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दिवाली की रात क्यों बनाया जाता है काजल? 12 तरह की बलाओं से करता है रक्षा

दिवाली को लेकर अलग-अलग लोगों की अलग-अलग मान्यताएं हैं. कुछ लोग दिवाली के दिन काजल बनाते हैं.

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कुछ लोग दिवाली के दिन काजल बनाते हैं
कुछ लोग दिवाली के दिन काजल बनाते हैं

आज देशभर में दिवाली का त्योहार मनाया जा रहा है. नरक चतुर्दशी के अगले दिन दिवाली का त्योहार मनाया जाता है. इस दिन धन की देवी मां लक्ष्मी की आराधना की जाती है. दीयों से घरों को रौशन किया जाता है. मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए घरों में रंगोली बनाईं जाती हैं.

दिवाली को लेकर क्या हैं मान्यताएं?

मान्यता है कि भगवान राम चौदह साल के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे. अपने प्रभु राम, माता सीता और प्रभु लक्ष्मण के अयोध्या वापसी की खुशी में लोगों ने चारों तरफ दीप जलाकर उनका स्वागत किया था. मान्याताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान कृष्ण ने भी नरकासुर नामक राक्षस का वध किया था.

दिवाली पर क्यों बनाया जाता है काजल?

दिवाली को लेकर अलग-अलग लोगों की अलग-अलग मान्यताएं हैं. कुछ लोग दिवाली के दिन काजल बनाते हैं. इसके लिए रातभर दीया जलाया जाता है. दीए की ज्योत जलने पर जो कालापन इकठ्ठा होता है, उससे काजल बनाया जाता है. इस काजल को घर के बुजुर्ग सभी लोगों की आंखों में लगाते हैं.

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इसके अलावा इस काजल को घर की महत्वपूर्ण जगहें जैसे अलमारी, तिजोरी, खाना बनाने के चूल्हे पर भी लगाया जाता है. मान्यता है कि ऐसा करने से सभी तरह की बाधाएं दूर हो जाती हैं और घर में बर्कत बनी रहती है. ये भी माना जाता है कि काजल लगाने से व्यक्ति बुरी शक्तियों से बचा रहता है.

दिवाली पर प्रदूषण का स्तर बहुत ज्यादा होता है. प्रदूषण का असर लोगों की आंखों पर बहुत ज्यादा पड़ता है. कई बार प्रदूषण का स्तर ज्यादा होने पर कुछ लोगों की आंखें लाल हो जाती हैं. आंखों से पानी निकलने लगता है, जलन होती है. ऐसे में काजल लगाने से प्रदूषण और ठंडी हवाओं से होने वाले नुकसान से आंखें सुरक्षित रहती हैं. इस बात की पुष्टि आयुर्वेद में भी हो चुकी है.

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