प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देशवासियों से अपील की है कि वह एक वर्ष तक सोने की खरीदारी न करें. इसके बाद बाजार में हर तरफ सोने की चर्चा तेज है. इस बीच महाराष्ट्र का एक मंदिर भी अपने सोने-चांदी के भंडार को लेकर सुर्खियों में आ गया है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस मंदिर में के पास 253 किलोग्राम सोना और 4,614 किलोग्राम चांदी सुरक्षित है. यह आंकड़ा 31 मार्च 2026 तक की गणना के आधार पर मंदिर ट्रस्ट ने दिया है.
हम बात कर रहे हैं महाराष्ट्र के धाराशिव जिले स्थित तुजलाभवानी मंदिर की. इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मंदिर के ट्रस्ट ने अपने पास ढाई सौ किलो से ज्यादा सोना और साढ़े चार हजार किलो से ज्यादा चांदी होने की जानकारी दी है. रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2023-24 में ट्रस्ट को 16.49 किलोग्राम सोना और 260.60 किलोग्राम चांदी मिली थी. जबकि साल 2024-25 में यह आंकड़ा और भी बढ़ गया. इस दौरान मंदिर ट्रस्ट को 17.62 किलोग्राम सोना और 255.99 चांदी प्राप्त हुई.
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि साल 2025-26 में यहां श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाया गया सोना चांदी की तुलना में कम रहा. इस दौरान चढ़ावे में आने वाला सोना गिरकर 10.78 किलोग्राम ही रह गया. जबकि ट्रस्ट को 267.26 किलोग्राम चांदी की प्राप्ति हुई.
संभवत: सोने की बढ़ती कीमतों के चलते मंदिर के दान कोष में चांदी की तुलना में सोना कम चढ़ाया गया. बता दें कि तुजलाभवानी मंदिर महाराष्ट्रय के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है और इसे छत्रपति शिवाजी महाराज के वंशज भोसले परिवार की कुलदेवी माना जाता है.
तुजलाभवानी मंदिर का इतिहास
महाराष्ट्र का तुलजाभवानी मंदिर अनगिनत लोगों के लिए आस्था और भक्ति का प्रतीक माना जाता है. इस मंदिर को देवी के 51 शक्तिशाली पीठों में गिना जाता है. यह न सिर्फ एक पूजनीय स्थल है, बल्कि देश की सांस्कृतिक धरोहर भी है. छत्रपति शिवाजी महाराज के वंशजों में इस मंदिर को लेकर बड़ी आस्था है. कहते हैं कि मां तुलजा भवानी छत्रपति शिवाजी महाराज की कुलदेवी हैं. युद्ध पर जाने से पहले शिवाजी महाराज तुलजा देवी मां का आशीर्वाद लेने जरूर आते थे.