धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब माता सती ने अपने पिता दक्ष के यहां मौजूद यज्ञ कुंड में आत्मदाह किया था, तो उनके वियोग में भगवान शिव अपनी सुध-बुध खो बैठे थे. माता सती को याद करते हुए भगवान शिव की आंखों से जो आंसू टपके थे उनसे दो कुंड बन गए. जिसमें से एक कुंड का नाम कटाक्ष कुंड पड़ गया.