देवगुरु बृहस्पति 18 जून को रात 9 बजकर 32 मिनट पर पुनर्वसु नक्षत्र से पुष्य नक्षत्र में गोचर करने वाले हैं. यह नक्षत्र शनि से संबंधित है. इस नक्षत्र गोचर का प्रभाव सभी राशियों पर पड़ सकता है. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार कर्क राशि, कन्या राशि और धनु राशि के जातकों को इससे विशेष लाभ मिलने की संभावना है. गुरु के इस नक्षत्र में आने के बाद इनके करियर और आर्थिक हालात से जुड़े मामलों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं.
कर्क राशि
कर्क राशि के जातकों के लिए गुरु का पुष्य नक्षत्र में प्रवेश लाभकारी माना जा रहा है. कार्यक्षेत्र में मेहनत और ऊर्जा का बेहतर परिणाम मिल सकता है. पेशेवर जीवन में अपनी अलग पहचान बनाने का अवसर मिल सकता है. परिवार का माहौल पहले से बेहतर होता नजर आ सकता है. किसी अच्छी खबर की प्राप्ति भी संभव है. धन से जुड़ी परेशानियों में राहत मिलने के संकेत हैं. इस दौरान आप मानसिक रूप से अधिक सकारात्मक और आत्मविश्वास से भरपूर महसूस कर सकते हैं.
कन्या राशि
कन्या राशि वालों के लिए यह गोचर कई अच्छे अवसर लेकर आ सकता है. आपकी वाणी और संवाद शैली लोगों को प्रभावित कर सकती है. व्यापार से जुड़े लोगों को किसी महत्वपूर्ण डील का लाभ मिल सकता है. लंबे समय से रुका हुआ कोई प्रोजेक्ट दोबारा गति पकड़ सकता है. प्रेम संबंधों में भी सुधार के संकेत हैं. नेतृत्व क्षमता में वृद्धि देखने को मिल सकती है. संतान का सहयोग मिलेगा, हालांकि स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही से बचने की सलाह दी गई है.
धनु राशि
धनु राशि के जातकों के लिए गुरु का यह नक्षत्र परिवर्तन फलदायक साबित हो सकता है. सामाजिक प्रतिष्ठा और मान-सम्मान में बढ़ोतरी के संकेत हैं. घर-परिवार में चल रही कुछ समस्याओं का समाधान निकल सकता है. विद्यार्थियों का मन पढ़ाई में अधिक लगेगा. कठिन परिस्थितियों में भी आप अपनी समझदारी और सूझबूझ से रास्ता निकालने में सफल रह सकते हैं. स्वास्थ्य और फिटनेस को लेकर सजगता बढ़ेगी. आत्मविश्वास में भी अच्छी वृद्धि देखने को मिल सकती है.
उपाय
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, गुरु ग्रह की शुभता प्राप्त करने के लिए कुछ सरल उपाय किए जा सकते हैं. पीली वस्तुओं का दान करना लाभकारी माना गया है. इसके अलावा नियमित रूप से "ॐ बृं बृहस्पतये नमः" मंत्र का जाप किया जा सकता है. केले के पेड़ की पूजा भी गुरु ग्रह की कृपा प्राप्त करने का एक शुभ उपाय माना गया है.