए हैं. कोकिला बहन ने 9 गुरुवार की महिमा बताई और कहा कि साईं बाबा की भक्ति से बच्चे अच्छी तरह अभ्यास कर पाएंगे. लेकिन इसके लिए साईं बाबा पर विश्वास रखना जरूरी है. साईं सबकी सहायता करते हैं. उनकी जेठानी ने व्रत की विधि बताने के लिए कहा. कोकिला बहन ने कहा उन्हें वह सारी बातें बताईं, जो खुद उन्हें वृद्ध महाराज ने बताई थी.
सूरत से उनकी जेठानी का थोड़े दिनों में पत्र आया कि उनके बच्चे साईं व्रत करने लगे हैं और बहुत अच्छे तरह से पढ़ते हैं. उन्होंने भी व्रत किया था. इस बारे में उन्होंने लिखा कि उनकी सहेली की बेटी की शादी साईं व्रत करने से बहुत ही अच्छी जगह तय हो गई. उनके पड़ोसी का गहनों का डिब्बा गुम हो गया था, जो अब वापस मिल गया है. ऐसे कई अद्भुत चमत्कार हुए थे. कोकिला बहन को महसूस हुआ कि साईं बाबा की महिमा अपार है.
!! साईं बाबा की आरती !!
आरती श्री साईं गुरुवर की, परमानन्द सदा सुरवर की ।
जा की कृपा विपुल सुखकारी, दु:ख शोक, संकट, भयहारी ॥
आरती श्री साईं गुरुवर की, परमानन्द सदा सुरवर की ।
शिरडी में अवतार रचाया, चमत्कार से तत्व दिखाया ।
कितने भक्त चरण पर आये, वे सुख शान्ति चिरंतन पाये ॥
आरती श्री साईं गुरुवर की, परमानन्द सदा सुरवर की ।
भाव धरै जो मन में जैसा, पावत अनुभव वो ही वैसा ।
गुरु की उदी लगावे तन को, समाधान लाभत उस मन को ॥
आरती श्री साईं गुरुवर की, परमानन्द सदा सुरवर की ।
साईं नाम सदा जो गावे, सो फल जग में शाश्वत पावे ।
गुरुवासर करि पूजा-सेवा, उस पर कृपा करत गुरुदेवा ॥
आरती श्री साईं गुरुवर की, परमानन्द सदा सुरवर की ।
राम, कृष्ण, हनुमान रुप में, दे दर्शन, जानत जो मन में ।
विविध धर्म के सेवक आते, दर्शन कर इच्छित फल पाते ॥
आरती श्री साईं गुरुवर की, परमानन्द सदा सुरवर की ।
जै बोलो साईं बाबा की, जै बोलो अवधूत गुरु की ।
‘साईंदास’ आरती को गावै, घर में बसि सुख, मंगल पावे ॥
आरती श्री साईं गुरुवर की, परमानन्द सदा सुरवर की ।
-------समाप्त-------