राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा आम आदमी पार्टी (AAP) से इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल हो गए हैं. शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी अपने उन आदर्शों और नैतिक मूल्यों से भटक गई है, जिसके लिए उसे बनाया गया था. राघव चड्ढा ने बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन से मिलकर भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ली. इस बड़े उलटफेर के बीच ज्योतिषाचार्य डॉ. अरुणेश कुमार शर्मा ने राघव चड्ढा के मूलांक, भाग्यांक और उनकी कुंडली के सितारों के आधार कई महत्वपूर्ण बातें कही हैं.
अरुणेश कुमार शर्मा ने बताया कि राघव चड्ढा का मूलांक 2 और भाग्यांक 3 है. मूलांक 2 चंद्रमा का अंक है. इस अंक के लोग सौम्य छवि और संतुलित व्यवहार के माने जाते हैं. इस मूलांक के जातकों की लोगों के बीच इमेज अच्छी बनती है. यह लोग कम प्रयास में भी अच्छी लोकप्रियता हासिल करने में कामयाब हो जाते हैं.
वहीं, भाग्यांक 3 के स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं, जो इन्हें ज्ञान, रणनीति और संचार के मामले में बेहतर बनाते हैं. ऐसे लोग अपनी वाणी व्यक्तित्व से जल्दी लोगों को आकर्षित कर लेते हैं. यही वजह है कि इस मूलांक के जातक राजनीति में बड़ी लोकप्रियता हासिल करते हैं. हालांकि राजनीति में स्थायी सफलता पाने के लिए इन्हें बहुत ज्यादा प्रयास करना पड़ता है. पॉलिटिक्स में इनकी राह भी थोड़ी मुश्किल ही होती है.
2 और 3 अंक वालों के लिए खास 2026
ज्योतिषाचार्य डॉ. अरुणेश कुमार शर्मा ने बताया कि साल 2026 सूर्य का वर्ष है. और चंद्रमा और बृहस्पति दोनों ही ग्रहों के साथ सूर्य का मैत्रीपूर्ण संबंध हैं. इसलिए इन दोनों ही अंक के जातकों के लिए यह साल अच्छा माना जा रहा है. यह वर्ष इनके लिए बड़े मंच पर सक्रियता को दर्शाता है. इस वर्ष इनके जीवन में कुछ बड़े बदलाव संभव दिख रहे हैं. ये जातक अपने फैसलों से लोगों को चौंका भी सकते हैं.
कुंडली में ग्रहों की स्थिति क्या कहती है?
ज्योतिषविद ने बताया कि राघव चड्ढा की कुंडली के 7वें भाव में शुक्र और सूर्य मिलकर बुधादित्य राजयोग का निर्माण कर रहे हैं. जो कि दांपत्य सुख और लाइफ पार्टनर के सहयोग का दर्शाता है. बता दें कि राघव चड्ढा ने बॉलीवुड एक्ट्रेस परिणीति चोपड़ा से शादी की है. कुंडली के 7वें भाव में सूर्य-बुध का साथ होना इनके निजी और वैवाहिक जीवन में बेहतर तालमेल को दर्शाता है. इस राजयोग के प्रभाव में जातक समाज सेवा जैसे कार्यों भी खूब रुचि रखता है.
वहीं, कुंडली के पांचवें भाव में केतु बैठा है. यह जातक के तेज दिमाग और क्रिएटिविटी को दर्शाता है. जबकि कुंडली के 9वें भाव में मौजूद शनि भाग्य में देरी और अस्थिरता को दर्शाता है. ऐसे लोगों को हाथ आए अवसरों को दीर्घकालिक सफलता में बदलने के लिए खूब संघर्ष करना पड़ता है.