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Maha Shivratri 2026: गृहस्थ होकर भी श्मशान में ही क्यों रहते हैं भगवान शिव? जानें इसके पीछे का अद्भुत रहस्य

Maha Shivratri 2026: भगवान शिव के दो पहलू हैं, एक आदर्श गृहस्थ का और दूसरा श्मशान में रहने वाला देवता. श्मशान में भगवान शिव का निवास जीवन-मृत्यु के चक्र और वैराग्य का प्रतीक है, जो मोह-माया से ऊपर उठने की सीख देता है.

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क्यों महादेव श्मशान के देव कहलाते हैं? (Photo: ITG)
क्यों महादेव श्मशान के देव कहलाते हैं? (Photo: ITG)

Maha Shivratri 2026: इस बार महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी 2026 को मनाया जाएगा. महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव को समर्पित सबसे बड़ा और पवित्र दिन माना जाता है. इस दिन रात में भक्त जागरण करते हैं, शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करते हैं. भोलेनाथ के अलग-अलग स्वरूपों का स्मरण करते हैं. लेकिन शिव का एक ऐसा रूप भी है, जो लोगों के मन में कई सवाल खड़े करता है यानी श्मशान में रहने वाले शिव.

सनातन परंपरा में भगवान शिव को सबसे रहस्यमयी देवता कहा गया है. वे एक ओर आदर्श गृहस्थ हैं. शिव पुराण के अनुसार, उनके परिवार में माता पार्वती, भगवान गणेश, कार्तिकेय और नंदी शामिल हैं. वे कैलाश पर्वत पर परिवार के साथ विराजते हैं, इसलिए उन्हें कैलाशपति भी कहा जाता है. लेकिन दूसरी ओर उन्हें श्मशान का देवता भी माना जाता है. सोचने वाली बात है कि जो देव परिवार के साथ रहते हैं, वे श्मशान को अपना निवास क्यों मानते हैं? आइए जानते हैं इसके पीछे का कारण. 

गृहस्थ होकर भी श्मशान को क्यों चुनते हैं शिव?

भगवान शिव को आमतौर पर परिवार के देवता के रूप में पूजा जाता है. अधिकतर घरों में शिव-पार्वती, गणेश और कार्तिकेय की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित होती है. वे एक आदर्श गृहस्थ माने जाते हैं, फिर भी उनका एक रूप श्मशान से जुड़ा हुआ है. यही बात लोगों को सोचने पर मजबूर करती है. दरअसल, जब कोई व्यक्ति अंतिम संस्कार में जाता है, तो उसे एक पल के लिए एहसास होता है कि सारी दौड़-भाग, धन और अहंकार यहीं खत्म हो जाएगा. इसी भावना को शास्त्रों में वैराग्य कहा गया है. भगवान शिव का श्मशान में निवास करना यह बताता है कि संसार में रहते हुए भी मन को मोह-माया से ऊपर रखना चाहिए. 

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श्‍मशान में रहने का महत्व

भगवान शिव के श्मशान में रहने को लेकर एक गहरी धार्मिक सोच भी जुड़ी हुई है. माना जाता है कि यह संसार हमेशा एक जैसा नहीं रहता, कभी निर्माण होता है तो कभी इसका विनाश. ब्रह्मा जी सृष्टि की रचना करते हैं, विष्णु जी उसका पालन करते हैं और अंत में शिव जी उसका संहार करते हैं. श्मशान वह स्थान है जहां जीवन की अंतिम यात्रा पूरी होती है. वहां पहुंचकर शरीर, उससे जुड़े रिश्ते और सारे बंधन समाप्त हो जाते हैं. सब कुछ अग्नि में भस्म हो जाता है और केवल आत्मा शेष रहती है.

धार्मिक मान्यता है कि मृत्यु के बाद आत्मा परम तत्व में विलीन हो जाती है और शिव उसी परम तत्व का प्रतीक हैं. इसी वजह से कहा जाता है कि भगवान शिव का श्मशान में वास इस सत्य को दर्शाता है कि जीवन और मृत्यु एक ही चक्र के दो पहलू हैं. वे हमें याद दिलाते हैं कि जो जन्मा है उसका अंत निश्चित है और अंत में सब कुछ शिव में ही समा जाता है. इसलिए, उन्हें श्मशान का देवता भी कहा जाता है.

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