Utpanna Ekadashi 2024 Date: सालभर में एकादशी के कुल 24 व्रत पड़ते हैं. हर माह दो एकादशी आती हैं. एक कृष्ण पक्ष में और दूसरी शुक्ल पक्ष में. सभी एकादशियों के नाम और महत्व भी अलग अलग हैं. आमतौर पर जब किसी को एकादशी व्रत रखना होता है तो वो किसी भी शुक्ल पक्ष की एकादशी से इस व्रत की शुरुआत कर सकता है. लेकिन वास्तव में एकादशी व्रत की शुरुआत उत्पन्ना एकादशी से करनी चाहिए. इसे ही पहली एकादशी माना जाता है.
एकादशी का व्रत इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
व्रतों में सर्वाधिक महत्वपूर्ण व्रत एकादशी का होता है. एकादशी का नियमित व्रत रखने से मन की चंचलता समाप्त होती है. धन और आरोग्य की प्राप्ति होती है. मनोरोग दूर होते हैं. उत्पन्ना एकादशी का व्रत आरोग्य, संतान प्राप्ति और मोक्ष के लिए किया जाने वाला व्रत है. कैसी भी मानसिक समस्या हो इस व्रत से दूर हो जाती है. यह मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की एकादशी को रखा जाता है. इस बार उत्पन्ना एकादशी 26 नवंबर को है.
उत्पन्ना एकादशी व्रत के नियम
यह व्रत व्रत दो तरह से रखा जाता है. निर्जला और फलाहारी या जलीय. निर्जला व्रत स्वस्थ्य व्यक्ति को ही रखना चाहिए. अन्य लोगों को फलाहारी या जलीय व्रत रखना चाहिए. इस व्रत में दशमी को रात में भोजन नहीं करना चाहिए. एकादशी को सुबह श्री कृष्ण की पूजा की जाती है. व्रत में सिर्फ फलों का ही भोग लगाया जाता है. इस दिन केवल जल और फल का ही सेवन किया जाता है.
उत्पन्ना एकादशी के विशेष प्रयोग
संतान की कामना के लिए उपाय
प्रातःकाल में पति पत्नी संयुक्त रूप से श्रीकृष्ण की उपासना करें. उन्हें पीले फल, पीले फूल, तुलसी दल और पंचामृत अर्पित करेंय इसके बाद संतान गोपाल मन्त्र का जाप करें. मंत्र होगा- "ॐ क्लीं देवकी सत गोविन्द वासुदेव जगत्पते ,देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणम गता "
इच्छा पूर्ति के लिए उपाय
उत्पन्ना एकादशी पर सूर्योदय से पहले उठें. साफ हल्के पीले रंग के कपड़े पहने. ग्यारह पीले जनेऊ और ग्यारह ही केले लें. अब तुलसी की माला से पीले आसन पर बैठकर 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का तीन या पांच माला जाप करें. जाप के बाद जनेऊ और केले भगवान कृष्ण के मंदिर में अर्पण कर दें. श्री कृष्ण को तुलसी दल और पंचामृत भी अर्पित करें. इसके बाद 'क्लीं कृष्ण क्लीं' का जाप करें. भगवान से कामना पूर्ति की प्रार्थना करें.
सुख संपन्नता के लिए उपाय
इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में जागकर स्नानादि के बाद भगवान विष्णु के सामने घी का दीपक जलाएं. फिर भगवान को फूल, धूप, दीप और अक्षत अर्पित करें. इसके बाद भगवान का जाप करते हुए सुख-संपन्नता की प्रार्थना करें.